खत्म हुआ मानसून: 2001 के बाद चौथा सबसे कमजोर, कम बारिश और रिकॉर्ड गर्मी से बढ़ी चिंता; आईएमडी ने क्या कहा?
Table of Contents
- दक्षिण-पश्चिम मानसून समाप्त, देश में 12.6 फीसदी कम बारिश
- पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी भारत में अधिक कमी
- अक्तूबर में भी कम बारिश और अधिक गर्मी का अनुमान
- अल नीनो और सितंबर की रिकॉर्ड गर्मी
- रबी फसलों के लिए क्यों अहम है मिट्टी की नमी
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- Related Reading
- Frequently Asked Questions
दक्षिण-पश्चिम मानसून समाप्त, देश में 12.6 फीसदी कम बारिश
Indianewslive247.com – खत म ह आ म नस न – खत म ह आ म नस के साथ देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का मौसम समाप्त हो गया है। जून से सितंबर के बीच भारत में 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से 12.6 फीसदी कम है। वर्ष 2001 के बाद यह देश का चौथा सबसे कमजोर मानसून रहा। कम वर्षा और असामान्य गर्मी ने कृषि, जल उपलब्धता तथा आगामी मौसम को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मानसून की शुरुआत कमजोर रही और जून-जुलाई में बारिश की कमी काफी बढ़ गई। 15 जुलाई को समाप्त सप्ताह तक देशव्यापी वर्षा सामान्य से 51.1 फीसदी कम थी। जुलाई के आखिर और अगस्त की शुरुआत में बारिश सुधरी, लेकिन यह राहत लंबे समय तक नहीं टिक सकी।
अगस्त के मध्य के बाद वर्षा फिर सामान्य से नीचे चली गई। 9 सितंबर को समाप्त सप्ताह में कमी 36.3 फीसदी तक पहुंच गई थी। अंतिम चरण में कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन मौसम की शुरुआती बड़ी कमी पूरी तरह पूरी नहीं हो सकी।
पूर्वी, पूर्वोत्तर और दक्षिणी भारत में अधिक कमी
क्षेत्रवार आंकड़ों में बारिश का वितरण असमान रहा। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 25 फीसदी कम वर्षा हुई, जबकि दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 24 फीसदी की कमी दर्ज की गई। उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा सामान्य से 6 फीसदी नीचे रही और मध्य भारत में कमी केवल 2 फीसदी रही।
अरुणाचल प्रदेश में सामान्य से 44 फीसदी कम बारिश हुई। पंजाब में 41 फीसदी, असम और मेघालय में 39 फीसदी, मराठवाड़ा में 39 फीसदी, बिहार में 32 फीसदी और केरल में 28 फीसदी कमी दर्ज की गई। पंजाब, अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में जून से सितंबर तक चारों महीनों में वर्षा सामान्य से कम रही।
देश के 17 मौसम उपखंडों में सामान्य से कम बारिश हुई और ये कुल भूभाग के 42 फीसदी हिस्से को कवर करते हैं। वहीं 18 उपखंडों में वर्षा सामान्य के दायरे में रही, जो लगभग 53 फीसदी भूभाग का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे स्पष्ट है कि राष्ट्रीय औसत के बावजूद कई इलाकों में स्थानीय असर ज्यादा गंभीर हो सकता है।
अक्तूबर में भी कम बारिश और अधिक गर्मी का अनुमान
मौसम विभाग के अनुसार, अक्तूबर में देशभर में वर्षा दीर्घकालिक औसत के 85 फीसदी से कम रह सकती है। अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है, हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के चुनिंदा इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा संभव है।
अक्तूबर से दिसंबर के दौरान भी कई क्षेत्रों में कम बारिश की संभावना जताई गई है। खत म ह आ म नस के बाद यह स्थिति मिट्टी की नमी और जलाशयों के स्तर पर असर डाल सकती है, खासकर उन इलाकों में जहां पहले से वर्षा की कमी अधिक रही है।
अल नीनो और सितंबर की रिकॉर्ड गर्मी
भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक एम महापात्र के अनुसार, अल नीनो की स्थिति नवंबर में चरम पर पहुंच सकती है और उसके बाद कमजोर पड़ने की संभावना है। यह मौसमी परिस्थितियों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।
“अल नीनो के नवंबर में चरम पर पहुंचने और उसके बाद कमजोर होने की संभावना है।”
सितंबर में देश का औसत अधिकतम तापमान 32.05 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1901 के बाद सितंबर का सबसे अधिक औसत अधिकतम तापमान है। औसत न्यूनतम तापमान 23.39 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सितंबर के लिए चौथा सबसे ऊंचा स्तर है। पूरे महीने का औसत तापमान 27.72 डिग्री सेल्सियस रहा और यह 1901 के बाद सितंबर का पांचवां सबसे अधिक औसत है।
रबी फसलों के लिए क्यों अहम है मिट्टी की नमी
कम बारिश और अधिक तापमान का असर रबी फसलों की बुआई से पहले मिट्टी की नमी पर पड़ सकता है। मध्य भारत, दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र, पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर के कुछ वर्षा-आधारित इलाकों में नमी की कमी का दबाव अधिक रहने की आशंका है।
सितंबर के जिला-स्तरीय आंकड़ों में 32 फीसदी जिले सामान्य से कम वर्षा की श्रेणी में रहे, जबकि 16 फीसदी जिलों में बारिश की बड़ी कमी दर्ज की गई। आने वाले समय में वर्षा का वितरण, तापमान और मिट्टी की नमी किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इस साल मानसून कितना कमजोर रहा?
जून से सितंबर के बीच देश में 759.4 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य से 12.6 फीसदी कम है। वर्ष 2001 के बाद यह चौथा सबसे कमजोर मानसून रहा।
किन क्षेत्रों में बारिश की कमी सबसे ज्यादा रही?
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 25 फीसदी तथा दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 24 फीसदी कम बारिश हुई। अरुणाचल प्रदेश, पंजाब, असम, मेघालय, मराठवाड़ा, बिहार और केरल में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
क्या अक्तूबर में बारिश की संभावना है?
अक्तूबर में देशभर में सामान्य से कम वर्षा का अनुमान है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
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Frequently Asked Questions
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