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UP: ‘ये दोहरा मापदंड…’, मस्जिद पर चला बुलडोजर तो भड़क गए सपा सांसद बर्क, असद मुठभेड़ को भी बताया फर्जी

UP में दोहरा मापदंड, असद मुठभेड़ को फर्जी बताया

UP – उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने असद के मुठभेड़ को गलत बताया है और उत्तर प्रदेश (UP) के विधि विभाग में दोहरे मापदंड के आरोप लगाए हैं। बर्क ने कहा कि अगर कोई मुस्लिम व्यक्ति दोहरे मापदंड के तहत एक हिंदू के खिलाफ आक्रमण करता है तो असली मुठभेड़ के रूप में घोषित किया जाता है। लेकिन जब एक हिंदू एक हिंदू के खिलाफ हत्या करता है तो केवल गिरफ्तारी की घोषणा की जाती है। इस आरोप के बाद बर्क ने गंभीर चिंता व्यक्त की है कि उत्तर प्रदेश में अन्य मुठभेड़ों के बारे में भी न्याय नहीं मिल रहा है।

मस्जिद पर बुलडोजर तो भड़क गए सपा नेता

बर्क ने यह भी तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश में पुलिस और प्रशासन के बुलडोजर के उपयोग ने असली घटनाओं की सच्चाई को छुपा दिया है। वे कहते हैं कि जब कोई भी बुलडोजर लगाया जाता है तो अत्यधिक सुनिश्चित रूप से यह लगता है कि उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को सजा देने का वास्तविक कार्य नहीं हो रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के अंतर द्वंद्वात्मक व्यवहार का प्रतिनिधित्व करते हैं और इसके कारण उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

दोहरा मापदंड के आरोप और प्रतिक्रिया

सपा सांसद बर्क ने इस दोहरे मापदंड के आरोप के बारे में ज्यादा विवरण दिया। उन्होंने कहा कि यह आरोप उत्तर प्रदेश के न्याय प्रणाली के विरुद्ध हैं। उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताया कि जब उत्तर प्रदेश में कोई मुस्लिम आरोपी हिंदू के खिलाफ आक्रमण करता है तो मुठभेड़ के रूप में घोषित किया जाता है। लेकिन हिंदू द्वारा हिंदू के खिलाफ हत्या के मामले में केवल गिरफ्तारी की घोषणा की जाती है। बर्क के आरोप के बाद अब उत्तर प्रदेश के विधि विभाग की ताजा जांच के बारे में चर्चा शुरू हो गई है।

“उत्तर प्रदेश के न्याय व्यवस्था में एक विशेष मापदंड के कारण सच्चाई को छिपा दिया जाता है। इसके कारण गलत करने वाले अधिकारियों को न्याय नहीं मिल रहा है।”

इस विवाद के बारे में विस्तार से बताने वाले लेखक ने बताया कि उत्तर प्रदेश के अधिकारियों द्वारा मुठभेड़ के बारे में विभिन्न बयान दिए गए हैं। जब बुलडोजर के उपयोग के बारे में चर्चा होती है तो अगले दिन असद के मुठभेड़ को भी गलत बताया जाता है। इस दोहरे मापदंड के आरोप के बाद उत्तर प्रदेश के नागरिकों में विरोध उत्पन्न हो गया है। कई लोग इस घटना को उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के द्वारा तैयार किए गए बयानों के अनुसार असली मुठभेड़ नहीं रहे गए हैं।

उत्तर प्रदेश में अब इस विवाद के बारे में जांच शुरू हो गई है। इस बारे में लेखक ने कहा कि एक बार फिर इस दोहरे मापदंड के आरोप के बाद उत्तर प्रदेश के विधि विभाग में तेजी से अनुसंधान

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