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अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए नया प्रस्ताव: नौकरी के लिए 70 हजार डॉलर फीस; भारतीयों की बढ़ेगी मुश्किल?

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Foto : David Miller - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. अमेरिका में विदेशी छात्रों के ओपीटी पर 70 हजार डॉलर शुल्क का प्रस्ताव
  2. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  3. Related Reading
  4. Frequently Asked Questions

अमेरिका में विदेशी छात्रों के ओपीटी पर 70 हजार डॉलर शुल्क का प्रस्ताव

Indianewslive247.com – अम र क म व द श छात्रों के लिए नौकरी के रास्ते को महंगा बनाने वाला प्रस्ताव सामने आया है। अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने सुझाव दिया है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) में पहली बार शामिल होने वाले विदेशी छात्र के संस्थान से 70 हजार अमेरिकी डॉलर शुल्क लिया जाए। इससे अमेरिका में उच्च शिक्षा और नौकरी की योजना बना रहे भारतीय छात्रों की चिंता बढ़ सकती है।

प्रस्ताव के अनुसार, ओपीटी के हर नवीनीकरण पर शिक्षण संस्थान को 30 हजार डॉलर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। ओपीटी विदेशी छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके अध्ययन क्षेत्र से जुड़ी नौकरी करने का अवसर देता है। सामान्य ओपीटी अवधि एक वर्ष की होती है, जबकि विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) विषयों के छात्रों को तीन वर्ष तक काम करने की अनुमति मिल सकती है।

भारतीय छात्रों पर संभावित असर

अम र क म व द श पढ़ाई का विकल्प चुनने वाले भारतीय छात्रों के लिए ओपीटी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे डिग्री के बाद व्यावहारिक अनुभव और रोजगार का अवसर मिलता है। 2024-25 के शैक्षणिक वर्ष में 3.63 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने अमेरिका के विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था। भारत अंतरराष्ट्रीय छात्रों के सबसे बड़े स्रोत देशों में शामिल रहा है।

कॉमन एप की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने 2025-26 की शरद ऋतु में स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में 41.77 अरब डॉलर का योगदान दिया। 2026-27 में यह योगदान 38.37 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। ऐसे में नया शुल्क प्रस्ताव संस्थानों की भर्ती रणनीति और विदेशी छात्रों की पसंद, दोनों को प्रभावित कर सकता है।

डीएचएस ने प्रस्ताव की वजह क्या बताई?

डीएचएस का कहना है कि यह शुल्क वीजा कार्यक्रम में कथित धोखाधड़ी और नियमों के दुरुपयोग के जवाब में प्रस्तावित किया गया है। विभाग ने ओपीटी को सस्ते विदेशी श्रम की आपूर्ति का माध्यम बनाए जाने पर चिंता जताई है। उसके अनुसार, कुछ मामलों में स्कूलों, अधिकारियों, नियोक्ताओं और एफ-1 वीजा धारक छात्रों द्वारा मौजूदा नियमों का गलत इस्तेमाल किए जाने के आरोप सामने आए हैं।

डीएचएस के अनुसार, ओपीटी का उद्देश्य अमेरिकी कार्यबल में पीछे के रास्ते से प्रवेश देना नहीं था, बल्कि छात्रों को उनके अध्ययन से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना था।

विभाग ने संदिग्ध कार्यस्थलों के इस्तेमाल और पैसे देकर वीजा स्थिति बनाए रखने जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया है। उसका कहना है कि प्रस्तावित बदलावों के बाद विदेशी छात्रों को नियोक्ताओं के सामने अपनी उपयोगिता अधिक स्पष्ट रूप से साबित करनी होगी।

अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में गिरावट

एनएएफएसए और रिसर्च फर्म जेबी इंटरनेशनल के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी संस्थानों में दाखिला लेने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या घटी है। 2025-26 के शैक्षणिक वर्ष में यह संख्या लगभग 11.69 लाख थी, जो इस वर्ष घटकर 10.57 लाख रह गई है। अम र क म व द श छात्रों से जुड़े इस प्रस्ताव के लागू होने पर भर्ती में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या 70 हजार डॉलर का शुल्क छात्र को सीधे देना होगा?

प्रस्ताव के अनुसार, पहली बार ओपीटी में शामिल होने पर शुल्क शिक्षण संस्थान से लिया जाएगा। हालांकि, संस्थान इस अतिरिक्त लागत को किस प्रकार संभालेंगे और उसका छात्रों पर कितना असर पड़ेगा, यह अंतिम नियमों के बाद स्पष्ट होगा।

क्या यह नियम अभी लागू हो चुका है?

नहीं, यह डीएचएस का प्रस्ताव है। इस पर जनता को राय देने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद विभाग इसे अंतिम रूप देकर लागू कर सकता है, हालांकि कानूनी चुनौती की स्थिति में प्रक्रिया में देरी संभव है।

भारतीय छात्रों को अभी क्या करना चाहिए?

अमेरिका में आवेदन या ओपीटी की योजना बना रहे छात्रों को अपने विश्वविद्यालय, अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्यालय और आधिकारिक आव्रजन सूचनाओं से नियमित जानकारी लेते रहना चाहिए। अंतिम नियम आने तक मौजूदा ओपीटी व्यवस्था में कोई बदलाव मानकर चलना उचित नहीं होगा।

Frequently Asked Questions

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