इंदौर हाशिए पर: मेट्रोपॉलिटन सिटी बनने से पहले मास्टर प्लान पर ब्रेक, बढ़ रही अवैध बसाहट
इ द र ह श ए पर – इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी के दर्जनों क्षेत्रों को शामिल करने के लिए सरकार काम कर रही है, लेकिन नए मास्टर प्लान के निर्माण में अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है। पिछले पांच साल से शहर के विस्तार के साथ अनियंत्रित निर्माण कार्य बढ़ते रहे हैं, जिसके कारण शहरी सीमा से जुड़े क्षेत्र में बेतरतीब विकास हो रहा है।
मास्टर प्लान अटक गया: विस्तार और निर्माण के लिए समस्याएं
इंदौर के पिछले मास्टर प्लान के अवधि के समापन के बाद नया विकास योजना तैयार करने में बाधाएं उत्पन्न हो गई हैं। इसके अलावा, शहर के प्रस्तावित 79 गांवों के लिए अनुमति अब तक नहीं मिल पाई है।
इंदौर में 2008 में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट के दौरान पहला मास्टर प्लान लागू किया गया था, जिसकी अवधि पांच साल पहले समाप्त हो चुकी है। विकास योजना-2021 नाम के उस मास्टर प्लान की अवधि 13 वर्ष थी, लेकिन इसे लागू करने में 18 साल लग गए। इस बीच अवैध बसाहट तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण विकास योजना के आधे से अधिक हिस्सा अधूरा रह गया।
मेट्रोपॉलिटन सिटी अधिसूचना जारी होने के बाद अगले चरण के अनुमान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष नए मास्टर प्लान की समीक्षा हो चुकी है, और इसे 2035 तक विकास के अनुरूप तैयार करने की योजना बन चुकी है। विशेषज्ञों की सलाह लेकर निर्माण अत्यधिक उच्च गति से हो सकता है।
“इंदौर और भोपाल के मास्टर प्लान में हो रही देरी एक बड़ी चिंता है। विकास योजना बैलगाड़ी में आ रही है, क्या इसके अंतर्गत अपेक्षित लाभ बरबाद हो रहे हैं?” नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूछा था।
नारंग के अनुसार, मास्टर प्लान के अंतर्गत अब तक 60 प्रतिशत कार्य नहीं किया जा सका है। शहर में सभी प्रमुख मार्गों और वन क्षेत्रों का विकास पूरा नहीं हुआ, जबकि नए ट्रेंचिंग ग्राउंड के प्रावधान भी अब तक लागू नहीं हुए।
इंदौर उत्थान संगठन के संयोजक अजीत सिंह नारंग ने कहा कि प्रारूप के अधिसूचना के बाद नए मास्टर प्लान के निर्माण की उम्मीद है। इससे पहले अवैध बसाहट की वजह से विकास कार्यों में रुकावट आई है।
