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कर्नाटक में आरक्षण पर बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने कहा- एससी-एसटी का कोटा बढ़ाना असांविधानिक, चीफ जस्टिस क्या बोले?

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Foto : Elizabeth Smith - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. कर्नाटक में आरक्षण पर हाईकोर्ट का अहम फैसला
  2. कब लागू हुआ था 2022 का आरक्षण कानून?
  3. कर्नाटक में आरक्षण पर फैसले से जुड़े सवाल
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  5. Frequently Asked Questions

कर्नाटक में आरक्षण पर हाईकोर्ट का अहम फैसला

Indianewslive247.com – कर न टक म आरक षण पर – कर्नाटक में आरक्षण से जुड़े 2022 के कानून को हाईकोर्ट ने असांविधानिक करार देते हुए उसके प्रमुख प्रावधान रद्द कर दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू और न्यायमूर्ति के. एस. हेमलेखा की पीठ ने कहा कि एससी और एसटी के लिए आरक्षण बढ़ाकर कुल सीमा 50 प्रतिशत से ऊपर ले जाना संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।

अदालत ने कर्नाटक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (शैक्षणिक संस्थानों में सीटों का आरक्षण और राज्य के तहत सेवाओं में नियुक्तियों या पदों का) अधिनियम, 2022 की धारा 3 को रद्द कर दिया। पीठ के अनुसार, यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करता है।

हाईकोर्ट ने कानून की धारा 4 को भी अमान्य ठहराया, जो राज्य सेवाओं में एससी और एसटी के लिए बढ़े हुए आरक्षण से जुड़ी थी। अदालत ने कहा कि यह धारा अनुच्छेद 14 और 16 के विपरीत है।

50 प्रतिशत सीमा को लेकर अदालत की टिप्पणी

कर्नाटक में आरक्षण का कुल प्रतिशत इस कानून के बाद 50 से बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया था। अदालत ने 1992 के इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा को सुप्रीम कोर्ट पहले तय कर चुका है और बाद के निर्णयों में भी इसे बरकरार रखा गया है।

हाईकोर्ट ने माना कि 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण संविधान के समानता संबंधी प्रावधानों के दायरे में नहीं आता।

इस कानून को दो याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी गई थी। एक याचिका डॉ. आंबेडकर अनुसूचित जाति फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुमार मित्रा ने दायर की थी। दूसरी याचिका सागर एच. आर., प्रज्वल कुमार डी. और पुरुषोत्तम गौड़ा जी. एम. ने दाखिल की थी। ये सभी सिविल इंजीनियरिंग स्नातक हैं और उन्होंने बीबीएमपी में सहायक इंजीनियर (सिविल) पद के लिए आवेदन किया था।

कब लागू हुआ था 2022 का आरक्षण कानून?

यह कानून भाजपा सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व में पारित हुआ था। इसे 11 जनवरी 2023 को राज्यपाल की मंजूरी मिली और अगले दिन, 12 जनवरी 2023 को कर्नाटक गजट में प्रकाशित किया गया।

कानून एससी और एसटी समुदायों के प्रतिनिधित्व से संबंधित सिफारिशों की पृष्ठभूमि में बनाया गया था। इनमें न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) नागममोहन दास आयोग की रिपोर्ट और पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुभाष बी. की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशें शामिल थीं।

सरकार ने क्या कहा और आगे क्या हो सकता है?

उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने फैसले को गंभीर बताया और कहा कि इसका सामाजिक न्याय, शिक्षा तथा सार्वजनिक रोजगार पर दूरगामी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार न्यायपालिका और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान करती है।

परमेश्वर ने पिछली भाजपा सरकार की राजनीतिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाए और केंद्र से 50 प्रतिशत सीमा की व्यापक समीक्षा का आग्रह किया। उन्होंने कर्नाटक को नौवीं अनुसूची में शामिल करने के अनुरोध पर भी तत्काल विचार की मांग की। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील समेत उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकती है।

कर्नाटक में आरक्षण पर फैसले से जुड़े सवाल

हाईकोर्ट ने किस कानून को रद्द किया?

हाईकोर्ट ने कर्नाटक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण अधिनियम, 2022 की धारा 3 और धारा 4 को असांविधानिक ठहराया है।

कुल आरक्षण कितना हो गया था?

2022 के कानून के बाद एससी, एसटी और ओबीसी के लिए कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया था।

क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट जा सकती है?

हां, राज्य सरकार ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील सहित सभी उपलब्ध कानूनी उपायों पर विचार करेगी।

Frequently Asked Questions

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