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‘मिस्टर सिंह, देश छोड़ो’: भारतीय ड्राइवरों पर अमेरिका में नस्लीय टिप्पणी, डीएचएस के विज्ञापन पर मचा बवाल

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Foto : Daniel Davis - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. डीएचएस के विज्ञापन पर क्यों भड़का विवाद?
  2. वीडियो और डीएचएस के संदेश में क्या दिखाया गया?
  3. हिंदू और सिख संगठनों ने क्या आपत्ति जताई?
  4. सीबीपी होम कार्यक्रम से इसका क्या संबंध है?
  5. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  6. Related Reading
  7. Frequently Asked Questions

डीएचएस के विज्ञापन पर क्यों भड़का विवाद?

Indianewslive247.com – म स टर स ह द श – म स टर स ह द — अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) के एक विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ नाम का इस्तेमाल किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। विज्ञापन में बिना लाइसेंस वाले व्यावसायिक ड्राइवरों के खिलाफ अभियान का संदेश दिया गया, लेकिन अधिकार संगठनों ने इसे भारतीय और सिख समुदायों के प्रति नस्लीय प्रोफाइलिंग बताया है।

डीएचएस ने एक्स पर अभियान से जुड़ी एआई-जनित तस्वीरें साझा की थीं। इनमें भूरी दाढ़ी वाले एक व्यक्ति को दिखाया गया और संदेश दिया गया कि “मिस्टर सिंह” को अमेरिका की सड़कों से हट जाना चाहिए क्योंकि उसे गाड़ी चलाना नहीं आता। इसी भाषा और दृश्य प्रस्तुति को लेकर म स टर स ह द विषय पर आलोचना तेज हो गई।

वीडियो और डीएचएस के संदेश में क्या दिखाया गया?

एक पोस्ट में ट्रांसफॉर्मर्स फ्रैंचाइजी के खलनायक मेगाट्रॉन का छोटा वीडियो क्लिप दिखाया गया। इसमें उसे उन ट्रक ड्राइवरों की रिहाई के लिए बातचीत करते हुए पेश किया गया, जिनके नाम हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार, बेकजान बेशेकीव, अखरोर बोजोरोव और जसवीर सिंह बताए गए हैं। पोस्ट के अनुसार, ये लोग सड़क दुर्घटनाओं और अन्य अपराधों के मामलों में शामिल थे।

डीएचएस ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि यदि कोई व्यक्ति देश के खिलाफ “दुश्मनी भरी नीयत” से आता है तो अमेरिका अपना बचाव करेगा और अमेरिकी मूल्यों की रक्षा करेगा। दूसरी सामग्री में ट्रांसफॉर्मर्स के नायक ऑप्टिमस प्राइम को डीएचएस बैज के साथ दिखाया गया, जहां वह दाढ़ी वाले व्यक्ति से “खुद देश छोड़ दें या अंजाम भुगतें” जैसा संदेश कहता नजर आता है।

हिंदू और सिख संगठनों ने क्या आपत्ति जताई?

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (एचएएफ) और सिख कोएलिशन ने विज्ञापन में ‘सिंह’ नाम के इस्तेमाल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। एचएएफ ने कहा कि सिंह हिंदू भी हो सकते हैं, सिख भी और अमेरिकी भी; ऐसे में किसी नाम और रूप-रंग को निशाना बनाना नस्लवादी, गैर-अमेरिकी और भारत-विरोधी प्रोफाइलिंग जैसा है। संगठन ने असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों और एफबीआई निदेशक काश पटेल को टैग कर जांच की मांग की।

सिख कोएलिशन ने कहा कि 9/11 के 25 वर्ष बाद भी सिखों को उनके रूप-रंग के आधार पर निशाना बनाया और प्रोफाइल किया जा रहा है। संगठन के अनुसार, अमेरिका में लाखों सिखों का उपनाम सिंह है, जिसका अर्थ शेर होता है। म स टर स ह द विवाद को लेकर संगठन ने कहा कि सिख अपनी पहचान बताने से नहीं डरते, भले ही सरकारी संदेश उन्हें दुश्मन के रूप में पेश करता हो।

सीबीपी होम कार्यक्रम से इसका क्या संबंध है?

यह विवाद डीएचएस के ‘सीबीपी होम’ कार्यक्रम के प्रचार अभियान के बीच सामने आया है। इस कार्यक्रम के तहत पात्र और बिना दस्तावेज वाले प्रवासी स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ने की इच्छा दर्ज करा सकते हैं। डीएचएस के मुताबिक, सेल्फ-डिपोर्टेशन के लिए पंजीकरण कराने वाले लोगों को यात्रा सहायता और 2,600 अमेरिकी डॉलर तक का एग्जिट बोनस मिल सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

‘सिंह’ नाम पर आपत्ति क्यों हुई?

आलोचकों का कहना है कि सिंह नाम भारतीय और सिख समुदायों में व्यापक है। इसलिए इसे किसी कथित अपराधी या अयोग्य चालक के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करना पूरे समुदाय को निशाना बनाने जैसा प्रतीत हो सकता है।

म स टर स ह द विवाद में संगठनों की मुख्य मांग क्या है?

एचएएफ और सिख कोएलिशन जैसे संगठनों ने विज्ञापन की भाषा और प्रस्तुति पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच तथा भेदभावपूर्ण प्रोफाइलिंग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

Frequently Asked Questions

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