सुलगते यूरोप का मंजर: फ्रांस से अल्बानिया तक आगजनी-जनाक्रोश; किन-किन देशों में प्रदर्शन, क्यों बढ़ रहा गुस्सा?
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सुलगते यूरोप का मंजर: फ्रांस से अल्बानिया तक बढ़ता जनाक्रोश
Indianewslive247.com – स लगत य र प क म – स लगत य र प क तस्वीर इन दिनों कई देशों की सड़कों पर दिख रही है। ईंधन और रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें, सरकारी सेवाओं में कमी, स्कूलों की बदहाल स्थिति और आवास संकट ने लोगों की नाराजगी बढ़ा दी है। फ्रांस, इटली और अल्बानिया में प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारियां हुई हैं, जबकि कुछ जगहों पर हिंसा, लूटपाट और लोगों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
स्पेन और पुर्तगाल में महंगे किराये तथा घरों की बढ़ती कीमतों के विरोध में लोग तंबू लगाकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि घर खरीदना या किराये पर लेना अब उनकी पहुंच से बाहर होता जा रहा है। ड्यूस्टो विश्वविद्यालय की समाजशास्त्र प्रोफेसर मारिया सिल्वेस्ट्रे के अनुसार, युवाओं में भविष्य को लेकर गहरी अनिश्चितता और सामाजिक व्यवस्था से निराशा बढ़ रही है।
जब कई प्रतिकूल परिस्थितियां एक साथ आती हैं, तो कोई एक घटना लोगों की नाराजगी को सड़कों पर ले आती है।
फ्रांस में स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन
फ्रांस में माध्यमिक विद्यालयों के छात्र तीन सप्ताह से अधिक समय से नाकेबंदी और प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि स्कूलों को अधिक संसाधन मिलें, कर्मचारियों की कमी दूर हो और खराब इमारतों की मरम्मत की जाए। कम आय वाले इलाकों के स्कूलों में इन समस्याओं को विशेष रूप से गंभीर बताया गया है।
बाद में इस आंदोलन का दायरा बढ़ा और श्रमिक संघ सीजीटी सहित अन्य कार्यकर्ता भी इसमें शामिल हो गए। बढ़ती महंगाई और सरकारी सेवाओं से जुड़ी मांगों ने इसे व्यापक जन-असंतोष का रूप दे दिया। सैकड़ों-हजारों लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए, लेकिन सप्ताहांत में कई स्थानों पर हिंसा और अशांति भी हुई।
फ्रांस के विभिन्न हिस्सों में 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पेरिस, मार्सेई, लियोन और बोर्डो में लूटपाट की खबरें आईं। लीमोज में 19वीं सदी के सिटी हॉल में आग लग गई, जबकि कुछ स्कूलों में भी आगजनी और पेट्रोल बम फेंकने की घटनाएं हुईं। जवाब में सुरक्षा बलों ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और इन घटनाओं में सैकड़ों लोग घायल हुए।
मैक्रों की चेतावनी और प्रवासियों पर बहस
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि इमारतों और पुलिस पर हमला कर अव्यवस्था फैलाने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने लूटपाट में शामिल लोगों से नुकसान की भरपाई कराने की बात भी कही। दूसरी ओर, कुछ दक्षिणपंथी नेताओं ने प्रदर्शनों के दौरान फैली अव्यवस्था को अपने राजनीतिक पक्ष में इस्तेमाल करने की कोशिश की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में हुई तबाही के लिए प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन फ्रांसीसी अधिकारियों और पुलिस ने हिंसा के लिए प्रवासियों को दोषी नहीं बताया है। कई प्रदर्शनों को नाराज युवाओं ने आगे बढ़ाया, जबकि काले कपड़े पहनने और चेहरे ढकने वाले कुछ उपद्रवियों पर हिंसा भड़काने के आरोप लगे हैं।
स्पेन में शिक्षक और आवास संकट से नाराज लोग
स्पेन में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने मैड्रिड में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की। वे बेहतर वेतन और काम करने की बेहतर परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं। देश के अन्य हिस्सों में भी इस वर्ष शिक्षकों के विरोध प्रदर्शन और काम बंद करने की घटनाएं सामने आई हैं।
मैड्रिड के पुएर्ता डेल सोल चौक में आवास संकट के खिलाफ कई हफ्तों से तंबू लगे हैं। महंगे मकान और बढ़ते किरायों से परेशान लोग यहां डेरा डाले हुए हैं। 87 वर्षीय मारिकारमेन को घर से निकाले जाने के बाद शुरू हुआ विरोध व्यापक आवास असंतोष का प्रतीक बन गया है। यही कारण है कि स लगत य र प क बहस में युवाओं और निम्न आय वाले परिवारों की मुश्किलें प्रमुख मुद्दा बन गई हैं।
राजनीति और सुरक्षा पर बढ़ता दबाव
यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल फ्रांस, इटली और स्पेन अहम चुनावों के करीब हैं। जर्मनी में दक्षिणपंथी विचारधारा वाले दलों को चुनावी सफलता मिली है और अन्य देशों में भी उनके प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच, यूक्रेन को समर्थन, रूस से जुड़े कथित हाइब्रिड हमलों और नाटो देशों की सुरक्षा चिंताओं ने राजनीतिक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यूरोप में विरोध प्रदर्शन क्यों बढ़ रहे हैं?
महंगाई, आवास की ऊंची लागत, शिक्षा और अन्य सरकारी सेवाओं में संसाधनों की कमी, कम वेतन तथा भविष्य को लेकर अनिश्चितता प्रमुख कारण हैं। अलग-अलग देशों में मुद्दे अलग हैं, लेकिन आर्थिक दबाव और सामाजिक असंतोष एक जैसी चिंता के रूप में उभर रहे हैं।
फ्रांस में प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
फ्रांस में छात्रों ने स्कूलों में अधिक संसाधन, पर्याप्त कर्मचारी और बेहतर बुनियादी ढांचे की मांग की है। आंदोलन के बढ़ने के साथ महंगाई और सरकारी सेवाओं से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए।
स्पेन में आवास संकट का असर किस पर पड़ रहा है?
बढ़ते किराये और मकानों की कीमतों का असर खासकर युवाओं, कम आय वाले परिवारों और किराये के घरों में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सुरक्षित और किफायती घर पाना लगातार कठिन होता जा रहा है।
स लगत य र प क स्थिति केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं है। यह शिक्षा, रोजगार, आवास और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी उन चिंताओं को दिखाती है, जिनका समाधान नहीं होने पर जनाक्रोश और व्यापक हो सकता है।
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