हरियाली की कमी के कारण दिल्ली की सांसें घुट रहीं
Health Threat – दिल्ली के पर्यावरणीय संतुलन में धीरे-धीरे गिरावट आ रही है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के शोध द्वारा सामने आए आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले 32 वर्षों में शहर के प्राकृतिक भू-दृश्य का लगभग पांचवां हिस्सा खो दिया गया है। इस अध्ययन में लैंडसेट उपग्रह चित्रों के विश्लेषण के माध्यम से 1991, 2001, 2011 और 2023 के तुलनात्मक आंकड़े जांचे गए।
पारिस्थितिकीय गुणवत्ता में गिरावट
मध्य दिल्ली में उत्कृष्ट पारिस्थितिक तंत्र क्षेत्र 1991 में 13.88 वर्ग किलोमीटर से 2023 में 3.63 वर्ग किलोमीटर में कम हो गए। इसके विपरीत, खराब पारिस्थितिकी स्वास्थ्य वाले क्षेत्रों का विस्तार 54.90 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 816.36 वर्ग किलोमीटर पहुंच गया।
अध्ययन के अनुसार, दिल्ली का मीडियन ईको सिस्टम हेल्थ इंडेक्स 1991 में 53 फीसदी से घटकर 2023 में 30 फीसदी रह गया। इस तेजी से गिरावट के साथ ही प्राकृतिक लचीलापन क्षमता का सूचकांक 0.61 से घटकर 0.36 रह गया।
प्राकृतिक परिदृश्य जैसे जंगल, आर्द्रभूमि, जलाशय और खुले हरित क्षेत्र दिल्ली के क्षेत्र में 1991 में 49 फीसदी से लेकर 2023 में केवल 30 फीसदी तक सीमित रहे।
उत्तर दिल्ली में पारिस्थितिकीय क्षमता में विशेष रूप से तेजी से कमी आई है। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में खराब हालत के क्षेत्र 132 फीसदी बढ़ गए, जबकि पश्चिमी दिल्ली में लगभग 60 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। शाहदरा और उत्तर-पूर्वी दिल्ली क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहे।
हालांकि दक्षिण दिल्ली में दिल्ली रिज और संरक्षित वन क्षेत्र की उपलब्धता के कारण बेहतर स्थिति देखी गई। नई दिल्ली में निर्माण और संरक्षण योजनाओं के कारण कुछ सुधार के संकेत भी मिले।
शोधकर्ताओं के योगदान
इस अध्ययन में जामिया के भूगोल और पर्यावरण विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने मुख्य रूप से भाग लिया। इनमें प्रियंका झा, पवन कुमार यादव, मो. सहारिक जॉय और तरुणा बंसल के साथ-साथ इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी फैकल्टी के अजीत नारायण झा भी शामिल रहे।
