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राम चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट ने बैंक पर फोड़ा पूरा ठीकरा, खुद पर कोई सवाल नहीं; बच निकले मामले के बड़े आरोपी

Foto : Charles Davis - indianewslive247.com

राम चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट ने बैंक को दिया सिर झुकाया, अपनी लापरवाही छुपाई

Indianewslive247.com – र म चढ व च र – श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हालिया बैठक में राम चढ़ावा चोरी की घटना पर गहराई से चर्चा की गई। न्यासी मंडल के सदस्यों ने इस मामले पर अपनी निराशा जाहिर की और पूरा दोष बैंक पर मढ़ दिया। बैठक में बैंक की सभी गलतियों को उजागर किया गया, जबकि ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों की लापरवाही का उल्लेख तक नहीं किया गया। यह घटना लखनऊ में हुई, जहां ट्रस्ट की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी कमियां सामने आईं।

ट्रस्ट द्वारा जारी किए गए बयान के अनुसार, एसबीआई के साथ हुए एमओयू के तहत बैंक की जिम्मेदारियों और उनके पालन की समीक्षा की गई। इस दौरान यह बताया गया कि बैंक ने कितनी लापरवाही बरती। मौजूदा नियमों को दरकिनार कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप चढ़ावे की गणना में अनियमितताएं आईं। इस संबंध में भी निराशा व्यक्त की गई। बैंक के अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी से भागने की कोशिश की।

सभी ट्रस्टियों ने मिलकर चढ़ावा चोरी की जिम्मेदारी बैंक पर थोप दी, हालांकि हकीकत में स्थिति कुछ और थी।

वास्तव में, बैंक की लापरवाही तो थी ही, लेकिन एमओयू की शर्तों में शिथिलता तत्कालीन ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा ने बरती थी। यही शिथिलता चोरी की घटना का कारण बनी। यह तथ्य एसआईटी की अपनी जांच रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया था। अनिल मिश्रा की भूमिका पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

बड़े आरोपी बच निकले, मामला अभी भी अनसुलझा

राम चढ़ावा चोरी मामले में बड़े आरोपी बच निकले हैं, जो इस बात का संकेत है कि जांच में अभी भी कई पहलू बाकी हैं। एसआईटी की रिपोर्ट में इन आरोपियों की पहचान की गई है, लेकिन उन्हें पकड़ने में पुलिस को अभी भी संघर्ष करना पड़ रहा है। कुछ आरोपी तो देश से बाहर भी निकल गए हैं, जिससे मामला और जटिल हो गया है।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि अनिल मिश्रा और ट्रस्ट की ओर से बरती गई लापरवाही पर चर्चा क्यों नहीं हुई। ट्रस्ट ने अपनी आंतरिक कमियों को छुपाते हुए पूरा ठीकरा बैंक पर फोड़ दिया। चढ़ावा चोरी की घटना के बाद से ट्रस्ट की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंची है। लोग अब ट्रस्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।

बैंक की ओर से भी इस मामले में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। एसबीआई के अधिकारियों का कहना है कि वे एमओयू की शर्तों के अनुसार काम कर रहे थे। लेकिन ट्रस्ट की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि बैंक ने अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाई नहीं। दोनों पक्षों के बीच यह बहस अभी भी जारी है।

मामले की जांच करने वाली एसआईटी ने अब तक कई गवाहों से बयान दर्ज किए हैं। इन गवाहों के बयानों से पता चलता है कि चोरी की घटना में ट्रस्ट के भी कुछ कर्मचारियों की भूमिका रही हो सकती है। लेकिन इन कर्मचारियों के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि राम चढ़ावा चोरी का मामला अभी भी अनसुलझा हुआ है। ट्रस्ट और बैंक दोनों अपनी-अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। जब तक इस मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक लोग सही जवाब नहीं पा सकेंगे। ट्रस्ट को चाहिए कि वह अपनी आंतरिक कमियों को स्वीकार करे और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाए।

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