POK में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार के बारे में विवाद
प ओक म प क स त – POK में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार के बारे में विवाद फिर तेज हो गया है। बुधवार को अब्बासपुर में हुई झड़प में हजारों लोग शामिल रहे, जिसमें आंदोलन के अंतरराष्ट्रीय समर्थन के नेता भी शामिल रहे। सुरक्षा बलों ने डुडियाल और अन्य क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई घायल हुए। घायल लोगों की हालत गंभीर बताई गई है।
जेएएसी के आंदोलन और सरकार की नीति
जेएएसी ने पीओके में अत्याचार के खिलाफ शांतिपूर्ण धरना आयोजित किया, जिसमें 40 हजार से अधिक लोग शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों के बरखास्त करने के लिए सुरक्षा बलों ने असंख्य लोगों पर गोलियां चलाई, जिसमें आठ जून के घटना में कम से कम 30 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पीओके के विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर विवाद बना हुआ है।
गोलीबारी और अंतरराष्ट्रीय आलोचना
मुजफ्फराबाद में झड़प के दौरान पुलिस और पाकिस्तानी रेंजर्स ने आंसू गैस के गोले चलाए, जिसमें बाइक क्षतिग्रस्त कर दी गई। अन्य क्षेत्रों में तरीकाबाद, मनक पियन, लोअर छत्रा और बेइला नूर शाह के बीच लड़ाइयां लड़ी गईं। इन घटनाओं के बारे में पीओके में आंदोलन के दौरान आवाज उठाई गई।
“हम अपने लोगों के लिए राशन और दवाओं की कमी के बारे में चिंतित हैं। हमें आपकी मदद चाहिए और सीजफायर लाइन को खत्म करना चाहते हैं,” जेएएसी के सदस्य सरदार अमन खान ने एक वीडियो में कहा।
इस विरोध के कारण इस्लामाबाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ा है। आंदोलन विशेष रूप से बुनियादी अधिकारों के लिए जारी रहा है। जेएएसी ने इमरान खान की पार्टी के विरुद्ध गोलीबारी के आरोप लगाए हैं और गैर-कानूनी ढंग से गिरफ्तार लोगों की तुरंत रिहाई की मांग की।
पीओके में आंदोलन अंतरराष्ट्रीय राजनेता और संगठनों के द्वारा भी समर्थित रहे। कश्मीरियों के समूह ने न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में प्रदर्शन कर जेएएसी के सदस्यों की समर्थन भी दिया। इन घटनाओं के बाद आंदोलन के आगे बढ़ते हुए पाकिस्तानी सेना के अत्याचार के खिलाफ आवाज बढ़ गई है।
पीओके में चल रहे आंदोलन के तहत लगातार अप्रत्यक्ष रूप से सरकार के विरुद्ध आक्रमण करने वाले लोगों के बीच बरसाई गोलियों के कारण जानवर नुकसान हुआ है। प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी
