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Explainer: वी द लीडर आंदोलन से 24 घंटे में जुड़े 13 लाख लोग, क्या विजय जैसा करिश्मा दोहरा पाएंगे अन्नामलाई?

अन्नामलाई ने भाजपा से इस्तीफा ले लिया, वी द लीडर आंदोलन की शुरुआत कर दी

Explainer – तमिलनाडु के राजनीतिक लोकप्रियता के लिए जाने जाने वाले विजय की टीवीके पार्टी ने गत विधानसभा चुनाव में आश्चर्यजनक रूप से अपने आसपास लोगों के अंतर्भुक्त कर लिया गया। दो साल के भीतर उन्होंने राज्य की जनता में ऐसी पैंठ बनाई, जिसके कारण अपनी पार्टी को पलकों पर बिठा लिया गया। हालांकि भाजपा नेतृत्व के बारे में इस विवाद में अन्नामलाई के इस्तीफा देकर वी द लीडर आंदोलन शुरू कर दिया गया।

अन्नामलाई के नए आंदोलन को लेकर पिछले 24 घंटों में 13 लाख से अधिक लोगों के जुड़ने का दावा किया जा रहा है। इस प्रकार का शुरुआती समर्थन राजनीतिक आंदोलनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अन्नामलाई ने इसके बारे में कहा, “आपके द्वारा दिए गए अपार समर्थन के लिए हम धन्यवाद देते हैं। वी द लीडर आंदोलन ने मुझे गहरी जिम्मेदारी का अहसास दिलाया है। यह किसी एक व्यक्ति की यात्रा नहीं है, बल्कि बदलाव की चाह रखने वाले हमारे लोगों की सामूहिक यात्रा है। आपके भरोसे का सम्मान करते हुए, इस यात्रा को ईमानदारी और समर्पण के साथ आगे बढ़ाएं।”

भाजपा नेतृत्व के साथ अन्नामलाई के मतभेद लंबे समय से चल रहे थे

अन्नामलाई के इस्तीफे के पीछे केवल एक दिन या एक फैसला जिम्मेदार नहीं रह गया। लगभग 18 महीनों से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और अन्नामलाई के बीच मतभेद लगातार बढ़ते रहे। राजनीतिक जानकार आंदोलनों के बारे में मानते हैं कि एआईएडीएमके के साथ भाजपा के दोबारा गठबंधन के फैसले ने उस विवाद को ताबूत की आखिरी कील साबित हुई।

दिसंबर 2025 में अन्नामलाई ने भाजपा नेतृत्व को पार्टी छोड़ने की इच्छा बताई थी, लेकिन पार्टी ने विधानसभा चुनाव की तैयारी पूरी करने को कहा। उनका मानना था कि भाजपा तमिलनाडु के राज्य दूरदराज इलाकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने खुद को एक आक्रमक लेकिन लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित किया।

वी द लीडर आंदोलन के भविष्य और राजनीतिक विश्लेषण

अन्नामलाई ने अपने इस्तीफे के पीछे तमिलनाडु के राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के लेकर उनकी सोच के अंतर को बताया। उनका कहना है कि अब राज्य की राजनीति में एक वैकल्पिक और समावेशी मंच की जरूरत महसूस की जा रही है। उनका नया आंदोलन इसी दिशा में एक प्रयास है। अब विश्लेषक मानते हैं कि अगर अन्नामलाई वास्तव में एक पूर्ण राजनीतिक दल बनाते हैं, तो तमिलनाडु की पारंपरिक राजनीति को चुनौती देने की क्षमता रख

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