कांग्रेस ने नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स को ‘छवि सुधार’ की कोशिश बताया
Indianewslive247.com – कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा परीक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में बनाई गई टास्क फोर्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने इसे प्रधानमंत्री की खराब हो चुकी छवि को ठीक करने की एक रणनीतिक कवायद करार दिया है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर की आलोचना
कांग्रेस सांसद और संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को एक्स (Twitter) पर इस गठन की कड़ी आलोचना करते हुए एक विस्तृत पोस्ट शेयर की। उन्होंने टिप्पणी की कि मोदी सरकार ने इस बार भी समय की सही पहचान नहीं की।
“दोस्तों, जून 2024 में नीट-यूजी सहित कई परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बाद मोदी सरकार ने परीक्षाओं के पारदर्शी, सुचारु और निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने के लिए डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी।”
रमेश ने आगे स्पष्ट किया कि जुलाई 2026 में, जब मोदी सरकार एक बार फिर नीट-यूजी और अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ियां रोकने में विफल रही है, तब उसने परीक्षा सुधारों पर ध्यान देने के लिए एक ‘उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स’ का गठन किया है। कांग्रेस का मानना है कि यह कदम समय की सही पहचान नहीं है।
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें अधूरी
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार अब तक के. राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों को पूरी तरह लागू नहीं कर पाई है। उन्होंने बताया कि बल्कि 2024 और 2026 के पेपर लीक के बीच लगभग दो वर्षों तक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में पूर्णकालिक महानिदेशक तक नियुक्त नहीं किया गया।
रमेश ने निष्कर्ष निकाला कि आखिरकार यह पूरी कवायद प्रधानमंत्री की अपूरणीय रूप से खराब हो चुकी छवि सुधारने की एक उच्चस्तरीय कोशिश मात्र है। कांग्रेस ने इस टास्क फोर्स को समय की सही पहचान न करने का भी आरोप लगाया है।
टास्क फोर्स में शामिल प्रमुख नाम
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि इस टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
आधार परियोजना के प्रमुख सूत्रधार रहे नंदन नीलेकणि को यह जिम्मेदारी ऐसे समय सौंपी गई है, जब कथित पेपर लीक के विरोध में छात्रों का आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस टास्क फोर्स में तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि के अलावा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, खुफिया ब्यूरो (आईबी) के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा भी शामिल हैं।

