यूएन में भारत की पाकिस्तान को दो टूक: जयशंकर बोले- सीमा पार आतंक में शामिल सरकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए
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यूएन में भारत का संदेश: आतंकवाद और समुद्री हमलों पर जवाबदेही जरूरी
Indianewslive247.com – य एन म भ रत क प – य एन म भ रत क विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में वैश्विक शांति, सीमा पार आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा पर भारत का स्पष्ट पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि युद्ध, अस्थिरता और जहाजों पर हमले दुनिया की आपूर्ति व्यवस्था तथा विकास को प्रभावित कर रहे हैं।
जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना शांति, सुरक्षा और देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से हुई थी। इसके बावजूद दुनिया में संघर्ष और तनाव लगातार बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार, शांति केवल युद्ध न होने का नाम नहीं है, बल्कि लोगों और देशों को भय व दबाव से मुक्त सुरक्षित वातावरण मिलना भी जरूरी है।
युद्ध से आपूर्ति और विकास पर असर
य एन म भ रत क के संदर्भ में विदेश मंत्री ने रेखांकित किया कि किसी एक क्षेत्र का युद्ध अब स्थानीय समस्या नहीं रहता। उसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि लगातार तनाव और गलत आकलन पूरी दुनिया को बड़े संकट की ओर ले जा सकते हैं। ऐसे समय में स्थिरता, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान आवश्यक है, ताकि संघर्षों का दायरा न बढ़े।
“शांति का अर्थ केवल युद्ध न होना नहीं है। यदि दुनिया निरंतर खतरों और दबावों में जी रही है, तो हम खतरे के किनारे खड़े हैं।”
जहाजों और नाविकों पर हमले अस्वीकार्य
जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र, लाल सागर और काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों तथा नाविकों को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समुद्र में यात्रा कर रहे लोगों और व्यापारिक जहाजों पर हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किए जा सकते।
समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार, ऊर्जा और जरूरी वस्तुओं की ढुलाई के लिए अहम हैं। इनके असुरक्षित होने से दूर-दराज के देशों में भी महंगाई, आपूर्ति बाधित होने और आर्थिक दबाव जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। य एन म भ रत क पर भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता दोहराई।
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत ने लाइबेरिया और 23 अन्य साझेदार देशों के साथ ऐसी गतिविधियों के खिलाफ वैश्विक राय बनाने की पहल में भाग लिया है। उन्होंने नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।
सीमा पार आतंकवाद पर सख्त रुख
आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि जब आतंकी गतिविधियों को राज्य समर्थन मिले और वे सीमा पार संचालित हों, तो संबंधित सरकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।
“सीमा पार आतंकवाद में शामिल और उसे समर्थन देने वाली सरकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।”
उन्होंने भारत की शून्य-सहनशीलता नीति दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई केवल निंदा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। आतंकी वित्तपोषण, सहायता नेटवर्क और संसाधनों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।
ग्लोबल साउथ के साथ भारत की साझेदारी
य एन म भ रत क पर अपने संबोधन में जयशंकर ने भारत की डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, बुनियादी ढांचे, नवाचार और स्टार्टअप क्षेत्र में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुभवों को साझेदार देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।
उन्होंने ग्लोबल साउथ के साथ एकजुटता को भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण आधार बताया। भारत का लक्ष्य साझेदार देशों की जरूरतों के अनुरूप सहयोग बढ़ाना और विकास के अवसरों को अधिक व्यापक बनाना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद में शामिल या उसे समर्थन देने वाली सरकारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही, आतंकी वित्तपोषण और सहायता तंत्र पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई।
समुद्री हमलों को लेकर भारत की चिंता क्या है?
भारत का कहना है कि वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमले अस्वीकार्य हैं, क्योंकि इससे मानव जीवन के साथ वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाएं भी प्रभावित होती हैं।
य एन म भ रत क का मुख्य संदेश क्या रहा?
भारत ने शांति, समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन, आतंकवाद के खिलाफ जवाबदेही और ग्लोबल साउथ के साथ सहयोग पर जोर दिया।
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