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Supreme Court: ‘सीएनजी बिक्री पर मिले कमीशन पर BPCL-HPCL को देना होगा सर्विस टैक्स’, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

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Indianewslive247.com – “`html Supreme Court: BPCL-HPCL को सीएनजी कमीशन पर देना होगा सर्विस टैक्स

Supreme Court का निर्णय: सीएनजी बिक्री कमीशन पर लागू होगा सर्विस टैक्स

Supreme Court ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) को निर्देश दिया है कि वे महानगर गैस लिमिटेड (एमजीएल) की सीएनजी बिक्री पर मिलने वाले कमीशन पर सर्विस टैक्स चुकाएंगे। यह निर्णय जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने सुनाया है। Supreme Court के इस आदेश से दोनों तेल कंपनियों पर लगभग 16.69 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ आएगा।

कोर्ट ने कर विभाग की मूल मांग को सही ठहराते हुए लगभग 16.69 करोड़ रुपये के सर्विस टैक्स का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस राशि में बीपीसीएल पर 8.61 करोड़ रुपये और एचपीसीएल पर 8.08 करोड़ रुपये की देनदारी शामिल है। इसके अलावा दोनों कंपनियों को ब्याज और जुर्माना भी अदा करना होगा। Supreme Court ने स्पष्ट किया कि यह टैक्स सीएनजी बिक्री पर मिलने वाले कमीशन पर लागू होता है।

केवल एजेंट की भूमिका निभा रही थीं कंपनियां

Supreme Court ने स्पष्ट किया कि बीपीसीएल और एचपीसीएल सीएनजी को खरीदकर अपने नाम से नहीं बेच रही थीं। बल्कि ये दोनों तेल कंपनियां एमजीएल की एजेंट के रूप में कार्यरत थीं। गैस की मालिकाना हक एमजीएल के पास था, वही खुदरा कीमत निर्धारित करती थी और आपूर्ति व्यवस्था पर उसका पूर्ण नियंत्रण था। Supreme Court ने यह भी बताया कि दोनों तेल कंपनियां एमजीएल के लिए बिजनेस ऑक्सिलियरी सर्विस प्रदान कर रही थीं। इसलिए वे सेवा कर से छूट का दावा नहीं कर सकतीं।

दोनों कंपनियों की भूमिका केवल एक फैसिलिटेटर की थी, जो एमजीएल की ओर से सीएनजी की बिक्री कराने के लिए विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करा रही थीं।

सुविधाओं का विभाजन

मुंबई, ठाणे और आसपास के क्षेत्रों में बीपीसीएल और एचपीसीएल के पेट्रोल पंपों पर एमजीएल की सीएनजी बिक्री की जाती थी। इस व्यवस्था में एमजीएल ने कंप्रेसर, स्टोरेज टैंक, डिस्पेंसर, पाइपलाइन और अन्य उपकरण लगाए थे। दूसरी ओर, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने पेट्रोल पंप की जगह, बिजली, पानी, बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध कराए थे। इस प्रकार दोनों कंपनियों ने केवल बिक्री को सुगम बनाने का काम किया।

ट्रिब्यूनल के निर्णय का उलटफेर

कस्टम, एक्साइज एंड सर्विस टैक्स अपीलीय न्यायाधिकरण ने जून 2014 में बीपीसीएल और एचपीसीएल के पक्ष में फैसला सुनाया था। उस समय ट्रिब्यूनल ने कहा था कि यह लेनदेन प्रिंसिपल-टू-प्रिंसिपल आधार पर बिक्री का है, इसलिए सर्विस टैक्स लागू नहीं होगा। Supreme Court ने अब उस फैसले को पलटते हुए कर विभाग की मांग को बहाल कर दिया है। दोनों कंपनियों को अब सर्विस टैक्स की पूरी देनदारी चुकानी होगी।

Supreme Court के इस निर्णय से न केवल बीपीसीएल और एचपीसीएल बल्कि पूरे देश में सीएनजी बिक्री के टैक्सेशन पर भी प्रभाव पड़ेगा। यह फैसला कर विभाग के लिए एक बड़ी जीत है क्योंकि इससे सरकारी राजस्व में वृद्धि होगी।

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