अजिंक्य रहाणे ने लिया संन्यास: ‘देश को हमेशा खुद से ऊपर रखा’
संन्यास का ऐलान और सफर की शुरुआत
Indianewslive247.com – क्रिकेट के मैदान से विदा लेते हुए अजिंक्य रहाणे ने भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन की सच्चाई यह है कि हर चीज़ की एक शुरुआत होती है और हर चीज़ का अंत भी। जब वह समय आता है तो हमें सम्मान के साथ आगे बढ़ना चाहिए। बल्लेबाजी में उन्होंने हमेशा सही टाइमिंग पर भरोसा किया है और उसकी अहमियत को समझा है। आज उन्हें लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का यही सही समय है।
हर शुरुआत का एक अंत होता है। जिंदगी की सच्चाई यही है कि हर चीज की शुरुआत होती है और हर चीज का अंत भी होता है।
डोंबिवली से टीम इंडिया तक का उनका सफर सिर्फ एक सपना पूरा करने के लिए था। रहाणे ने याद करते हुए बताया कि डोंबिवली से एक छोटे लड़के के रूप में सिर्फ अभ्यास करने के लिए सफर शुरू किया था। उन्होंने इस खेल को अपना सब कुछ दिया। हर दिन, हर पारी और बल्लेबाजी का हर मौका मेरे लिए भारत की कैप पहनने के सपने से जुड़ा था।
देश और टीम हमेशा सबसे पहले
राहणे ने क्रिकेट के प्रति अपने समर्पण के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा एक ही नियम अपनाया। अपने देश और अपनी टीम को खुद से ऊपर रखा। उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ क्रिकेट खेला और हमेशा यह माना कि अगर आपकी नीयत सही है तो खेल हमेशा आपका साथ देता है।
20 साल तक भारतीय क्रिकेट का हिस्सा बनने पर रहाणे ने गर्व महसूस किया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि जब से उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया, तब से लेकर आज तक भारतीय क्रिकेट ने जबरदस्त तरक्की की है। पिछले 20 वर्षों तक इस सफर का हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व की बात है।
भारतीय क्रिकेटर के रूप में मेरा अध्याय भले ही समाप्त हो रहा हो, लेकिन क्रिकेट के साथ मेरा सफर यहीं खत्म नहीं होगा।
अब वे अगली पीढ़ी की मदद करने, इस खेल से मिले मूल्यों को साझा करने और उस क्रिकेट को कुछ लौटाने के लिए उत्सुक हैं, जिसने उन्हें सब कुछ दिया।
जीत-हार से बढ़कर यादें
राहणे ने अपने सफर को लेकर कहा कि मुंबई के एक युवा खिलाड़ी के रूप में शुरुआत करने से लेकर भारत के लिए खेलने तक का सफर उनके लिए बहुत बड़ा सम्मान रहा। इस दौरान जीत भी मिली, हार भी मिली, लेकिन क्रिकेट खेलने की खुशी, अलग-अलग टीमों का हिस्सा बनने का अनुभव और जिंदगी भर की यादें ही उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि और सबसे बड़ी संतुष्टि हैं।
विदाई वीडियो में रहाणे अपने परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों का शुक्रिया अदा करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि वे बीसीसीआई, मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए), अपने सभी साथियों, कोचों, आईपीएल की हर फ्रेंचाइजी, राधिका, अपने पूरे परिवार, दोस्तों और उन सभी लोगों का दिल से धन्यवाद करते हैं, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया।
‘मैं आपके दिलों में कभी नहीं हारा’
राहणे ने आखिर में अपने फैंस को भी धन्यवाद कहा। उन्होंने कहा कि क्रिकेट के उन सभी प्रशंसकों का विशेष धन्यवाद, जिन्होंने उनके हर अच्छे और बुरे दौर में उनका साथ दिया।
‘अजिंक्य’ का मतलब होता है ‘अजेय’, लेकिन क्रिकेट ने मुझे कई बार हार का सामना करना सिखाया। एक क्रिकेटर के तौर पर हम जितनी बार सफल होते हैं, उससे कहीं ज्यादा बार असफल होते हैं। मेरी टीम भी मैच हारी, मुझसे भी गलतियां हुईं, लेकिन एक जगह मैं कभी नहीं हारा और वह आपके दिल थे।
आपने हमेशा मुझे अपना माना। आपके प्यार, भरोसे और समर्थन के लिए दिल से धन्यवाद। कैप नंबर 278… अब यहीं तक।
मेलबर्न की पारी हमेशा रहेगी यादगार
राहणे के करियर का सबसे सुनहरा अध्याय 2020-21 की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी रहा। विराट कोहली की गैरमौजूदगी में उन्होंने चोटों से जूझ रही भारतीय टीम की कप्तानी संभाली और मेलबर्न टेस्ट में शतक जड़कर भारत की वापसी कराई। इसके बाद भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराकर क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार टेस्ट सीरीज में से एक अपने नाम की।

