2008 Ahmedabad Serial Blast: हाईकोर्ट ने मौत की सजा और उम्रकैद के फैसले को बरकरार रखे
2008 Ahmedabad Serial Blast – हाईकोर्ट ने 2008 अहमदाबाद के श्रृंखला ब्लास्ट मामले में अदालत के फैसले को अपनाए रखा है। इस मामले में 38 दोषियों को मौत की सजा और 11 आरोपियों को उम्रकैद के आदेश को रद्द नहीं किया गया। अदालत ने घायल लोगों के मुआवजे के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिसमें मृतकों के परिवार को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख रुपये और सामान्य रूप से घायलों को 1 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। इन भुगतान को 31 मार्च, 2027 तक जारी रखने का निर्देश दिया गया है।
2008 के श्रृंखला ब्लास्ट के बारे में जानकारी
2008 के अहमदाबाद श्रृंखला ब्लास्ट में दो दिन में तीन धमाके हुए थे। पहले ब्लास्ट में अहमदाबाद के केंद्रीय बाजार में 100 से अधिक लोग घायल हो गए, जबकि दूसरे ब्लास्ट में सूरत में 246 लोग जख्मी हो गए। इन धमाकों के कारण 56 लोग मृत घोषित किए गए। इस मामले में अहमदाबाद के क्राइम ब्रांच की जांच में लगभग 100 आरोपियों को चिह्नित किया गया था, जबकि 78 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला चलाया गया।
विशेष अदालत के फैसले और उच्च न्यायालय की पुष्टि
2022 में फरवरी के दौरान विशेष अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया। इसमें मुबीन शेख और मंसूर पीरभॉय शामिल थे, जिन्हें बम धमाके के साजिश रचने और धमकी भरे ईमेल भेजने के आरोप लगे थे। अदालत ने उन आरोपियों को अपनी गलती में स्पष्टीकरण के बाद अस्वीकृत कर दिया गया। हाईकोर्ट ने इस फैसले को पुष्टि करते हुए यह तय किया कि घायलों के मुआवजे के लिए सख्त निर्देश बरकरार रखे जाएं।
ईमेल में दावा किया गया था कि यह 2002 के गोधरा ब्लास्ट के बदला बर्बरता का नतीजा था।
श्रृंखला ब्लास्ट के बाद से अहमदाबाद में बदला बर्बरता के आरोप लगाए गए हैं। जांच में पाया गया कि इन ब्लास्ट के बारे में अप्रूवर के बयानों में संशोधन हो गए। चार अप्रूवर के बयान को वापस लेने के बाद उन्हें दोषी ठहराया गया। एक अप्रूवर के बयान को रद्द कर दिया गया, जबकि बाकी आरोपियों के खिलाफ आरोप लगाए गए। इन बयानों के आधार पर मुख्य आरोपियों के खिलाफ निर्णय लिया गया।
2008 के श्रृंखला ब्लास्ट में घायल लोगों के मुआवजे के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए। मृतकों के परिवार के लिए 10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों के लिए 5 लाख रुपये के भुगतान के निर्देश को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा। इस निर्देश के तहत राहत नहीं दी गई है, जिसके कारण निर्दोष लोगों को उम्रकैद के आदेश से राहत नहीं मिली। अदालत ने ब्लास्ट के बारे में लगातार जांच के आधार पर इस फैसले को अंतिम रूप दिया।
इस मामले के बारे में अहमदाबाद के हाईकोर्ट के निर्णय से आपराधिक अपराध के रूप में इसकी गंभीरता पर ब
