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Explainer: मिलते भाजपा के नेताओं से रहे, विलय NCPI में क्यों कर लिया; टीएमसी के बागियों की ये कैसी रणनीति?

Explainer: टीएमसी के बागियों क्यों एनसीपीआई में विलय किया? इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए, यह राजनीतिक निर्णय आपको बताएंगे।

एनसीपीआई क्या है?

Explainer – एनसीपीआई, त्रिपुरा में गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। इसका गठन 2022 में हुआ था और इसकी संस्थापक अध्यक्ष शिउली कुंडू हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने दो सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनकी जमानत लौटा दी गई। इसका चुनाव चिन्ह पेन की नीब और सात किरणें है।

बागी गुट की रणनीति क्यों एनसीपीआई की ओर जाई?

टीएमसी के बागी गुट ने दल-बदल कानून के तहत अपने विलय के बारे में जानकारी लेने के बाद एनसीपीआई में विलय का रास्ता चुना। इस निर्णय ने उन्हें आपके दल के असली सदस्य होने का दावा करने की अनुमति दी। दसवीं अनुसूची के पैरा 4 में कहा गया है कि यदि कोई दल कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के सहमति से अलग गुट में विलय करता है, तो इसे दल-बदल नहीं माना जाता।

सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के अनुसार, बागी गुट ने एनसीपीआई में विलय कर दिया है। जब पार्टी के दो-तिहाई विधायक दल अलग होता है, तो आपके नाम पर दावा करने की अनुमति नहीं दी जाती। यह निर्णय एक Explainer के तौर पर राजनीतिक आंदोलन की नींव रखता है।

पिछले मामलों में कैसे चला?

2016 में अरुणाचल प्रदेश में एक मामला देखने को मिला था। जब मुख्यमंत्री नबाम तुकी को छोड़कर पूरा विधायक दल पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में शामिल हो गया था। इस दल के नेतृत्व वाले नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEA) के अंतर्गत रहा था। इसके चलते राज्य से कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।

31 दिसंबर 2016 को मुख्यमंत्री पेमा खांडू और अन्य 32 विधायक पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। इस घटना ने अरुणाचल प्रदेश की राजनीतिक संरचना में गहरा असर डाला और अतीत में ऐसे निर्णय भी प्रेरित किए।

एनसीपीआई के गठन और उद्देश्य

एनसीपीआई के गठन के पीछे आम आदमी के राजनीतिक विस्तार के लिए एक नई आंदोलन की आवश्यकता होने का ध्यान रखा गया। इस पार्टी के लक्ष्य के तहत टीएमसी के बागियों ने बाजार में नए अवसर खोजने के लिए इस दल से जुड़े। इस विलय के द्वारा उन्हें नई सदस्यता के आधार पर एक अधिकार का दावा करने की अनुमति मिली।

एक Explainer के रूप में टीएमसी के बागियों की रणनीति

टीएमसी के बागी गुट ने एनसीपीआई में विलय करके अपनी राजनीतिक दृष्टिकोण के तहत एक बड़ी नई शक्ति को बनाने की कोशिश की। इस विलय के द्वारा वे भाजपा के साथ एक सीधे गठबंधन के बजाए अपने राजनीतिक दल के असली लोकप्रियता के आधार पर चुनावी संघर्ष में संभाल रहे हैं।

इस बारे में जानकारी के लिए, एनसीपीआई के गठन ने टीएमसी के बागियों के लिए एक सामाजिक आधार उपलब्ध कराया। जब राजनीतिक दल में असंतुलन होता है, तो एक Explainer के रूप में विलय करना एक शक्तिशाली र

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