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वांगचुक मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई: अंतरिम आदेश देने से किया इनकार, केंद्र को नोटिस; मिलने की अनुमति बरकरार

हाईकोर्ट में व गच क म मल म सुनवाई: केंद्र को नोटिस और अंतरिम आदेश बरकरार रखा गया

मामले में रिपोर्ट पेश करते हुए जवाब दिया गया

व गच क म मल म ह – दिल्ली हाईकोर्ट में व गच क म मल म के लिए बुधवार को शुरू हुई सुनवाई में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने केंद्र के पक्ष में तर्क देते हुए कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी बरकरार रखी गई है। उन्होंने 16 जुलाई के आदेश के उल्लेख करते हुए कहा कि डॉक्टरों को समय-समय पर गतिविधियां करने के लिए निर्देश दिए गए थे।

“हम इस मैटर को डील कर रहे हैं, कृपया 16 जुलाई के आदेश को देखा जाए। वहां कहा गया है कि सरकारी डॉक्टरों द्वारा नियमित जांच की जाए और जरूरत पड़ने पर मेडिकल हस्तक्षेप किया जाए।”

उपचार प्रक्रिया पर विवाद

शर्मा ने सोनम वांगचुक की हेल्थ स्टेट्स रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि वांगचुक डायबिटिक नहीं है, लेकिन 18 दिनों के उपवास के कारण किडनी के कार्य में समस्या उत्पन्न हो रही है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में उनके शरीर के कई पैरामीटर बॉर्डर लाइन पर हैं और इलेक्ट्रोलाइट्स के बिना शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में कठिनाई हो रही है।

“हम उन्हें एम्स में शिफ्ट कर सकते हैं। उनके शरीर के कई पैरामीटर बॉर्डर लाइन पर हैं। शुगर और पोटेशियम का स्तर निम्नतम है। उन्हें कार्बोहाइड्रेट और पोटेशियम की आवश्यकता है।”

अतिरिक्त अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने केंद्र के पक्ष में विवाद खारी करते हुए कहा कि वांगचुक हिरासत में नहीं हैं और उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मेदांता विश्व स्तरीय अस्पताल है और एम्स के चिकित्सक उपचार के तरीके पर आपत्ति नहीं कर सकते हैं।

पुलिसकर्मी उपस्थिति पर आरोप

सुनवाई के दौरान एक चिकित्सक ने कहा कि वांगचुक का रक्तचाप बढ़ रहा है और अस्पताल के कक्ष में पुलिसकर्मी मौजूद हैं। इस दावे का खंडन करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि कक्ष में कोई पुलिसकर्मी नहीं है और उपचार के तरीके पर कोई आपत्ति नहीं है।

“क्या इस तरह किसी मरीज का उपचार किया जा सकता है? अस्पताल के कक्ष में कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं है।”

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने केंद्र के पक्ष के आदेश के खिलाफ आर

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