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स्टारलिंक को मंजूरी मिलने में देरी क्यों? निशिकांत दुबे की समिति करेगी मंथन, मस्क के आरोपों पर भी चर्चा संभव

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Foto : Michael Martin - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. स्टारलिंक को मंजूरी में देरी पर संसदीय समिति करेगी चर्चा
  2. मस्क के आरोप और सरकार का जवाब
  3. भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के लिए कौन-कौन तैयार है?
  4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  5. Related Reading
  6. Frequently Asked Questions

स्टारलिंक को मंजूरी में देरी पर संसदीय समिति करेगी चर्चा

Indianewslive247.com – स ट रल क क म ज – भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की प्रक्रिया पर अब संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति चर्चा करेगी। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति ने इस विषय को विचार के लिए चुना है। बैठक के बाद 14 अक्तूबर को दुबे ने कहा कि आने वाले दिनों में सैटेलाइट इंटरनेट से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से मंथन होगा।

चर्चा का केंद्र यह रह सकता है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए मंजूरी की प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है और कंपनियों को व्यावसायिक संचालन शुरू करने के लिए किन शर्तों को पूरा करना बाकी है। एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने भारत में सेवा शुरू करने की अनुमति मिलने में देरी को लेकर सवाल उठाए हैं।

मस्क के आरोप और सरकार का जवाब

एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भारत में स्टारलिंक की शुरुआत में देरी पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री रोकने की कोशिश कर रहे हैं। मस्क ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को व्यंग्यात्मक रूप से ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ भी कहा था।

संचार मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि नियामकीय प्रक्रिया को अनुचित या भेदभावपूर्ण बताना गलत और निराधार है। सरकार का रुख है कि सभी कंपनियों को समान नियमों, लाइसेंस शर्तों और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा। संसदीय समिति की बैठक में मस्क के आरोपों तथा सरकार के जवाब पर भी चर्चा होने की संभावना है, हालांकि समिति के अंतिम एजेंडे की जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के लिए कौन-कौन तैयार है?

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस ने आवेदन किया है। जियो सैटकॉम रिलायंस जियो की सैटेलाइट सेवा से जुड़ी इकाई है, जबकि यूटेलसैट वनवेब को भारती का समर्थन प्राप्त है। भारती ही एयरटेल का संचालन करती है।

अमेजन की प्रोजेक्ट कुइपर ने भी भारतीय बाजार में सेवा शुरू करने में रुचि दिखाई है। हालांकि, उसे भी भारत में लागू नियामकीय और सुरक्षा संबंधी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

लाइसेंस के बाद भी सेवा शुरू क्यों नहीं हो रही?

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अनुसार, स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस को सैटेलाइट संचार लाइसेंस मिल चुके हैं। इसके बावजूद कंपनियां तुरंत व्यावसायिक सेवा शुरू नहीं कर सकतीं, क्योंकि सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन भी जरूरी हैं।

सरकार के मुताबिक, तीनों कंपनियां मंजूरी प्रक्रिया में लगभग समान स्तर पर हैं। दूरसंचार नियामक प्राधिकरण और दूरसंचार विभाग सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की कीमत तय करने के मुद्दे पर निर्णय के करीब हैं। स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए राजस्व आधारित शुल्क व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाना भी बाकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

भारत में स्टारलिंक की सेवा कब शुरू होगी?

स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत की तारीख तय नहीं है। कंपनी को सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन सहित बाकी नियामकीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

क्या केवल स्टारलिंक की मंजूरी रुकी हुई है?

नहीं। सरकार के अनुसार, स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस मंजूरी प्रक्रिया में लगभग एक ही स्तर पर हैं।

संसदीय समिति की चर्चा का क्या महत्व है?

समिति की चर्चा से सैटेलाइट इंटरनेट के नियमन, सुरक्षा शर्तों, स्पेक्ट्रम आवंटन और मंजूरी में देरी से जुड़े सवालों पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।

Frequently Asked Questions

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