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यूपी: प्रदेश के प्राइमरी शिक्षकों के लिए बड़ी राहत, कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष टी

Foto : Daniel Davis - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. यूपी के प्राथमिक शिक्षकों को मिली बड़ी राहत: विशेष टीईटी का निर्णय
  2. सुप्रीम कोर्ट में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई
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  4. Frequently Asked Questions

यूपी के प्राथमिक शिक्षकों को मिली बड़ी राहत: विशेष टीईटी का निर्णय Indianewslive247.com – य प – उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव को भेजे गए

यूपी के प्राथमिक शिक्षकों को मिली बड़ी राहत: विशेष टीईटी का निर्णय

Indianewslive247.com – य प – उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव को भेजे गए पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि शासन द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार शिक्षकों और विशेष शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी आयोजित करने की कार्ययोजना तैयार कर जल्द ही प्रस्तुत की जाए। पूरे देश में प्रभावित शिक्षक इस मुद्दे पर लगातार आंदोलन कर रहे हैं और संसद के मानसून सत्र में भी राहत दिलाने के लिए दबाव बना रहे हैं।

दंपती शिक्षकों के लिए आवेदन तिथि बढ़ी

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ द्वारा परिषदीय शिक्षकों के अंतरजिलीय तबादलों को लेकर दिए गए निर्देशों के क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग ने दंपती शिक्षकों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि पांच अगस्त तक बढ़ा दी है। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को निर्देश दिया है कि न्यायालय के आदेश के अनुसार शासनादेश से आवृत शिक्षकों को आवेदन के लिए पांच अगस्त तक का समय दिया जाए।

बेसिक शिक्षा विभाग के पोर्टल पर सूचना जारी करते हुए सभी जिलों के शिक्षकों को इस बारे में सूचित किया जाएगा। दंपती शिक्षकों के तबादले को लेकर हुए कुछ भ्रम के कारण कई शिक्षक आवेदन करने से वंचित रह गए थे।

सुप्रीम कोर्ट में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई

उत्तर प्रदेश की 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़ी गड़बड़ियों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में गंभीर सुनवाई हुई। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने यूपी सरकार की ओर से पेश उस सूची पर सवाल उठाए जिसमें लगभग 8,270 अभ्यर्थियों के आरक्षण से जुड़ी त्रुटियों का उल्लेख है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस सूची को अंतिम मानने से इन्कार कर दिया और सभी पक्षों से कहा कि वे 2020 से अब तक इस मामले में क्या-क्या हुआ, इसका पूरा घटनाक्रम लिखकर सोमवार तक अदालत में जमा करें।

मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने अदालत के समक्ष संशोधित कटऑफ का भी उल्लेख किया। सरकार के अनुसार, पूरी चयन सूची को फिर से तैयार करने पर अनारक्षित वर्ग की कटऑफ 69.42, ओबीसी की 65.92, एससी की 60.14 और एसटी की 56.09 बनती है।

सरकार पर गंभीर आरोप

आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे, मनीष गोस्वामी, आरके सिंह और पुष्कर शर्मा ने सरकार के हलफनामे और सूची का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से प्रस्तुत सूची पारदर्शी नहीं है और जब तक पूरी मूल चयन सूची अभ्यर्थियों के प्राप्तांक, श्रेणी और उपश्रेणी के अनुसार सार्वजनिक नहीं की जाती, तब तक यह तय नहीं किया जा सकता कि गड़बड़ी कितनी सीटों पर हुई है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि पहले सरकार ने इस भर्ती में अनारक्षित वर्ग की कटऑफ 67.11 और ओबीसी की 66.73 बताई थी, जबकि अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में अनारक्षित की 69.42 और ओबीसी की 65.92 कटऑफ बताई जा रही है।

राज्य सरकार पर लगाए गए गंभीर आरोपों में यह भी शामिल है कि सरकार की 8,270 अभ्यर्थियों वाली सूची में ऐसे उम्मीदवारों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने दूसरी और तीसरी काउंसलिंग में हिस्सा ही नहीं लिया था। क्योंकि उनका चयन अन्य भर्तियों में हो चुका था। इसके अलावा सूची में ऐसे अभ्यर्थियों को भी शामिल करने का आरोप लगाया गया जिन्हें उत्तर कुंजी विवाद में एक अंक का लाभ मिला था और कुछ शिक्षा मित्रों के वर्गीकरण पर भी सवाल उठाए गए।

Frequently Asked Questions

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