भारत की दो-टूक: पाकिस्तान के यूएन मंच का राजनीतिकरण
भ रत क द ट क – भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के रूप में पाकिस्तान के उपयोग के आरोप लगाए हैं। इस मंच का राजनीतिकरण कर रहे पाकिस्तान की आलोचना करते हुए भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि निष्पक्षता की अपेक्षा जारी रखने के लिए यूएन के अध्यक्षता की जांच की जानी चाहिए।
कश्मीर विवाद के बारे में चर्चा
मंगलवार की बैठक में भारत की दो-टूक भाषा से जम्मू और कश्मीर के मुद्दा लगातार उठाया गया। भारत के प्रतिनिधि ने यह जोर देकर कहा कि एक पूर्णतया आंतरिक मामला भारत का है और इसे अंतरराष्ट्रीय मंच के जरिए निष्पक्षता की अपेक्षा लगाना गलत है।
हरीश ने कहा, ‘भारत की दो-टूक राय है कि सुरक्षा परिषद के विश्वासघात कर रहे अप्रैल 1948 के प्रस्ताव 47 के उल्लंघन की जांच करनी चाहिए। इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के मामले में समाधान ढूंढने के लिए नए उपायों की आवश्यकता है।’
यूएन के राजनीतिक वर्चस्व की आलोचना
भारत के प्रतिनिधि ने यह भी उल्लेख किया कि यूएन के मंच का राजनीतिक वर्चस्व पाकिस्तान के लिए एक नई चुनौती बन गया है। इस मंच के विश्वासघात कर रहे पाकिस्तान ने अपने विश्वास के आधार पर बैठक में अपने दृष्टिकोण का प्रस्तुति दी, जिसकी वैधता बदलती अवस्थाओं के अनुसार समीक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने यह बताया कि पाकिस्तान ने यूएन के नेतृत्व के रूप में अपनी वास्तविकताओं के अनुरूप निर्णय लेने के लिए अपनी राजनीतिक शक्ति का उपयोग कर रहे हैं। इस तरह यूएन के मंच का राजनीतिकरण कश्मीर मुद्दे पर गहरा असर डाल रहा है।
भारत की दो-टूक राय के बाद, पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने जवाब दिया कि उनके देश के अवसर पर अपने दृष्टिकोण का पालन किया जाता है। उन्होंने इस बात का ज़ोर देकर कहा कि जम्मू और कश्मीर में उपस्थित सशस्त्र बल और नागरिकों के बारे में प्रस्ताव के लिए पाकिस्तान की भारत की दो-टूक के आरोप उचित नहीं हैं।
मंगलवार की बैठक में उपलब्ध अधिकारियों द्वारा पेश किए गए उपायों का अनुमोदन करते हुए भारत की दो-टूक ने यह बताया कि यूएन के आंतरिक मामला लेने के अधिकार का उपयोग अनुचित ढंग से किया जा रहा है। इस बारे में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर भारत ने निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अपना दृढ़ संकल्प बयां किया।
यूएन के मंच का राजनीतिकरण एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारत की दो-टूक के आरोपों के बाद पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने अपने देश के राजनीतिक दृष्टिकोण के आधार पर विवाद को निपटाने के लिए आवश्यक उपाय अपनाए हैं।
