‘क्या देश में ब्रिटिश शासन है?’: प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर भड़के संजय राउत, कहा- जनता की आवाज दबा नहीं सकते
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दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हिरासत और सुरक्षा व्यवस्था पर संजय राउत का केंद्र पर तीखा हमला
Indianewslive247.com – क य द श म ब र – मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारियों के बीच दिल्ली में तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल बन गया है। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर रहे लोगों को कथित तौर पर रास्ते में रोके जाने और कुछ व्यक्तियों को हिरासत में लिए जाने के मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार को घेरा है।
राउत ने इसे किसी एक राजनीतिक गुट तक सीमित मामला मानने से इनकार किया। उनका कहना था कि प्रदर्शन में आने की इच्छा रखने वाले लोग अलग-अलग पृष्ठभूमि और संगठनों से जुड़े हैं तथा उनकी आवाज को रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है।
अभिजीत दीपके को एयरपोर्ट पर हिरासत में लेने का मुद्दा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनकारियों के जुटने की योजना के बीच अभिजीत दीपके को दिल्ली एयरपोर्ट पर पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई। इसी घटनाक्रम के बाद राउत ने कहा कि बड़ी संख्या में लोग राजधानी पहुंचना चाहते हैं, लेकिन उन्हें रास्ते में रोक दिया जा रहा है।
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बहस को गुटों और राजनीतिक खेमों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन नागरिकों की बात होनी चाहिए जो विरोध दर्ज कराने दिल्ली आना चाहते हैं। राउत के अनुसार, लाखों लोगों की दिल्ली पहुंचने की इच्छा है, जबकि कई लोगों को यात्रा के दौरान ही रोक दिया गया है।
“गुटों की बात मत कीजिए। लोगों की बात कीजिए। लाखों लोग दिल्ली पहुंचना चाहते हैं, लेकिन उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया है।”
ब्रिटिश शासन और रॉलेट एक्ट का जिक्र
संजय राउत ने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित व्यवहार की तुलना औपनिवेशिक दौर की दमनकारी नीतियों से की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति विरोध प्रकट करने के लिए देश की राजधानी में आना चाहता है, तो उसे रोकने का क्या औचित्य है।
“इस देश में क्या हो रहा है? अगर कोई विरोध करने के लिए देश की राजधानी पहुंचना चाहता है, तो क्या यहां ब्रिटिश शासन लागू है? क्या रॉलेट एक्ट लागू कर दिया गया है?”
रॉलेट एक्ट का उल्लेख करते हुए राउत ने सरकार पर विरोध की स्वतंत्रता सीमित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हजारों युवाओं और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों को दिल्ली पहुंचना था। उनके अनुसार, इस घटनाक्रम को सिर्फ राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों से जुड़े प्रश्न के रूप में देखा जाना चाहिए।
ट्रेनें रोके जाने और सीमाएं सील होने का आरोप
राउत ने दावा किया कि प्रदर्शन के मद्देनजर ट्रेनों को रोका गया, लोगों को हिरासत में लिया गया और दिल्ली की सीमाओं पर कड़ी पाबंदियां लगाई गईं। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बल बुलाकर राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में उनकी तैनाती की गई है।
उनका कहना था कि सुरक्षा प्रबंधों के नाम पर विरोध करने के इच्छुक लोगों को रोकना लोकतांत्रिक असहमति को दबाने जैसा है। राउत ने जोर देकर कहा कि जनता की ओर से उठने वाली आवाज को प्रशासनिक या सुरक्षा उपायों के सहारे खत्म नहीं किया जा सकता।
“ट्रेनों को रोक दिया गया है, लोगों को हिरासत में लिया गया है और दिल्ली की सीमाएं सील कर दी गई हैं। जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बल बुलाए गए हैं। उन्हें दिल्ली भर में तैनात किया गया है। लेकिन यह जनता का विरोध है, और आप जनता की आवाज को दबा नहीं सकते।”
लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और असहमति की भूमिका पर भी राउत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब नागरिक किसी मुद्दे को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखना चाहते हैं, तब उन्हें रोकने की कोशिश व्यापक राजनीतिक बहस को जन्म देती है। जंतर-मंतर लंबे समय से प्रदर्शनों और जनसुनवाई जैसी गतिविधियों का प्रमुख स्थल रहा है, इसलिए वहां प्रस्तावित जुटान को लेकर बनी स्थिति ने राजनीतिक महत्व हासिल कर लिया है।
मोदी, शाह और ज्ञानेश कुमार पर निशाना
शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी सीधा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि इन तीनों को सत्ता से हटना चाहिए। राउत की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब आंदोलनकारी सीईसी के इस्तीफे की मांग के साथ जंतर-मंतर पर एकत्र होने की योजना बना रहे हैं।
राउत ने सुरक्षा बलों की बड़ी तैनाती पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि दिल्ली में साढ़े चार लाख सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है और इसे बच्चों के सामने बंदूकें तानने जैसी स्थिति बताया। यह आरोप उनके उस व्यापक तर्क का हिस्सा था, जिसमें उन्होंने सरकार पर भय के माहौल में काम करने का आरोप लगाया।
“साढ़े चार लाख सुरक्षा बल को दिल्ली में तैनात किए हैं। यह तैनाती बच्चों के ऊपर बंदूक ताने के लिए हुई है। यह पीएम मोदी और अमित शाह की लोकतंत्र है।”
सरकार पर भय और दमन का आरोप
राउत ने कहा कि सत्ता पक्ष के भीतर प्रदर्शन से जुड़ा असाधारण डर दिखाई दे रहा है। उन्होंने दावा किया कि विश्व के इतिहास में इस तरह का भय शायद ही देखने को मिला हो। उनके अनुसार, सरकार खुद को मजबूत नेतृत्व के रूप में प्रस्तुत करती है, लेकिन विरोध की संभावना के सामने उसके कदम उलटी तस्वीर पेश करते हैं।
“इतने डरे हुए हैं। ऐसी डर हमने विश्व के इतिहास में नहीं देखा है। इतने डरपोक लोग इस देश की सत्ता पर नहीं बैठे। लेकिन यह खुद को 56 इंच का सीना बोलते हैं।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकार ब्रिटिश शासन जैसी कठोरता के साथ विपक्ष और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करना चाहती है। राउत के बयान ने प्रस्तावित प्रदर्शन, सुरक्षा बंदोबस्त और नागरिकों के विरोध के अधिकार को लेकर राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।
जंतर-मंतर पर होने वाले प्रस्तावित जुटान के संदर्भ में अब मुख्य सवाल यह है कि प्रदर्शनकारियों की आवाजाही, हिरासत और राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह संतुलित किया जाता है। राउत ने स्पष्ट किया है कि उनके लिए यह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के विरोध दर्ज कराने के अधिकार का मुद्दा है।
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