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नायडू नहीं अब काकोली घोष होंगी अहम किरदार: बदलेंगे मोदी सरकार में सहयोगियों के समीकरण, बागी होंगे दमदार

नायडू नहीं अब काकोली घोष होंगी अहम किरदार: बदलेंगे मोदी सरकार में सहयोगियों के समीकरण, बागी होंगे दमदार

संसद में सहयोगी दलों के नए गठबंधन और भूमिका

न यड नह अब क क ल – नायडू नहीं अब काकोली घोष होंगी अहम किरदार: इस घटना के बाद नायडू लोकसभा में नौबत बदल गई है। तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट द्वारा मोदी सरकार के समर्थन की घोषणा ने राजग के सहयोगी दलों की भूमिका में गहरा बदलाव लाया है। इस सियासी घटनाक्रम में टीडीपी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू की जगह काकोली घोष के नेतृत्व वाले बागी धड़े की भूमिका महत्वपूर्ण बन गई है। निकट भविष्य में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में मोदी सरकार को टीडीपी के बचे रहने की चुनौती उठाने के लिए एक नई संभावना खुल गई है।

प्रमुख बदलाव और संसदीय संख्या का अपवाद

उल्लेखनीय है कि बागी गुट के समर्थन के कारण टीडीपी को दूसरे नंबर पर धकेल दिया गया है और जदयू को तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया गया है। इस धड़े के 20 सांसद समर्थन कर रहे हैं, जो टीडीपी की 4 और जदयू की 8 से अधिक है। राज्यसभा में इस गुट के तीन सदस्य हैं, लोकसभा में इसकी संख्या 22 तक पहुंच सकती है। नायडू नहीं अब काकोली घोष के नेतृत्व वाले गुट के आंकड़ा पार करने पर ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा, जो नायडू के बरकरार रहने की उम्मीद को धकेल देगा।

बीते सत्र में सरकार को 298 सांसदों का समर्थन मिला था, लेकिन बागी गुट के जुड़े होने के बाद अब राजग के सदस्यों की संख्या 318 पर पहुंच गई है। नायडू नहीं अब काकोली घोष के नेतृत्व वाले गुट की उपस्थिति के कारण राजग के विस्तार के लिए संसद में नायडू के बचे रहने की चुनौती आंकड़ा पार करने के लिए एक बार फिर जुट गई है।

इस बदलाव के बाद नायडू नहीं अब काकोली घोष के नेतृत्व वाले गुट को राजग के आंतरिक संगठन में एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को अतिरिक्त राज्य मंत्रियों के लिए मांग को आंकड़ा पार करने के लिए स्वीकृति दिलाई जा सकती है। लोकसभा में राजग के सांसदों की संख्या तीन सौ के पार पहुंच गई है, जो मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में अब तक की पहली बार की घटना है। नायडू नहीं अब काकोली घोष के नेतृत्व वाले गुट के आंकड़ा पार करने के बाद राजग की संख्यात्मक संतुलन में गहरी गड़बड़ी हुई है।

बागी गुट के समर्थन से राजग के सदस्यों की संख्या में वृद्धि के बाद नायडू नहीं अब काकोली घोष अब तक के समर्थन की दिशा में नए आयाम प्रस्तुत कर रही है। इस घटना के आंकड़ा पार करने पर भाजपा के विस्तार के लिए संसद की भूमिका में गहरा बदलाव देखने को मिल सकता है। चूंकि टीडीपी के वर्तमान में 16 सदस्य और जदयू के 12 सदस्य हैं, बागी गुट के जुड़े होने से नायडू नहीं अब काकोली घोष की संख्या के बदलाव के बाद राजग के बल का एक नया स्वरूप उभर रहा है।

नायडू नहीं अब काकोली घोष के नेतृत्व वाले गुट के आंकड़ा पार करने के बाद अपने विस्तार के लिए भाजपा द्वारा आगे बढ़ने के लिए नए उद्देश्य निर्धारित करना पड़ेगा। इस बदलाव के कारण मोदी सरकार के आगे विस्तार और राजनीतिक शक्ति के नए समीकरण बन स

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