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ब्रिक्स और यूएन में से किसे चुनें?: जयशंकर का करारा जवाब, बोले- दोनों में टकराव नहीं, सुधार के लिए साथ-साथ

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Foto : David Miller - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. ब्रिक्स और संयुक्त राष्ट्र में टकराव नहीं: जयशंकर
  2. कमियां होने पर भी संयुक्त राष्ट्र की भूमिका अहम
  3. कूटनीति में भरोसे का महत्व
  4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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  6. Frequently Asked Questions

ब्रिक्स और संयुक्त राष्ट्र में टकराव नहीं: जयशंकर

Indianewslive247.com – ब र क स और य एन को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि दोनों में से किसी एक को चुनने का सवाल भ्रामक है। उनके अनुसार, ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र का विकल्प नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावी बनाने की सुधारवादी मांग को आगे बढ़ाने वाला मंच है।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से जुड़े एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में कमियां हो सकती हैं, लेकिन इससे उनकी उपयोगिता समाप्त नहीं हो जाती। दुनिया को संवाद, सहयोग और साझा चुनौतियों के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच की जरूरत है।

‘ब्रिक्स या यूएन’ का प्रश्न भ्रामक क्यों है?

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखना उचित नहीं है। ब्रिक्स के सदस्य देशों की प्राथमिकता संयुक्त राष्ट्र को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे बदलते वैश्विक राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य के अनुरूप सुधारना है।

“यह ब्रिक्स या यूएन का सवाल नहीं है। ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करता है।”

उन्होंने कहा कि वैश्विक निर्णय-प्रक्रिया में अधिक देशों और क्षेत्रों की भागीदारी जरूरी है। सुधार की मांग का उद्देश्य संस्था की भूमिका को नकारना नहीं, बल्कि उसे अधिक सक्षम, विश्वसनीय और समावेशी बनाना है।

कमियां होने पर भी संयुक्त राष्ट्र की भूमिका अहम

विदेश मंत्री ने माना कि संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली और प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठते रहे हैं। फिर भी, उन्होंने कहा कि यदि ऐसा वैश्विक संगठन मौजूद नहीं होता तो देशों को मिलकर किसी न किसी रूप में इसी तरह का मंच बनाना पड़ता।

“अगर संयुक्त राष्ट्र नहीं होता, तो दुनिया को मिलकर किसी रूप में ऐसा संगठन बनाना पड़ता।”

उनके मुताबिक, जलवायु परिवर्तन, विकास, आर्थिक स्थिरता, तकनीकी बदलाव और मानवीय संकट जैसे मुद्दे किसी एक देश के स्तर पर हल नहीं किए जा सकते। ऐसे मामलों में बहुपक्षीय सहयोग और संवाद की आवश्यकता बनी रहती है।

ब्रिक्स विस्तार और गैर-पश्चिमी देशों की आवाज

जयशंकर ने ब्रिक्स के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि नए देशों के जुड़ने के बाद समूह की सदस्य संख्या दोगुनी हो गई है। कई अन्य देशों ने भी इस मंच से जुड़ने में दिलचस्पी दिखाई थी, जो इसकी बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स विभिन्न महाद्वीपों और अलग-अलग राजनीतिक तथा आर्थिक परिस्थितियों वाले देशों को साथ लाता है। इसका महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वैश्विक बहस में गैर-पश्चिमी देशों की प्राथमिकताओं और अनुभवों को अधिक जगह मिल सके।

ब र क स और य एन की भूमिका को पूरक रूप में देखने की जरूरत है। ब्रिक्स के भीतर लचीलापन, स्थिरता, नवाचार और सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होती है, जो संयुक्त राष्ट्र के व्यापक एजेंडे से भी जुड़े हुए हैं।

कूटनीति में भरोसे का महत्व

कूटनीति से जुड़े एक सवाल पर जयशंकर ने कहा कि हित, मूल्य और भरोसा—तीनों के जरिए बेहतर परिणाम हासिल करने का प्रयास होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने भरोसे को आधुनिक कूटनीति में विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया।

उनके अनुसार, मूल्य अक्सर घोषित किए जाते हैं, जबकि भरोसा व्यवहार, सहयोग के तरीके और कठिन परिस्थितियों में किसी देश के रुख से बनता है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में दीर्घकालिक साझेदारी के लिए यही भरोसा निर्णायक हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र का विकल्प है?

नहीं। जयशंकर के अनुसार, ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करता है और उसका उद्देश्य वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग को मजबूत करना है।

ब्रिक्स के विस्तार का क्या महत्व है?

नए सदस्यों के शामिल होने से ब्रिक्स में अधिक देशों और क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ी है। इससे वैश्विक मुद्दों पर गैर-पश्चिमी दृष्टिकोणों को व्यापक मंच मिल सकता है।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग क्यों उठती है?

सुधार की मांग इसलिए की जाती है ताकि वैश्विक संस्थाएं आज की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक वास्तविकताओं का बेहतर प्रतिनिधित्व कर सकें तथा निर्णय-प्रक्रिया अधिक समावेशी बने।

Frequently Asked Questions

What is ब र क स और य एन?

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Why does ब र क स और य एन matter?

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