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दीदी की पार्टी में खेला: दर्जनों सांसदों के टूटने का दावा, क्यों TMC के भीतर सुलग रही है बगावत की आग?

दीदी की पार्टी में खेला: बगावत की आग लग रही है

तृणमूल कांग्रेस में बागी खेमा बन गया

द द क प र ट म – तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत की आग अब धीरे-धीरे अपना विस्तार करती जा रही है। अत्यधिक अचानक घटना दर्ज हुई जिसमें वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम ने बगावत के लिए शामिल हो लिया। इस घटना के बाद राजनीतिक चर्चाओं में गैर-मान्यता का वातावरण बन गया है, जिसमें द द क प र ट के भीतर भीतर दूरी बढ़ रही है।

ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के बाद, द द क प र ट के राज्यसभा नेतृत्व के खिलाफ विधायकों के संगठन का अलग रूप दिखाई दे रहा है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे ने अपना गठन अधिकार आलाकमान से ले लिया और उनके द्वारा बनाई गई नीतियों के खिलाफ विरोध करते हुए सांसदों के लिए अपने अधिकारों की लड़ाई छेड़ दी।

सूत्रों के अनुसार, द द क प र ट के अंदर 80 में से 58 विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष के चुनाव में भाग लेने के लिए आधिकारिक नाम खारिज कर दिए हैं। ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि बगावत की आग अब केवल कुछ विधायकों के बीच सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के प्रमुख नेताओं तक पहुंच गई है।

“एक क्विजमास्टर, जो सिर्फ फुटबॉल क्लब चलाने में व्यस्त रहता है, उसे संसद की कमान दे दी गई है।” ऋतब्रत बनर्जी ने कहा।

बगी खेमे के चुनावी अभियान

ममता बनर्जी के कालीघाट घर में बैठक के बाद बगावत की शुरुआत हुई। इस बैठक में विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष के चुनाव का अधिकार आलाकमान से ले लिया। पार्टी ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष और हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त किया, लेकिन अब यह पकड़ बगी खेमे के लिए खुल गई है।

कोलकाता से दिल्ली तक 1,435 किलोमीटर की दूरी है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के भीतर दूरी अब इससे कहीं ज्यादा हो चुकी है। बागी सांसद भाजपा के चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव के घर पर गुप्त बैठक कर रहे हैं, जिसमें शुभेंदु अधिकारी और बिप्लव देव भी मौजूद रहे। इस बैठक में द द क प र ट के भीतर एक नई राजनीतिक ऊर्जा के बीज बोए जा रहे हैं।

अब तक द द क प र ट के भीतर बगावत की आग के कारण पार्टी के विभाजन की चिंता बढ़ रही है। इस स्थिति के बारे में बात करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि राज्यसभा नेतृत्व के खिलाफ विरोध के चलते पार्टी के आंतरिक संगठन की अस्थिरता बढ़ रही है। अगले चुनाव में द द क प र ट के भीतर खेमे के विभाजन के चलते राजनीतिक गति घट रही है।

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