UP News: 47 लाख बिजली उपभोक्ताओं का भार बढ़ाए बिना सूचित किए, सब्सिडी से हुए बाहर
UP News – उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ता परिषद ने उपभोक्ता के स्वीकृत भार को अचानक बढ़ाए जाने की कार्यवाही पर आपत्ति जताई है। इस नीति के कारण करीब 25 फीसदी गरीब उपभोक्ता सब्सिडी योजना से बाहर हो गए हैं। जिसके बारे में उपभोक्ता सूची में 1.70 लाख बीपीएल उपभोक्ता हैं, जो अब आर्थिक बोझ के अतिरिक्त उपभोक्ता दरों पर बिजली की आपूर्ति के विपरीत निपटान कर रहे हैं।
टैरिफ आदेश के विपरीत कदम
अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने उल्लेख किया कि टैरिफ आदेश के अनुसार, उपभोक्ता के तीन माह तक अधिक भार उपयोग करने पर सूचना देना आवश्यक है। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भार बढ़ाए जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। लेकिन अब राज्य ने इस कदम के बिना सूचित कर दिया गया है।
इस नीति के कारण राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। प्रदेश में लगभग 50 फीसदी उपभोक्ता स्मार्ट मीटर के साथ हैं, जिनमें से अधिकांश रियायती दरों पर बिजली उपयोग करते थे। अब इन उपभोक्ताओं को अतिरिक्त शुल्क भुगतान करना पड़ेगा।
बिजली उपभोक्ता योजना पर प्रभाव
वर्मा ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के लिखित जवाब का संदर्भ देते हुए कहा कि विद्युत नियामक आयोग के आदेश में उपभोक्ता के अधिक भार बढ़ाने के लिए तीन माह के अंतर्गत सूचना देने की व्यवस्था है। अब राज्य ने इस कार्यवाही के बिना तत्काल बिजली उपभोक्ता योजना के भार को बढ़ा दिया है।
अंतर्राष्ट्रीय उपभोक्ता सूची में अधिकतम मांग वसूली के नियमों का उल्लंघन किया गया है। उपभोक्ताओं के भार बढ़ाए जाने के बाद, बीपीएल उपभोक्ताओं के मासिक भुगतान लगभग 300 रुपया हो गए हैं। जिसके कारण अतिरिक्त आर्थिक बोझ करीब 165 रुपया होगा, जबकि शहरी क्षेत्र में इस बोझ का मूल्य 435 रुपया लगभग होता है।
उपभोक्ता परिषद के आंकड़ों के अनुसार, इस कदम से गरीब उपभोक्ताओं के बिजली उपभोग पर वित्तीय भार बढ़ गया है। जिसके अंतर्गत प्रदेश के 47 लाख उपभोक्ता बिना सूचित किए भार बढ़ा दिए गए हैं। इस बदलाव के कारण लगभग 25 फीसदी लोग सब्सिडी योजना से हुए बाहर।
इस नीति के बारे में उपभोक्ता परिषद के बयान में कहा गया है कि राज्य सरकार के भार बढ़ाए जाने के बिना सूचना देना आवश्यक है। इसके बाद आपूर्ति दरों पर बिजली बिल भुगतान करना आसान हो जाएगा। इस बारे में उपभोक्ता सूची में भार बढ़ाए जाने के परिणाम उपभोक्ताओं पर विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं।
