Aaj Ka Shabd

आज का शब्द: प्रियदर्शन और जयशंकर प्रसाद की कविता- सौन्दर्य

आज का शब्द: प्रियदर्शन और जयशंकर प्रसाद की कविता- सौन्दर्य

आज क शब द – आज का शब्द, हिंदी के शब्द शृंखला का एक उत्कृष्ट अंग, ‘प्रियदर्शन’ को चुना गया है। इस शब्द का अर्थ अत्यंत रोमांचक होता है, जो वह देखने में खासी रोमांचक लगने वाला वस्तु या व्यक्ति को बताता है। इस शब्द के आधार पर जयशंकर प्रसाद की कविता ‘सौन्दर्य’ के विशेष संस्करण के प्रस्तुतीकरण के लिए आज के शब्द के चुनाव ने एक गहरा विषय खोला है। कविता में आज के शब्द के साथ अपनी कला के जूहे को छोड़कर विशेष भावना के साथ सौन्दर्य के गहरे विषय की अंतर्जाति के प्रकट करने के लिए जयशंकर प्रसाद ने अपनी कलम के साथ एक आश्चर्यजनक रचना बनाई है।

कविता की गहरी विशेषता

नील नीरद देखकर आकाश में क्यों खड़ा चातक रहा? क्यों चकोरों को हुआ उल्लास?

है क्या कलानिधि का अपूर्व विकास? है क्या हुआ जो देखकर कमलावली मत्त होकर गूँजती?

भ्रमरावली कंटकों में जो खिला यह फूल है? देखते हो क्यों हृदय अनुकूल है?

है यही सौन्दर्य। में सुषमा बड़ी लौह-हिय को आँच इसकी ही कड़ी देखने के साथ ही सुन्दर वदन दीख पड़ता है।

सजा सुखमय सदन देखते ही रूप मन प्रमुदित हुआ। प्राण भी अमोद से सुरभित हुआ।

रस हुआ रसना में उसके बोलकर स्पर्श करता। सुख हृदय को खोलकर लोग प्रिय-दर्शन बताते।

इन्दु को देखकर सौन्दर्य के इक बिन्दु को। किन्तु प्रिय-दर्शन स्वयं सौन्दर्य है।

सब जगह इसकी प्रभा ही वर्य है। जो पथिक होता कभी इस चाह में वह तुरत ही लुट गया।

इस राह में मानवी या प्राकृतिक सुषमा सभी दिव्य शिल्पी के कला-कौशल सभी देख लो।

जी-भर इसे देखा करो। इस कलम से चित्त पर रेखा करो। लिखते-लिखते चित्र वह बन जायगा सत्य-सुन्दर।

आज के शब्द के चुनाव के पीछे जयशंकर प्रसाद के कलात्मक विचार की गहरी विशेषता है। जो इस रचना के माध्यम से हमें शब्द के बीते समय के बारे में बताते हैं। कविता ‘सौन्दर्य’ के लिए आज के शब्द अत्यंत योग्य है, जो समय के बदलते लोगों के द्वारा चुने गए शब्द के महत्व को उजागर करता है। आज के शब्द के माध्यम से हमें प्राकृतिक और मानवीय शैलियों के बीच एक असामान्य तार्किक संबंध को बताया जा सकता है।

शब्द और कविता के संबंध के बारे में

आज के शब्द ‘प्रियदर्शन’ के चुनाव के पीछे एक गहरा भाव है, जो हमें जीवन की शान्ति और रोमांच की भावना के बारे में विस्तार से बताता है। जयशंकर प्रसाद की कविता ‘सौन्दर्य’ के लिए आज के शब्द की एक अत्�

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