CAPF: सीएपीएफ कर्मियों की सेवा समाप्ति के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली हाईकोर्ट के लिए बर्खास्त फैसला बहाल
सीएपीएफ के कर्मियों की अपेक्षा बर्खास्त करने के अधिकार का फैसला
CAPF – सीएपीएफ के कर्मियों की सेवा समाप्ति के मामलों की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में हो सकेगी। इस निर्णय के बारे में अपडेट हाईकोर्ट की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दर्ज किया है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की अदालत ने बीएसएफ कांस्टेबल की याचिका बहाल करते हुए इस निर्णय को लागू करने की अनुमति दी।
केस के पृष्ठभूमि और महत्वपूर्ण बिंदु
यह याचिका एक बीएसएफ कर्मचारी द्वारा दायर की गई थी, जिसे अपनी पहली पत्नी के बिना दूसरी शादी करने के कारण सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। विवाह के बाद उसे मालदा जिले के नारायणपुर में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिस पर वह निर्धारित अवधि के भीतर जवाब दाखिल नहीं कर सका। 2022 में कमांडेंट ने उसे बिना किसी पेंशन लाभ के सेवा समाप्ति का फैसला दे दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, “अगर कोई सीएपीएफ कर्मी न्यायाधीश द्वारा जारी किए गए बर्खास्त आदेश से प्रभावित हो रहा है, तो चाहे घटना दिल्ली के बाहर हुई हो या कारण बताओ नोटिस उत्पन्न हुआ हो, दिल्ली हाईकोर्ट को क्षेत्राधिकार प्राप्त होगा। इसलिए, यह केस उचित आवेदन बन जाएगा।”
पिछले फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने फोरम नॉन कन्वीनियंस के सिद्धांत को लागू करते हुए याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि यह अधिकार उत्पन्न होता है जहां अधिकारी द्वारा कार्रवाई होती है। बीएसएफ के महानिदेशक और गृह मंत्रालय के कार्यालय दिल्ली में होने के कारण, याचिका को स्वीकृति प्राप्त हो गई।
इस निर्णय के बाद, सीएपीएफ के कर्मियों को आगे के बर्खास्त फैसलों के विरुद्ध दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के अधिकार मिल गए हैं। यह फैसला संवैधानिक उपचार के लिए महत्वपूर्ण अधिकार के विस्तार को चिह्नित करता है। इससे आम कर्मचारियों के लिए न्यायालय द्वारा न्याय देने का रास्ता सुलभ हो गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर करने की अनुमति देता है जहां कार्रवाई का अधिकार उत्पन्न होता है। यदि इसमें संवैधानिक उपचार के प्रश्न शामिल हो और क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल अनुच्छेद 226 के खंड (1) के तहत किया गया हो, तो ‘फोरम नॉन कन्वीनियंस’ के सिद्धांत का लागू करना संभव नहीं होगा।”
इस निर्णय से सीएपीएफ के कर्मियों की शिकायतों को सुनवाई के लिए अधिक संभावना होगी। इस फैसले के पीछे मुख्य तर्क यह रहा कि क्षेत्राधिकार का उपयोग अनुच्छेद 226 के तहत हो रहा है। यह पूर्ववर्ती आदेश बदल देगा जिससे आम श्रमिकों के लिए न्याय के विस्तार होगे। इस आदेश के साथ न्यायालय द्वारा कार्य करने का अधिकार बर्खास्त करने के लिए विशेष रूप से उपलब्ध हो गया।
