मानसून सत्र: टीएमसी के बागी सांसदों की अलग बैठने की व्यवस्था की घोषणा
Monsoon Session – लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मानसून सत्र के आगामी शुरूआती चरण में एक गहरा बदलाव किया है। उन्होंने बताया कि अपने नए डिवीजन नंबरों के आधार पर सदन में बैठने वाले सांसदों की सीटों को बदल दिया गया है। इस बदलाव के चलते टीएमसी के 20 बागी सांसद अब अलग बैठेंगे, जिससे विपक्षी दलों के राजनीतिक गठन में गहरा प्रभाव पड़ेगा। यह बदलाव मानसून सत्र में चर्चा और बहस के दौरान बागी सांसदों की संगठित आवाज को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखता है।
डिवीजन नंबर के परिवर्तन और राजनीतिक गठन
लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों के मुताबिक, सांसदों के डिवीजन नंबरों के आधार पर सीटें निर्धारित की जाती हैं। अब तक बदले गए 39 सांसदों के साथ नई व्यवस्था के आगे टीएमसी के बागी सदस्य अपने विचार को एक साथ रखने के लिए अलग बैठेंगे। इस गठन में मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के विचारों को आसानी से दिखाई देने का उद्देश्य रखा गया है।
अभिषेक बनर्जी के सांसद की सीट भी नई व्यवस्था में बदल दी गई है। वाईएसआर कांग्रेस के पी. वी. मिधुन रेड्डी और शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल के सांसद भी अपनी सीटों को आवंटित कर दिया गया है। इस बदलाव के बारे में अध्यक्ष के फैसले के आधार पर ही व्यवस्था की गई है।
शिवसेना मर्जर के प्रभाव और बागी सांसदों की स्थिति
शनिवार को ओम बिरला ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी गई। इस निर्णय के साथ ही टीएमसी के 20 बागी सांसदों को मानसून सत्र में अपनी बैठने की व्यवस्था बदलने की अनुमति दे दी गई। बागी सांसदों की ओर से यह दावा किया गया है कि वे नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो चुके हैं।
इस व्यवस्था के पीछे मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के एकजुट रुख को आकर्षित करने की योजना है। बदली गई सीटों के कारण अब टीएमसी के बागी सांसद अपनी राय को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर सकेंगे। इस तरह राजनीतिक संगठन में मानसून सत्र के दौरान गहरी गतिविधियां आसानी से संभव होंगी।
मानसून सत्र के दौरान बहस की संभावना
इस बदलाव के चलते अपेक्षित मानसून सत्र में टीएमसी के बागी सांसदों का एक रूप निर्मित हो सकता है। इसके अलावा लोकसभा में नई सीट व्यवस्था के प्रभाव राजनीतिक बहसों और मतदान अभियान पर भी पड़ेगा। मानसून सत्र के दौरान बागी सांसदों के रूप में अपनी बैठने की व्यवस्था बदलने के लिए एक बैठक आयोजित की गई है।
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