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सेना प्रमुख: ‘जमीनी स्थिति ही सैन्य अभियान की सफलता का पैमाना’; सोशल मीडिया दुष्प्रचार पर क्या बोले धीरज सेठ?

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Foto : Charles Davis - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. जमीनी स्थिति ही सैन्य सफलता का वास्तविक पैमाना: स न प रम ख
  2. तकनीक का केंद्र जमीन पर तैनात सैनिक होना चाहिए
  3. तकनीक लड़ाई को छोटा कर सकती है, युद्ध को नहीं
  4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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  6. Frequently Asked Questions

जमीनी स्थिति ही सैन्य सफलता का वास्तविक पैमाना: स न प रम ख

Indianewslive247.com – स न प रम ख जनरल धीरज सेठ ने कहा है कि किसी भी सैन्य अभियान की सफलता का सबसे ठोस आकलन जमीन पर बनी स्थिति से होता है। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने रक्षा आत्मनिर्भरता, आधुनिक तकनीक, सैनिकों की भूमिका और सोशल मीडिया पर फैलने वाले दुष्प्रचार के प्रभाव पर अपने विचार रखे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल देश में हथियार या उपकरण बनाने तक सीमित नहीं है। इसकी वास्तविक परिभाषा में डिजाइन, अनुसंधान, विकास, उत्पादन, मरम्मत, रखरखाव और जरूरत के अनुसार उन्नयन की घरेलू क्षमता शामिल है।

रक्षा जरूरतों के लिए मजबूत घरेलू क्षमता

स न प रम ख के अनुसार, भारत को महत्वपूर्ण सैन्य जरूरतों के लिए बाहरी निर्भरता कम करते हुए अपनी तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को मजबूत बनाना होगा। घरेलू रक्षा उद्योग, शोध संस्थानों और उत्पादन इकाइयों की भूमिका केवल मौजूदा आवश्यकताओं को पूरा करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि रक्षा प्रणालियों की उपयोगिता उनके निर्माण के साथ समाप्त नहीं होती। स्पेयर पार्ट्स, प्रशिक्षण, रखरखाव, मरम्मत और समय पर तकनीकी सुधार भी किसी सैन्य क्षमता को प्रभावी बनाए रखने के लिए उतने ही आवश्यक हैं।

तकनीक का केंद्र जमीन पर तैनात सैनिक होना चाहिए

जनरल धीरज सेठ ने आधुनिक युद्ध में नई तकनीक की बढ़ती भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि उसका अंतिम उद्देश्य जमीन पर तैनात सैनिक की क्षमता और सुरक्षा बढ़ाना होना चाहिए। ड्रोन, निगरानी उपकरण, संचार नेटवर्क और सटीक हथियार उपयोगी हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता जमीनी बलों की जरूरतों से तय होती है।

युद्ध में सफलता का ठोस और उपयोगी पैमाना जमीन ही है।

स न प रम ख ने कहा कि किसी इलाके पर नियंत्रण हासिल करना, उसे बनाए रखना और वहां सुरक्षा सुनिश्चित करना अंततः जमीनी सैनिकों की भूमिका से जुड़ा होता है। इसलिए सैन्य आधुनिकीकरण का मूल्यांकन केवल उन्नत उपकरणों के आधार पर नहीं, बल्कि अभियान के वास्तविक परिणामों से किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया के दावों से सावधान रहने की जरूरत

सेना प्रमुख ने समकालीन संघर्षों में सोशल मीडिया की भूमिका पर भी चिंता जताई। संघर्षों से जुड़ी तस्वीरें, वीडियो, दावे और प्रतिक्रियाएं तेजी से प्रसारित होती हैं, जिससे वास्तविक घटनाक्रम और प्रचार के बीच अंतर करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

उन्होंने सोशल मीडिया के इस तेज सूचना प्रवाह को “साल्वो” के रूप में बताया। उनका कहना था कि किसी सैन्य कार्रवाई की सफलता या विफलता को वायरल पोस्ट, ऑनलाइन दावों या तात्कालिक प्रतिक्रियाओं के आधार पर नहीं परखा जा सकता। वास्तविक मूल्यांकन जमीनी नियंत्रण, सुरक्षा और निर्धारित सैन्य उद्देश्यों की प्राप्ति से होना चाहिए।

तकनीक लड़ाई को छोटा कर सकती है, युद्ध को नहीं

जनरल सेठ ने कहा कि आधुनिक तकनीक किसी विशेष लड़ाई या अभियान की अवधि घटा सकती है, लेकिन इससे पूरे युद्ध के शीघ्र समाप्त होने की गारंटी नहीं मिलती। आज के संघर्ष लंबे चल सकते हैं और उनके बीच कुछ चरण बेहद तीव्र हो सकते हैं।

तकनीक लड़ाई की अवधि कम कर सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि इससे पूरा युद्ध भी जल्दी खत्म हो।

उन्होंने यह भी कहा कि संघर्षों के दौरान आने वाले विराम रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। ऐसे समय में सेनाओं को अपनी स्थिति, संसाधनों, तैयारियों और अगली कार्रवाई की योजना का आकलन करना पड़ता है।

स्वदेशी तकनीक को पुराना पड़ने से बचाना होगा

सेना प्रमुख ने आगाह किया कि विदेशी निर्भरता घटाना जरूरी है, लेकिन स्वदेशी प्रणालियों को तेजी से बदलती तकनीक के अनुरूप बनाए रखना भी उतना ही अहम है। घरेलू उपकरणों और प्रणालियों को समय पर उन्नत नहीं किया गया तो वे उपयोग में आने से पहले ही अप्रासंगिक हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सेना प्रमुख ने सैन्य सफलता का पैमाना क्या बताया?

उन्होंने कहा कि किसी सैन्य अभियान की वास्तविक सफलता का आकलन जमीन पर नियंत्रण, सुरक्षा और सैन्य उद्देश्यों की प्राप्ति से होना चाहिए।

सोशल मीडिया के बारे में उनकी क्या चेतावनी थी?

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाले दावे और सामग्री भ्रम पैदा कर सकते हैं। सैन्य स्थिति का निष्कर्ष केवल ऑनलाइन प्रतिक्रियाओं के आधार पर नहीं निकालना चाहिए।

रक्षा आत्मनिर्भरता का व्यापक अर्थ क्या है?

इसका अर्थ केवल उपकरणों का घरेलू उत्पादन नहीं, बल्कि डिजाइन, विकास, उत्पादन, मरम्मत, रखरखाव और उन्नयन की संपूर्ण क्षमता देश के भीतर विकसित करना है।

Frequently Asked Questions

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