बिहार: 339 छात्रों की रिहाई, सरकार ने दी स्पष्ट स्थिति
Indianewslive247.com – Bihar – बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के बाद पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से राजनीतिक घमासान तेज हो गया। इस सिलसिले में बिहार सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि सत्यापन के बाद कुल 339 छात्रों को छोड़ा गया है। गृह विभाग के विशेष सचिव क्षत्रनील सिंह ने स्पष्ट किया कि 26 जुलाई की शाम 6 बजे से पहले हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ बिहार में कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और आंदोलन की चेतावनी
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कम सम्राट चौधरी को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि 27 जुलाई तक छात्रों को रिहा नहीं किया जाता है तो वे बिहार में बड़ा आंदोलन करेंगे। इसी बीच वाम दल के छात्र संगठन AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पटना आईं और घोषणा की कि यदि बिहार सरकार जल्द से जल्द छात्रों को बिना शर्त रिहा नहीं करती है तो 30 जुलाई को बिहार में बड़ा आंदोलन होगा।
यह आंदोलन जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन से भी अधिक बड़ा होगा।
बिहार पुलिस की कार्रवाई और आंकड़े
बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से बताया गया कि विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दल समर्थित छात्र संगठनों या छात्रों या युवाओं के स्तर से विभिन्न मुद्दों को लेकर 25 जुलाई को बिहार में राज्यव्यापी आंदोलन किया गया था। इस दौरान किए गए धरना-प्रदर्शन और जुलूस के दौरान कई जिलों में विधि-व्यवस्था की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई थी। इसके मद्देनजर बिहार राज्यभर में 694 लोगों को हिरासत में लिया गया। इसमें 339 नाबालिग एवं छात्रों को सत्यापन के बाद मुक्त कर दिया गया। हिंसक घटनाओं में शामिल 355 लोगों को न्यायालय में प्रस्तुत कर जेल भेजा गया है।
बिहार में अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर हमले
बिहार पुलिस ने बताया कि बिहार बंद के दौरान हिंसक घटनाओं में 91 पुलिस पदाधिकारी एवं पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए हैं। हिंसक घटनाओं में सीवान एवं सीतामढ़ी के एसपी के अलावा 2 अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी भी जख्मी हुए। कई थाना प्रभारियों के सिर फट गए। पटना में गांधी मैदान थाना प्रभारी को गंभीर चोट लगी। 14 सरकारी वाहन क्षतिग्रस्त हुए और 1 को आग के हवाले कर दिया गया। 13 आम लोगों को भी चोटें आई हैं।
सारण में हुई घटना में प्रखंड विकास पदाधिकारी सदर गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं। उनकी एक आंख खराब हो गई है। आईजीआईएमएस में उनकी चिकित्सा चल रही है। इसके अलावा सारण के रिविलगंज के बीडीओ पर भी बिहार में जानलेवा हमला किया गया। उनके सिर पर गंभीर चोट लगी है, जिसकी सर्जरी पटना के मेदांता अस्पताल में हुई है। दोनों पदाधिकारी गंभीर रूप से जख्मी हैं और वर्तमान में बिहार में इलाजरत हैं और इनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
बिहार के सीवान मामले में पुलिस की रिपोर्ट
25 जुलाई के आंदोलन के दौरान बिहार के सीवान के जेपी चौक के पास बंद समर्थकों ने पुलिस वालों को घेर लिया। मौके पर तैनात सिपाही अभिषेक कुमार ने जानमाल और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए चार राउंड गोली अपने बैरल को ऊपर करके फायर की थी। इस घटना में भीड़ में शामिल किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है। हालांकि इस घटना में शामिल सिपाही अभिषेक कुमार को बिहार में निलंबित कर दिया गया है।
बिहार पुलिस ने सीवान में चौक पर हुई इस घटना में जिन तीन लोगों के फायरिंग में घायल होने की बात सामने आ रही है, उनमें आरिफ (17 वर्ष), आकाश कुमार (22 वर्ष) और बुलेट कुमार गौड़ (20 वर्ष) शामिल हैं। इसमें बुलेट को मुख्य घटना स्थल से करीब 2 किमी दूर घायल पाया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, तीनों की हालत बिहार में खतरे से बाहर है। इन तीनों के फर्दबयान पर सीवान नगर थाना में बिहार में तीन अलग-अलग मामले दर्ज कराए गए हैं, जिनका कांड संख्या- 721, 722 और 723 है। इन मामलों की बिहार में तफ्तीश जारी है।
तीनों घायलों को बिहार के सीवान सदर अस्पताल में प्रारंभिक चिकित्सा कराने के बाद पटना के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जिसमें आरिफ को मेदांता अस्पताल से छुट्टी कर दी गई है। शेष दोनों की बिहार में हालत भी खतरे से पूरी तरह बाहर है।
बिहार सरकार ने यह भी कहा है कि 26 जुलाई की शाम 6 बजे से पहले दर्ज मामलों में गिरफ्तार या निरुद्ध सभी व्यक्तियों को शीघ्र रिहा किया जाएगा तथा उन मामलों में बिहार में भविष्य में भी किसी प्रकार की प्रत्यक्ष या परोक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी।

