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तीन दिन की छुट्टी: हिमाचल से उत्तराखंड तक महाजाम, दिल्ली-एनसीआर से उमड़े सैलानी; होटल से लेकर पार्किंग तक फुल

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Foto : Elizabeth Smith - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. तीन दिन की छुट्टी में हिमाचल-उत्तराखंड में भारी भीड़, होटल और पार्किंग फुल
  2. शिमला, कसौली और चायल में पर्यटकों का दबाव
  3. उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें
  4. यात्रियों के लिए उपयोगी सलाह
  5. Related Reading
  6. Frequently Asked Questions

तीन दिन की छुट्टी में हिमाचल-उत्तराखंड में भारी भीड़, होटल और पार्किंग फुल

Indianewslive247.com – त न द न क छ ट्टियों के चलते दिल्ली-एनसीआर से बड़ी संख्या में सैलानी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्यटन व धार्मिक स्थलों की ओर पहुंच गए। शिमला, मनाली, कसौली, चायल, धर्मशाला, मैक्लोडगंज और डलहौजी समेत कई इलाकों में सड़कें वाहनों से भरी रहीं। होटल, होम स्टे और पार्किंग की सीमित क्षमता के कारण पर्यटकों को जाम और इंतजार का सामना करना पड़ा।

छुट्टी के इस दौर से स्थानीय पर्यटन कारोबार को जरूर गति मिली, लेकिन यातायात व्यवस्था पर दबाव भी बढ़ गया। कई पर्यटक अपनी होटल बुकिंग होने के बावजूद समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच सके। पहाड़ी सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारों ने स्थानीय निवासियों की आवाजाही भी प्रभावित की।

शिमला, कसौली और चायल में पर्यटकों का दबाव

शिमला में पिछले दो दिनों के दौरान करीब 36 हजार वाहन पहुंचे। शनिवार को होटल ऑक्यूपेंसी शत-प्रतिशत रही और प्रमुख मार्गों पर दिनभर धीमी रफ्तार से यातायात चलता रहा। पर्यटकों की अधिक संख्या के कारण शहर की पार्किंग क्षमता पर भी असर पड़ा।

कसौली और चायल में भी अग्रिम बुकिंग लगभग 100 फीसदी तक पहुंच गई। त न द न क छ ट्टियों में एक साथ बड़ी संख्या में वाहन पहुंचने से संकरी सड़कों, सीमित पार्किंग और होटल पहुंचने के मार्गों पर दबाव बढ़ा।

कुल्लू-मनाली में एक लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे

कुल्लू जिले में दो दिनों के भीतर एक लाख से ज्यादा पर्यटकों की आमद दर्ज की गई। इस दौरान 11 हजार से अधिक पर्यटक वाहनों ने जिले में प्रवेश किया। मनाली, कसोल, तीर्थन घाटी, रोहतांग और जलोड़ी दर्रे की ओर जाने वाले क्षेत्रों में होटल व होम स्टे की भराव दर करीब 90 फीसदी रही।

मनाली में दो अक्तूबर को ग्रीन टैक्स बैरियर से लगभग 3,300 वाहनों की एंट्री हुई। पर्यटन कारोबार में तेजी के साथ रास्तों पर दबाव बढ़ा और यात्रियों को कई स्थानों पर धीरे-धीरे आगे बढ़ना पड़ा।

चंद्रताल मार्ग पर कई घंटे जाम

लाहौल-स्पीति के केलांग और सिस्सू से जुड़े चंद्रताल मार्ग पर भी पर्यटकों की आवाजाही अधिक रही। दो अक्तूबर को चंद्रताल देखने पहुंचे लोगों के कारण कई घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही। शुक्रवार को करीब 550 वाहन चंद्रताल पहुंचे थे।

ऊंचाई वाले और दूरदराज के इलाकों में सड़क क्षमता सीमित रहती है। ऐसे में यात्रियों के लिए पर्याप्त समय लेकर निकलना, ठहरने की पुष्टि करना और स्थानीय यातायात निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें

उत्तराखंड में पर्यटन केंद्रों के साथ धार्मिक स्थलों पर भी भीड़ रही। नैनीताल जिले के कैंची धाम में सुबह से श्रद्धालु पहुंचने लगे। मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर हाईवे के दोनों ओर तक भीड़ दिखाई दी और शाम तक 35,000 लोग दर्शन कर चुके थे।

देश और विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण मंदिर परिसर और आसपास के मार्गों पर व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा। दर्शन के लिए आने वाले लोगों को अतिरिक्त प्रतीक्षा समय लेकर चलने की जरूरत पड़ सकती है।

जागेश्वर धाम में पार्किंग भरने के बाद सड़क किनारे खड़े हुए वाहन

जागेश्वर धाम में शनिवार को दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी पंक्तियां लगीं। पार्किंग पूरी भरने के बाद कई वाहनों को सड़क किनारे रोकना पड़ा। यातायात सामान्य रखने के लिए पुलिस और होमगार्ड कर्मियों को व्यवस्था संभालनी पड़ी।

सितंबर में ही 50 हजार से अधिक श्रद्धालु जागेश्वर धाम पहुंच चुके थे। त न द न क छ ट्टियों के दौरान बढ़ी भीड़ ने धार्मिक पर्यटन मार्गों पर पार्किंग और यातायात प्रबंधन की चुनौती को फिर सामने ला दिया।

आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर तीन घंटे का इंतजार

पिथौरागढ़-धारचूला-तवाघाट हाईवे पर आदि कैलाश यात्रा के दूसरे चरण के शुरू होने के साथ वाहनों का दबाव बढ़ गया। तवाघाट चौराहे और ग्वालगांव के बीच जाम इतना गंभीर रहा कि करीब 500 मीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।

पहाड़ी यात्रा में दूरी के बजाय समय का आकलन अधिक महत्वपूर्ण होता है। संकरे मार्ग, रुक-रुककर चलने वाला ट्रैफिक और सीमित मोड़ यात्रा कार्यक्रम को प्रभावित कर सकते हैं।

यात्रियों के लिए उपयोगी सलाह

होटल और होम स्टे की बुकिंग पहले से पक्की करें तथा पहुंचने का समय प्रॉपर्टी संचालक को बता दें। पार्किंग उपलब्ध न होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था या पैदल चलने के लिए तैयार रहें। धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए अतिरिक्त समय रखें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पहाड़ों की यात्रा पर जाम से बचने के लिए क्या करें? सुबह जल्दी यात्रा शुरू करें, सप्ताहांत के व्यस्त समय से बचें और रास्ते की स्थानीय यातायात स्थिति की जानकारी लेते रहें।

क्या बिना होटल बुकिंग के जाना सही रहेगा? छुट्टियों के दौरान होटल और होम स्टे जल्दी भर जाते हैं, इसलिए अग्रिम बुकिंग करना बेहतर है।

धार्मिक स्थलों पर वाहन पार्किंग कैसे मिलेगी? पार्किंग सीमित होने पर प्रशासन के बताए स्थान पर वाहन खड़ा करना पड़ सकता है। वैकल्पिक पार्किंग से मंदिर तक पैदल दूरी के लिए तैयार रहें।

Frequently Asked Questions

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