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ग्राउंड रिपोर्ट: ‘भाई जी! एडवांस टिकट तो बुक करवाओ, कितना भी सामान हो, बस पर लाद लेंगे’; नीचे से छत तक भरा माल

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Foto : Michael Martin - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. ग र उ ड र प: निजी स्लीपर बसों में सामान का बढ़ता बोझ और सुरक्षा का सवाल
  2. यमुना एक्सप्रेसवे की घटना के बाद बढ़ी चिंता
  3. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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  5. Frequently Asked Questions

ग र उ ड र प: निजी स्लीपर बसों में सामान का बढ़ता बोझ और सुरक्षा का सवाल

Indianewslive247.com – ग र उ ड र प र – ग र उ ड र प में दिल्ली से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और अन्य राज्यों के लिए चलने वाली निजी बसों में यात्रियों के सामान के साथ बड़े पैकेट और घरेलू वस्तुएं रखे जाने की स्थिति सामने आई है। कई बसों में केबिन, लगेज बॉक्स और छत तक सामान भरा हुआ दिखता है। इससे आपात स्थिति में यात्रियों की निकासी मुश्किल होने का खतरा बढ़ जाता है।

मुनिरका, कश्मीरी गेट और आनंद विहार जैसे बस प्वाइंटों पर बैग और सूटकेस के अलावा कार्टन, पैकेट तथा घरेलू उपयोग की वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं। यात्रियों के अनुसार, कुछ मामलों में फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे भारी सामान भी बसों से भेजे जाते हैं।

स्लीपर बसों में संकरा होता रास्ता

स्लीपर बसों में बर्थ और सीटों के बीच पहले ही सीमित जगह होती है। यदि इसी रास्ते में अतिरिक्त बैग या माल रख दिया जाए, तो दरवाजे और आपात निकास तक पहुंचने में बाधा आ सकती है। रात के सफर में सोए हुए यात्रियों के लिए यह स्थिति अधिक जोखिमपूर्ण हो सकती है।

मुनिरका से राजस्थान जा रहे यात्री मनोज ने बताया कि सामान अधिक होने पर यात्रियों को परेशानी होती है।

“स्लीपर बस में पहले ही जगह कम होती है। ऐसे में अधिक सामान रखे जाने से परेशानी बढ़ जाती है। रात में कोई हादसा हो जाए तो यात्रियों को बाहर निकलने में दिक्कत हो सकती है।”

यात्रियों का कहना है कि कुछ संचालक अतिरिक्त शुल्क लेकर अधिक सामान ले जाने की अनुमति देते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सामान गलियारे, दरवाजे या आपातकालीन निकास को अवरुद्ध न करे।

पैनिक बटन और आपात निकास की जानकारी का अभाव

कश्मीरी गेट और आनंद विहार से चलने वाली कुछ स्लीपर बसों में बर्थ की संख्या और बीच के रास्ते की चौड़ाई को लेकर भी सवाल उठे हैं। अधिक बर्थ और अतिरिक्त सामान के कारण यात्रियों के तेजी से बाहर निकलने की गुंजाइश कम हो सकती है।

यात्री हर्ष ने निचली स्लीपर बर्थ को अपेक्षाकृत सुविधाजनक बताया, जबकि ऊपरी बर्थ पर यात्रा में परेशानी होने की बात कही। कश्मीरी गेट पर बस का इंतजार कर रहे अभिषेक ने कहा कि यात्रियों को पैनिक बटन के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती।

“उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि बस में पैनिक बटन लगा है या नहीं। अगर लगा है तो वह काम करता है या नहीं, इसकी भी कोई जानकारी नहीं दी जाती।”

ग र उ ड र प में यह भी स्पष्ट हुआ कि पैनिक बटन, आपात दरवाजे और निकासी मार्ग तभी उपयोगी हैं, जब वे आसानी से उपलब्ध हों और यात्री उनके स्थान से परिचित हों। बस में चढ़ने से पहले सुरक्षा संबंधी बुनियादी जानकारी देना जरूरी है।

छत और लगेज बॉक्स तक सामान

आनंद विहार से उत्तर प्रदेश, बिहार और दूसरे राज्यों के लिए रवाना होने वाली बसों में निचले लगेज बॉक्स के साथ बस के भीतर और छत पर भी सामान रखा जाता है। यात्रियों ने कहा कि लंबी दूरी की बसों में माल रखने की जगह और मात्रा की जांच भी सुरक्षा जांच का हिस्सा होनी चाहिए।

दिल्ली में अलग-अलग राज्यों और नेपाल तक पंजीकृत बसों की प्रतिदिन आवाजाही होती है। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस रूट परमिट, पंजीकरण तथा प्रदूषण संबंधी दस्तावेजों की जांच करते हैं, लेकिन बस के भीतर सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर सवाल बने हुए हैं।

यमुना एक्सप्रेसवे की घटना के बाद बढ़ी चिंता

परी चौक से कश्मीरी गेट के बीच नाबालिग से दुष्कर्म की घटना और यमुना एक्सप्रेसवे पर चलती बस में आग लगने की घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा फिर चर्चा में है। इन घटनाओं ने बसों की बनावट, अतिरिक्त भार और आपात निकास की कार्यक्षमता को लेकर चिंता बढ़ाई है।

बसों की लंबाई में बदलाव कराने या निर्धारित ऊंचाई से ऊपर तक सामान रखने के आरोप भी सामने आए हैं। यदि निकास मार्ग बाधित हो या इमरजेंसी गेट समय पर न खुले, तो हादसे के दौरान थोड़ी-सी देरी भी गंभीर साबित हो सकती है।

3.9 मीटर की ऊंचाई सीमा

नियमों के तहत सामान समेत बस की कुल ऊंचाई 3.9 मीटर तक निर्धारित है। इससे अधिक ऊंचाई मिलने पर बस जब्त की जा सकती है। लंबाई, ऊंचाई या संरचना में तय मानकों के विरुद्ध बदलाव मिलने पर मोटर वाहन निरीक्षक मूल परमिट वाले संभागीय कार्यालय को परमिट रद्द करने और पंजीकरण निलंबित करने की सिफारिश कर सकता है।

ग र उ ड र प का निष्कर्ष यही है कि दस्तावेजों की जांच के साथ बस के अंदर का रास्ता, लगेज की स्थिति, आपात दरवाजे और सुरक्षा उपकरणों की कार्यशीलता भी देखी जानी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

बस में चढ़ने से पहले यात्री क्या जांचें?

यात्री देखें कि गलियारा, दरवाजा और आपात निकास सामान से बाधित न हों। पैनिक बटन या आपात खिड़की का स्थान भी चालक या परिचालक से पूछ सकते हैं।

छत पर सामान रखने से क्या जोखिम है?

अत्यधिक या असुरक्षित ढंग से रखा सामान वाहन की ऊंचाई और संतुलन को प्रभावित कर सकता है। तय सीमा से ऊपर सामान लादना नियमों के दायरे में कार्रवाई का कारण बन सकता है।

सुरक्षा संबंधी शिकायत कहां की जा सकती है?

यात्रियों को बस का नंबर, रूट और यात्रा का समय नोट कर संबंधित परिवहन विभाग या ट्रैफिक पुलिस को शिकायत देनी चाहिए। आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस या आपात सेवा से संपर्क करना चाहिए।

Frequently Asked Questions

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