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Jammu: मचैल यात्रा ने पकड़ी रफ्तार, खराब मौसम पर भारी श्रद्धालुओं का उत्साह; दो दिन में 400 ने किए दर्शन

Foto : Jessica Wilson - indianewslive247.com

जम्मू: मचैल यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह, दो दिन में 400 दर्शन

Indianewslive247.com – जम्मू-कश्मीर के मचैल माता का पवित्र धाम इस वर्ष भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मौसम की खराबी के बावजूद जम्मू से आने वाले भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ है। यात्रा सामान्य तारीख से तीन दिन बाद यानी 28 जुलाई को शुरू हुई, जबकि हर साल यह 25 जुलाई से आरंभ होती है। जम्मू क्षेत्र की इस लोकप्रिय यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

जम्मू के श्रद्धालुओं ने दो दिन में 400 दर्शन किए

यात्रा के प्रारंभिक दो दिनों में चार सौ से अधिक भक्तों ने मां मचैल के दर्शन किए। मंदिर के मुख्य पुजारी मनोज सिंह ने बताया कि 25 जुलाई को हवन और विशेष पूजन के बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। जम्मू से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रवाह लगातार जारी है और यात्रा पूरी तरह से सुचारु रूप से आगे बढ़ रही है।

अठोली के डीएसपी विजय भगत ने बताया कि गुलाबगढ़ बेस कैंप में बुधवार शाम तक तीन सौ से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके थे। इनमें से कुछ श्रद्धालु बेस कैंप में रुके हुए हैं, जबकि अन्य पवित्र धाम की ओर रवाना हो चुके हैं।

जम्मू में सुरक्षा व्यवस्था और आरएफआईडी कार्ड अनिवार्य

एसएसपी किश्तवाड़ के निर्देशन में सुरक्षा के व्यापक और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जम्मू-कश्मीर के इस पवित्र मार्ग पर सीआरपीएफ, एसडीआरएफ और भारतीय सेना के जवानों की उचित स्थानों पर तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुलभ आवाजाही के लिए प्रशासन ने इस बार आरएफआईडी कार्ड व्यवस्था अनिवार्य की है। ऑनलाइन पंजीकरण के बाद गुलाबगढ़ बेस कैंप में श्रद्धालुओं को यह कार्ड दिए जा रहे हैं, जिसके बिना यात्रा की अनुमति नहीं है।

सड़क सुविधा से जम्मू की यात्रा हुई सुगम

पिछले वर्ष चिशोती में बादल फटने की आपदा के समय सड़क मार्ग सीमित था। श्रद्धालुओं को करीब आठ किलोमीटर कठिन पैदल चलना पड़ता था। इस वर्ष प्रशासन की पहल से सड़क मार्ग माता चंडी के भवन से दो किलोमीटर नजदीक दर्शनी गेट तक पहुंच चुका है। गुलाबगढ़ से छोटे वाहनों द्वारा महज दो सौ किराये में लगभग दो घंटे में यहां पहुंचा जा सकता है। पहले इस मार्ग को पैदल तय करने में दो दिन तक लग जाते थे, वहीं अब दो घंटे में श्रद्धालु धाम तक पहुंच रहे हैं।

स्वयंभू शिवलिंग और मां चंडी की आस्था

मचैल मंदिर मां चंडी के दिव्य दरबार के साथ-साथ शिव पर्वत पर स्वयंभू शिवलिंग स्वरूप के दर्शन भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। मान्यता है कि मां चंडी की पिंडी एवं प्रतिमा अपने झुमकों और कंगनों की मधुर ध्वनि के साथ भक्तों को साक्षात दर्शन देती हैं। इसी अद्भुत आस्था के कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हर वर्ष मां मचैल के दरबार में शीश नवाने पहुंचते हैं।

आगामी दिनों में मौसम अनुकूल रहने पर जम्मू और उसके आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।

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