ताहिर हुसैन सहित पांचों को फांसी की मांग: दिल्ली पुलिस की तलब
Indianewslive247.com – इंटेलिजेंस ब्यूरो के सुरक्षा सहायक अंकित शर्मा की हत्या मामले में दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में जोरदार बहस की। विशेष लोक अभियोजक मधुकर पांडे ने अदालत को बताया कि शर्मा का अपहरण कर उसे बेरहमी से मारा गया। दोषियों ने उसकी मौत के बाद भी शव के साथ यातना जारी रखी। शर्मा के शरीर पर कुल 51 चोटें मिलीं, जिनमें 18 नुकीले हथियारों से लगी थीं।
अभियोजक ने इस मामले को सुनियोजित और जघन्य हत्या करार दिया। उन्होंने कहा कि अपराध के दौरान दोषी कसाई बन गए थे। 2020 के दिल्ली दंगों में मारे गए 53 लोगों के संदर्भ में इस मामले को देखने की बात कही गई। पीड़ित पक्ष ने कोई उकसावा नहीं दिया था, बल्कि दोषियों ने जानबूझकर हत्या की।
बचाव पक्ष की दलीलें
ताहिर हुसैन के वकील राजीव मोहन और तारा नरूला ने मौत की सजा के खिलाफ बहस की। उन्होंने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल की कोई विशिष्ट भूमिका सामने नहीं आई। वकीलों ने बताया कि 11 आरोपियों में से छह को बरी कर दिया गया था। मौत की सजा दुर्लभतम मामलों में ही दी जाती है, यह भी उनका तर्क था। हुसैन का जेल में आचरण अच्छा रहा, यह बात भी उन्होंने उठाई।
दोषियों ने अपराध के दौरान “कसाई का रूप ले लिया था”।
अदालत का फैसला और आरोप
अदालत ने 13 जुलाई को हुसैन और चार अन्य को शर्मा की हत्या का दोषी ठहराया। हुसैन भारी हथियारों से लैस भीड़ का सदस्य था। यह भीड़ हिंदुओं के खिलाफ दंगे, आगजनी और लूटपाट के लिए इकट्ठी हुई थी, जिसने शर्मा की बर्बर हमले में हत्या की। हुसैन को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 365, 147, 148, 153ए, 188 और 149 के तहत दोषी ठहराया गया।
31 जुलाई को अदालत अपना फैसला सुनाएगी। शर्मा पर 2020 दिल्ली दंगों के दौरान भीड़ ने हमला किया था, उनका शव नाले में मिला था।
ताहिर हुसैन: परिचय और पृष्ठभूमि
ताहिर हुसैन ने 2017 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीता। मूल रूप से वे उत्तर प्रदेश के अमरोहा स्थित पौरारा गांव के रहने वाले हैं। पांच भाइयों में ताहिर सबसे बड़े हैं। 2017 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने 18 करोड़ की घोषित संपत्ति बताई थी।
2020 के दिल्ली दंगों में ताहिर का नाम सामने आया। दंगों में उनके नाम आने के बाद आम आदमी पार्टी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। ताहिर और उनके समर्थकों पर आईबी के स्टाफ अंकित की हत्या का आरोप लगा।
दंगों की पृष्ठभूमि
वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुईं। इसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और कई घायल हो गए थे।
जब अंकित शर्मा आरोपियों को शांत करने और उनसे कानून हाथ में नहीं लेने का आग्रह कर रहे थे, तभी उन्हें पकड़ लिया गया। उनकी जान लेने के बाद शव नाले में फेंक दिया गया था। समझाने से नाराज होकर दंगाइयों ने जान ले ली थी।
ताहिर पर लगे आरोप
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर इलाके में रहने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो के सुरक्षा सहायक 26 वर्षीय अंकित शर्मा की दंगाइयों ने हत्या कर दी थी। इसके पीछे आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन का नाम सामने आया।
ताहिर हुसैन के खिलाफ दयालपुर थाने में हत्या, आगजनी और हिंसा फैलाने का मामला दर्ज हुआ। पुलिस ने ताहिर के मकान की तलाशी ली तो वहां से पेट्रोल बम, गुलेल और तेजाब बरामद हुआ। बवाल का वीडियो सामने आया तो ताहिर ने मान लिया कि वीडियो उनकी छत का ही है।
27 फरवरी 2020 को आप ने पार्टी से निष्कासित कर दिया। 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की इस हिंसा में कम से कम 53 लोग मारे गए और लगभग 700 घायल हो गए थे।
22 अप्रैल 2020 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ताहिर हुसैन पर आतंकवाद विरोधी कानून ‘अवैध गतिविधियां रोकथाम अधिनियम’ (यूएपीए) लगाया था।

