नए कोलेस्ट्रॉल गाइडलाइन के मुताबिक, बच्चों के लिए जांच आवश्यक
Lipid Test – अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACCC) और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) ने 2026 में डिस्लिपिडेमिया (कोलेस्ट्रॉल) गाइडलाइन के अपडेट कर बड़ा बदलाव किया है। इन नए निर्देशों के अनुसार, 9 से 11 वर्ष के प्रत्येक बच्चे की कम-से-कम एक बार चर्बी के आकलन की आवश्यकता है। इसके अलावा, 19 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को लिपिड प्रोफाइल के लिए नियमित जांच कराने की सिफारिश की गई है। इसका मकसद है धमनियों में तेल जमाव के खतरे को पहले से ही रोका जा सके।
बचपन में जमा होने वाली चर्बी की भांप
नए निर्देशों में बताया गया है कि धमनियों में तेल जमाव की प्रक्रिया कई व्यक्तियों में बचपन या किशोरावस्था से ही शुरू हो सकती है। जब बच्चे में जन्मजात उच्च कोलेस्ट्रॉल या अन्य लिपिड समस्याएं होती हैं, तब शुरुआती जांच के द्वारा भविष्य में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है।
तीन नए जांचों के महत्व को बढ़ाया गया
गाइडलाइन में एक नया विकल्प दिया गया है जिसमें नियमित लिपिड प्रोफाइल जांच के अलावा तीन अहम जांचों के बारे में खास ध्यान दिया गया है। इनमें लिपोप्रोटीन (ए) शामिल है। इस जांच के माध्यम से वंशानुक्रमीय जोखिम का पता लगाया जा सकता है और आम कोलेस्ट्रॉल होने पर भी हार्ट अटैक की आशंका के बारे में अहम जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
इसके अलावा एपोलिपोप्रोटीन-बी जांच मधुमेह या मेटाबॉलिक सिंड्रोम वाले लोगों के खास जोखिम का बेहतर आकलन करने में मददगार साबित हो सकती है। तीसरा कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम (सीएसी) स्कैन शामिल है, जिसका उपयोग धमनियों में तेल जमाव के अंतर्गत दवा की आवश्यकता के निर्णय में किया जा सकता है।
जीवनशैली के खतरे के कारण युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बढ़े
गाइडलाइन बताती है कि आधुनिक जीवनशैली, जिसमें जंक फूड, दीर्घकालिक बैठे रहना, मोटापा, धूम्रपान, शराब के सेवन, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी शामिल है, बचपन में ही हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा रही है। इसके कारण दिल की बीमारियां अब अपेक्षाकृत कम उम्र में सामने आ रही हैं।
