CAG Report: बंगाल में आदिवासियों को नहीं मिला हक
Indianewslive247.com – CAG Report में पश्चिम बंगाल की पूर्व ममता सरकार द्वारा आदिवासी समुदाय के अधिकारों की उपेक्षा का खुलासा हुआ है। वर्ष 2017-18 से 2021-22 तक की अवधि में तृणमूल कांग्रेस की सरकार के दौरान खनन परियोजनाओं के तहत भूमि अधिग्रहण में गंभीर कमियां रही। CAG Report के अनुसार, आदिवासी भूमि मालिकों को उचित मुआवजा नहीं मिला और पुनर्वास प्रक्रिया में त्रुटियां दर्ज की गईं।
परियोजनाओं और जांच का विस्तृत दायरा
CAG Report में 66 भूमि अधिग्रहण मामलों की समीक्षा की गई। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की सालानपुर, श्रीपुर, कुनुस्तोरिया और परबेलिया परियोजनाएं तथा भारत कोकिंग कोल लिमिटेड की बाराकर परियोजना इनमें शामिल थीं। CAG Report ने आदिवासी क्षेत्रों में भूमि प्रबंधन की ऑडिट के दौरान इन परियोजनाओं की गहन जांच की।
मुआवजे में भारी कमी का खुलासा
CAG Report के अनुसार, आदिवासी जमीनों का अनुमानित बाजार मूल्य 17.79 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद, ECL और BCCL ने प्रत्यक्ष खरीद के माध्यम से केवल 2.55 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इससे आदिवासियों को 15.25 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। CAG Report में यह भी उल्लेख किया गया कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत मिलने वाला 100 प्रतिशत सोलैटियम भी आदिवासियों को नहीं दिया गया।
CAG Report में यह भी उल्लेख किया गया कि बाजार मूल्य पर प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत की दर से मिलने वाला अतिरिक्त मुआवजा भी किसी भी जांचे गए मामले में नहीं दिया गया।
भूमि मूल्य में असमानता की समस्या
CAG Report ने ECL द्वारा भुगतान की गई भूमि कीमतों में भारी असमानता का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार, आदिवासियों को उनकी एक एकड़ जमीन के बदले 2.50 लाख रुपये से 12.63 लाख रुपये तक का भुगतान किया गया, जबकि सरकार को इसी क्षेत्र में प्रति एकड़ 19.77 लाख रुपये से लेकर 1.25 करोड़ रुपये तक का मुआवजा दिया गया।
जिला प्रशासन की भूमिका और कमियां
CAG Report के अनुसार, जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करने में विफल रहा कि आदिवासी भूमि मालिकों को उनकी जमीन का उचित बाजार मूल्य मिले। जबकि कोल इंडिया की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति, 2012 में इसके स्पष्ट प्रावधान मौजूद हैं। CAG Report ने कहा कि जिला स्तर के अधिकारियों, जैसे राजस्व अधिकारी, जिला कलेक्टर और अन्य संबंधित अधिकारियों की निष्क्रियता और पर्याप्त भागीदारी न होने के कारण आदिवासी परिवारों को मुआवजे और पुनर्वास दोनों में नुकसान उठाना पड़ा।
ECL की सफाई और दलीलें
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया से जुड़े ECL अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में कोयला खनन परियोजनाओं के लिए अधिकांश भूमि का अधिग्रहण अनिवार्य अधिग्रहण के बजाय सीधे खरीद के माध्यम से पंजीकृत बिक्री विलेख के जरिए किया जाता है। CAG Report में ECL की इन दलीलों का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने बताया कि आदिवासी भूमि खरीदने के लिए पश्चिम बंगाल भूमि सुधार अधिनियम, 1955 के तहत राजस्व अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होती है।
पुनर्वास व्यवस्था में गंभीर खामियां
CAG Report ने पुनर्वास व्यवस्था में भी गंभीर खामियां पाईं। रिपोर्ट के अनुसार, ECL के कुनुस्तोरिया और परबेलिया क्षेत्रों में भूमि खरीद से पहले न तो सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण कराया गया और न ही सामाजिक प्रभाव आकलन किया गया, जबकि यह परियोजना से प्रभावित लोगों की पहचान और पुनर्वास कार्ययोजना तैयार करने के लिए अनिवार्य था। CAG Report में यह भी कहा गया कि कई मामलों में पुनर्वास कार्ययोजना बनाई ही नहीं गई या फिर जिला प्रशासन को इसमें शामिल नहीं किया गया।
कंपनियों की दलीलें और कैग की प्रतिक्रिया
ECL-कुनुस्तोरिया ने कहा कि चूंकि जमीन प्रत्यक्ष खरीद के जरिए ली गई थी, इसलिए जिला कलेक्टर की भागीदारी आवश्यक नहीं थी। वहीं BCCL-बाराकर का कहना था कि मुआवजा भूमि मालिकों के साथ आपसी सहमति से तय किया गया। हालांकि CAG Report ने दोनों दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि ये कोल इंडिया की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति तथा 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के अनुरूप नहीं हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ECL के सालानपुर, श्रीपुर और परबेलिया क्षेत्रों से इस संबंध में कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
कैग की सिफारिशें और निष्कर्ष
CAG Report ने राज्य सरकार को सिफारिश की है कि ECL और BCCL द्वारा किए जाने वाले भूमि अधिग्रहण में जि
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
CAG Report में आदिवासियों को कितना नुकसान हुआ?
CAG Report के अनुसार, आदिवासियों को कुल 33.05 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसमें 15.25 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान और 17.80 करोड़ रुपये का सोलैटियम न मिलने का नुकसान शामिल है।
कैग ने किन परियोजनाओं की जांच की?
CAG Report में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की सालानपुर, श्रीपुर, कुनुस्तोरिया और परबेलिया परियोजनाएं तथा भारत कोकिंग कोल लिमिटेड की बाराकर परियोजना की जांच की गई।
आदिवासियों को सोलैटियम क्यों नहीं मिला?
CAG Report के अनुसार, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत मिलने वाला 100 प्रतिशत सोलैटियम भी आदिवासियों को नहीं दिया गया।
कैग की मुख्य सिफारिशें क्या हैं?
CAG Report ने राज्य सरकार को सिफारिश की है कि ECL और BCCL द्वारा किए जाने वाले भूमि अधिग्रहण में जि
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