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CJP Protest: ‘रंग दे बसंती’ से लेकर ‘युवा’ तक, जानें किन फिल्मों में दिखा विरोध प्रदर्शन का नया रूप

Foto : Elizabeth Smith - indianewslive247.com

CJP Protest: विरोध प्रदर्शन की कहानी इन फिल्मों में

Indianewslive247.com – केंद्रीय पुलिस प्रशासन पर चल रहे CJP Protest के दौरान दर्शकों को याद आ सकते हैं वे सिनेमाई कृति जिनमें युवाओं की आवाज़ और सत्याग्रह की भावना को चित्रित किया गया है। ये फिल्में समाज में बदलाव लाने के लिए उठे प्रश्नों को दर्शाती हैं। CJP Protest से जुड़े विरोध के दृश्य कई फिल्मों में पहले भी दिखाए जा चुके हैं।

रंग दे बसंती

2006 में पर्दे पर आई इस कृति में कॉलेज के छात्रों की राजनीति से दूर रहने वाली जिंदगी को दिखाया गया था। एक डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग के दौरान उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु, अशफाकुल्लाह खान और बिस्मिल के बारे में पता चला। इससे लोकतंत्र के महत्व और भविष्य के प्रति उनकी दृष्टि बदली। राकेश ओमप्रकाश मेहरा द्वारा निर्देशित यह फिल्म युवा पीढ़ी पर आधारित थी और दर्शकों को बहुत पसंद आई।

युवा

2004 में रिलीज हुई इस फिल्म में समाज की गुंडागिर्दी और उसके कॉलेज छात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव को चित्रित किया गया। अजय देवगन ने माइकल नामक किरदार निभाया जो समाज में बदलाव चाहता था और कॉलेज का स्टूडेंट लीडर भी था। राजनीतिक भ्रष्ट नेताओं के कारण वह लगातार मुश्किलों से घिरा रहता था। कई हमले हुए लेकिन उनका मनोबल नहीं टूटा।

नो वन किल्ड जैसिका

नब्बे के दशक में घटित जैसिका लाल हत्याकांड पर आधारित इस फिल्म में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की शक्ति को दिखाया गया। कैंडिल मार्च से लेकर पोस्टर मार्च तक सच्चाई की लड़ाई को चित्रित किया गया। विद्या बालन और रानी मुखर्जी मुख्य भूमिकाओं में थीं जबकि राज कुमार गुप्ता ने निर्देशन संभाला।

हासिल

2003 में प्रदर्शित इस फिल्म में प्रयागराज की यूनिवर्सिटी में चलने वाली स्टूडेंट पॉलिटिक्स के उतार-चढ़ाव को दर्शाया गया। तिग्मांशु धूलिया ने इसका निर्देशन किया था। लव स्टोरी भी इसमें फंसी हुई है। एक्टिविज्म और जागरुकता को सधे हुए तरीके से पेश किया गया है। लोकतंत्र में युवाओं के भविष्य के महत्व को समझाया गया। जिमी शेरगिल, इरफान खान और आशुतोष राणा मुख्य किरदारों में थे।

मैं आजाद हूं

1989 में रिलीज हुई इस फिल्म का गाना ‘इतने बाजू इतने सर’ काफी मशहूर हुआ था जिसे अमिताभ बच्चन ने स्वयं गाया था। एक महिला पत्रकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग और एक साधारण इंसान के भाग को दिखाया गया। समाजिक एकता और संघर्ष के खिलाफ होने वाली लड़ाई से प्रभावित पटकथा में शबाना आजमी और अमिताभ बच्चन ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

सरदार उधम

2021 में पर्दे पर आई इस फिल्म का निर्देशन शूजीत सरकार ने किया था। विक्की कौशल ने सरदार उधम सिंह की भूमिका निभाई थी। लोकतंत्र और सहमति की सोच को साफ दिखाया गया। अन्याय के खिलाफ लड़ाई और विरोध करने के हक की भावना से यह प्रेरित है।

आरक्षण

2011 में रिलीज हुई इस फिल्म का निर्देशन प्रकाश झा ने किया था। शिक्षा विभाग को व्यापार बनाने और जातिगत भेदभाव को दिखाया गया। अमिताभ बच्चन, सैफ अली खान और दीपिका पादुकोण अहम भूमिकाओं में थे। हक के लिए सही तरीके से विरोध करना और एकजुटता की ताकत को दिखाया गया।

रांझणा

यह मुख्य रूप से एक प्रेम कहानी थी लेकिन इसके एक हिस्से में कॉलेज के छात्रों का राजनीति में उतरना और प्रोटेस्ट करना भी दिखाया गया। गंदी राजनीति के खिलाफ लोगों की एकजुटता के कई सीन आए। अभय देओल के किरदार से कहानी में राजनीति की शुरुआत होती है जिसके बाद धनुष के किरदार तक इसे दिखाया जाता है। आनंद एल राय ने निर्देशन किया था। सोनम कपूर, धनुष और अभय देओल मुख्य भूमिकाओं में थे।

गुलाल

2009 में प्रदर्शित इस फिल्म में राज सिंब चौधरी, के के मेनन और पियूष मिश्रा मुख्य किरदारों में थे। छात्र राजनीति और अलगाववाद की समस्याओं को दिखाया गया। युवाओं की सोच पर इनका कितना प्रभाव पड़ता है यह सब इस फिल्म में दिखाया गया।

सत्याग्रह

2013 में रिलीज हुई इस फिल्म का निर्देशन प्रकाश राज ने किया था। एक वृद्ध व्यक्ति की कहानी है जो अपने बेटे की पेंशन के लिए अधिकारियों के सामने जलील होता है। आक्रोश में वह अधिकारियों को थप्पड़ मार देता है। भ्रष्ट अधिकारी उसे जेल में बंद कर देते हैं। समाज के लोग उसके लिए एकजुट होते हैं और लड़ते हैं। विरोध के दृश्य काफी अच्छी तरह दिखाए गए हैं।

CJP Protest के दौरान इन फिल्मों को देखकर आप विरोध प्रदर्शन की नई परिभाषा को समझ सकते हैं।

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