आरएसएस के विवाद के बारे में स्पष्टीकरण; भागवत ने पाकिस्तान संवाद पर किया संकल्प
Indianewslive247.com – RSS – आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने पाकिस्तान से संवाद के बारे में अपने टिप्पणी के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनके बयान में बात वहां के लोगों की थी, न कि देश की संवैधानिक व्यवस्था या सरकार की। आरएसएस के विदेश नीति के विषय में उन्होंने बताया कि नीति भारत के केंद्र सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन करती है और द्वि-राष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने के लिए आवश्यकता है। भागवत ने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध चर्चा जारी रहेगी, लेकिन लोगों के बीच संवाद को नहीं रोका जा सकता।
होसबाले के विवाद के बारे में बताए गए तथ्य
दत्तात्रेय होसबाले के बयान के बारे में उठे सवालों के जवाब में भागवत ने कहा कि उनके टिप्पणी में विवाद के बारे में बात थी। वह बयान देते हुए कहा कि आतंकवाद और सीमा पार बातचीत के रास्ते बंद नहीं किए जाने चाहिए। भागवत ने यह दावा किया कि आरएसएस के विदेश नीति में कोई भेदभाव नहीं है और यह राष्ट्रीय राजनीति के अनुरूप है।
होसबाले के विवाद के बारे में आरएसएस के अधिकारियों के बयान के बाद भागवत ने बताया कि राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए नैतिक दृष्टिकोण आवश्यक है, लेकिन यह देश के नागरिक और विदेशी व्यक्तियों के बीच संवाद के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि आरएसएस के लोगों के बीच भी ऐसे व्यक्ति हैं जो अन्याय के विरुद्ध बात करते हैं और द्वि-राष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं।
हम अत्याचार और आतंकवाद के विरुद्ध रहेंगे, लेकिन लोगों के बीच नैतिक बातचीत को रोकना चाहते नहीं हैं। यही हमारी परंपरा और स्वभाव है।
भागवत ने आरएसएस की द्वि-राष्ट्रीय नीति के बारे में कहा कि इस नीति के तहत देश के विभाजन एक ऐतिहासिक भूल है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजनीति में आतंकवाद के विरुद्ध चर्चा जारी रहेगी, लेकिन इसके साथ ही पाकिस्तान के लोगों के संबंध में विचार भी जारी रहेंगे। भागवत ने अपने बयान में यह दावा किया कि आरएसएस के विदेश नीति में नैतिक दृष्टिकोण नहीं रोका जा सकता।
आरएसएस के प्रमुख भागवत ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद के लिए नई संभावनाएं खोली जा रही हैं। उन्होंने यह बताया कि विदेश नीति में आतंकवाद के विरुद्ध रुख जारी रहेगा, लेकिन इसके साथ ही दोनों देशों के नागरिकों के बीच निश्चित रूप से बातचीत की जरूरत है। आरएसएस के विदेश नीति के बारे में उन्होंने विस्तारपूर्वक कहा कि यह राष्ट्रीय राजनीति के अनुरूप है और भारत और पाकिस्तान के संबंधों को मजबूत करने में सहायता करती है।
भागवत ने आरएसएस की नीति के बारे में कहा कि इसमें देश के राजनीतिक व्यवस्था और सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन है, लेकिन वह लोगों के बीच नैतिक बातचीत को रोकना चाहते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस के विदेश नीति में नैतिक दृष्टिकोण नहीं रोका जा सकता और इस बारे में अधिक विस्तार से चर्चा की जाएगी। भागवत ने यह बताया कि आतंकवाद और सीमा पार बातचीत के रास्ते बंद नहीं किए जाने च

