सूर्यपथ तिरंगा: फिजी से सैन फ्रांसिस्को तक डिजिटल रिले
Indianewslive247.com – स र यपथ त र ग – भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘हर घर तिरंगा’ कार्यक्रम में एक नई दिशा मिली है। इस बार सूर्यपथ तिरंगा नामक विशेष पहल के तहत देश के 54 राजनयिक मिशन फिजी से लेकर अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को तक तिरंगे की तस्वीरों का डिजिटल रिले चलाएंगे। यह रिले पूर्व से पश्चिम की ओर अलग-अलग समय क्षेत्रों में संचालित होगा।
अधिकारियों ने बताया कि 9 से 17 अगस्त के बीच देशभर में विषय-विशेष आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें ‘सेल्फी विद तिरंगा’, बाइक रैली, सैन्य बैंड की संगीत प्रस्तुतियां, सामूहिक वंदे मातरम् गायन और एक विशेष पोर्टल के जरिए कराओके शैली में वंदे मातरम् गाकर रिकॉर्डिंग अपलोड करने जैसे आयोजन शामिल हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का भी जश्न मनाया जाएगा।
विदेशी मिशनों की भूमिका
देश के अलावा विदेशों में स्थित भारतीय राजनयिक प्रतिनिधित्व भी इस वार्षिक अभियान का हिस्सा बनेंगे। ‘हर घर तिरंगा’ का पहला संस्करण अगस्त 2022 में भारत की आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर शुरू किया गया था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि यह एक नवोन्मेषी पहल है जो राष्ट्रीय ध्वज, सम्मान और गौरव को अनूठे तरीके से समर्पित करेगी। उन्होंने कहा कि 54 मिशनों का चयन विभिन्न देशों के समय क्षेत्र और तकनीकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर किया गया है।
तिरंगे की तस्वीरों का डिजिटल रिले फिजी से शुरू होगा, जो भारत की सबसे पूर्वी राजनयिक मौजूदगी है। इसके बाद यह क्रमशः पश्चिम की ओर बढ़ते हुए सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास तक पहुंचेगा।
जायसवाल ने स्पष्ट किया कि फिजी भारत से समय में आगे है। जब वहां भारतीय मिशन में ध्वजारोहण होगा, तब भारत में करीब आधी रात होगी। मिशन एक-एक कर पूर्व से पश्चिम की दिशा में तिरंगे की तस्वीरें अगले मिशन को भेजते जाएंगे।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और वंदे मातरम् पर जोर
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय मिशनों ने ‘भारत को जानो’ प्रश्नोत्तरी, प्रदर्शनियां, चित्रकला प्रतियोगिताएं और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के सहयोग से गोंड, वारली और मधुबनी जैसी भारतीय कला पर कार्यशालाओं की तैयारी की है। इन कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने की झलक भी देखने को मिलेगी।
जायसवाल ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी दुनिया के कई प्रतिष्ठित स्मारकों को भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रोशनी से सजाया जाएगा।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और विभिन्न कार्यक्रमों में इसका सामूहिक गायन होगा।
देश के अधिकांश लोगों को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ पूरी तरह याद है और वे निर्धारित समय में इसे गा सकते हैं। हम लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे वंदे मातरम् का गायन करें और कराओके शैली में इसकी रिकॉर्डिंग ऑनलाइन अपलोड करें। इसका उद्देश्य लोगों को वंदे मातरम् के पूरे पदों से परिचित कराना है।
शेखावत ने आरोप लगाया कि आजादी के बाद तत्कालीन सरकार ने वंदे मातरम् के मूल पदों को खंडित कर दिया था।
विपक्ष की आलोचना और नया विधेयक
विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बीच तुलना का माहौल बनाने की कोशिश की है। कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विभिन्न कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का अनिवार्य गायन कराकर लोगों पर “राष्ट्रवाद थोपने” का प्रयास किया जा रहा है।
हाल ही में संसद ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया है। इसके तहत राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन कर वंदे मातरम् को भी वही कानूनी संरक्षण दिया गया है, जो अभी तक राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त था। इस संशोधन के बाद जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन में बाधा डालना या उसके गायन के दौरान सभा में व्यवधान उत्पन्न करना दंडनीय अपराध होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूर्यपथ तिरंगा रिले कब शुरू होगा? सूर्यपथ तिरंगा डिजिटल रिले 9 से 17 अगस्त के बीच संचालित किया जाएगा।
इस रिले में कितने मिशन शामिल हैं? इस अभियान में देश के 54 राजनयिक मिशन—जिनमें उच्चायोग, दूतावास और वाणिज्य दूतावास शामिल हैं—शामिल हैं।
रिले की शुरुआत और अंत कहाँ होगी? डिजिटल रिले फिजी से शुरू होकर सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास तक पहुंचेगा।
वंदे मातरम् रिकॉर्डिंग कहाँ अपलोड करें? एक विशेष पोर्टल के जरिए कराओके शैली में वंदे मातरम् गाकर रिकॉर्डिंग अपलोड की जा सकती है।
नया विधेयक क्या कहता है? राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत वंदे मातरम् को भी वही कानूनी संरक्षण प्राप्त है जो राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को था।
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