राम मंदिर: मनीष यादव ने बताया चढ़ावा चोरी कैसे होती थी
र म म द र – राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुख्य आरोपी टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव ने अपनी भूमिका के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने पुलिस के सामने घोषित किया कि चोरी के धन के प्रवाह के दबाव को आगे बढ़ाने के लिए वह राम मंदिर से ली गई रकम का उपयोग निवेश के लिए करते रहे। उनका कहना है कि तीन-चार महीने पहले वह चढ़ावा के बरामदगी कार्य में शामिल हो गए थे, जिसके बाद राम मंदिर के द्वारा दी गई रकम को अधिक से अधिक ले लिया जाने लगा।
चढ़ावा चोरी के तरीका और रकम का उपयोग
मनीष यादव ने खुलासा किया कि चढ़ावा में चोरी की घटना नियमित रूप से होती थी। उन्होंने बताया कि आरोपियों द्वारा गलत तरीके से राम मंदिर के बरामदगी धन के उपयोग की जांच के दौरान प्रमुख बिंदु सामने आए। बताया गया है कि चोरी की रकम को जमीन खरीदने और महंगे उपहार देने में लगातार व्यय करते रहे। सूत्रों के मुताबिक चोरी की रकम के साथ आरोपियों के बीच नियमित संपर्क बनाया जाता रहा।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में मनीष यादव ने बताया कि अपने रिश्तेदारों के बीच धन के निकास की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा, “रकम के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए हम विशेष रूप से ध्यान देते रहे।” विशिष्ट जानकारी के अनुसार, बरामदगी के धन का उपयोग जमीन खरीदने और विशिष्ट वित्तीय उपहार देने में करते रहे।
पुलिस जांच और कस्टडी अवधि
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में पुलिस अधिकारियों के अनुसार, टिन्नू यादव और मनीष की कस्टडी के लिए 39 घंटे की अवधि निर्धारित की गई है। इस अवधि के दौरान आरोपियों से अधिक जानकारी इकट्ठा करने की उम्मीद है। शनिवार की सुबह अयोध्या के सीओ आशुतोष तिवारी एसओजी टीम के साथ जिला जेल पहुंचे और दोनों आरोपियों को बाहर निकाला गया।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में निर्धारित जांच में आरोपियों के बीच संपर्क के तरीका भी अहम रूप से देखा जा रहा है। मनीष यादव ने बताया कि उनके पिता टिन्नू यादव ने उन्हें चढ़ावा कार्य में शामिल कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने नियमित रूप से धन के प्रवाह के लिए भाग लिया।
इस जांच के दौरान राम मंदिर चढ़ावा चोरी के संबंध में अधिक विवरण सामने आए। सूत्रों के मुताबिक आरोपियों द्वारा बरामदगी के धन का उपयोग गहरी तैयारी के साथ किया गया था। इसके परिणामस्वरूप बरामदगी के धन के निवेश और वित्तीय खर्च के बारे म
