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भारतीय सेना ने बदला अपना ड्रेस कोड: कोलोनियल पीरियड की कई प्रथाएं खत्म, स्वदेशी को जोड़ा; रॉयल शब्द भी हटाया

भारतीय सेना ने अपनी वर्दी और ड्रेस कोड के नियमों में गहरा परिवर्तन किया है

भ रत य स न न बदल – भारतीय सेना ने औपनिवेशिक काल से चली आ रही कई प्रथाओं और प्रतीकों को समाप्त करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय पहचान और भारतीय संस्कृति के अनुरूप नए रूप में अपने ड्रेस कोड के नियमों को अपडेट किया गया है। इस बदलाव के तहत एएनआई के मुताबिक, सेना ने औपचारिक नागरिक पोशाक में बंदी जैकेट को शामिल कर लिया है।

नई यूनिफॉर्म नीति में कई विशिष्ट बदलाव लाए गए हैं। रिव्यूइंग ऑफिसर्स के लिए तलवार धारण करना अब बाध्यतापूर्वक नहीं होगा। इसके अलावा मेस ड्रेस नंबर 5 और 6 में पाउच बेल्ट के उपयोग को खत्म कर दिया गया है। यह बदलाव भारतीय सैन्य परंपराओं के संरक्षण और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नई ड्रेस नीति के अनुसार, शीतकालीन कार्य वर्दी के तहत बैटल जैकेट अब सभी रैंकों के लिए मानक बाहरी परिधान के रूप में होगी। इस जैकेट ने मौजूदा ड्रेस 3ए के स्थान ले लिया है। इस बदलाव को पूरी तरह से लागू करने के लिए तीन वर्ष के संक्रमण काल के बाद जून 2029 तक निर्धारित कर दिया गया है।

परिवर्तन के महत्व और प्रतिबंध

इस नीति में व्यक्तिगत आचरण और ड्रेस में आचरण के लेकर विस्तृत निर्देश दिए गए हैं। इसमें अत्यधिक अलग तरह के हेयर स्टाइल, बिना अनुमति दाढ़ी, दिखाई देने वाले इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, टैटू, बॉडी पियर्सिंग और कॉस्मेटिक मेकअप पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके अलावा राजनीतिक, धार्मिक या विरोध प्रदर्शनों, निजी पार्टियों और बिना अनुमति के मीडिया कार्यक्रमों में वर्दी पहनने की भी बिल्कुल मनाही होगी।

नई यूनिफॉर्म नीति के अनुसार, सैन्य अनुशासन और वर्दी में आचरण के बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

गतिशील परिवर्तन और भारतीय इतिहास के नामों का उपयोग

इस परिवर्तन के अलावा, सेना ने पहले से लागू किए गए कदमों का उल्लेख किया है। इस साल की शुरुआत में सेना ने 246 सड़कों, इमारतों और अन्य सुविधाओं के नाम बदले थे। इस अभियान के तहत 124 सड़कों, 77 कॉलोनियों और 27 इमारतों को भारतीय वीरता, बलिदान और नेतृत्व से जुड़े नाम दिए गए हैं।

दिल्ली कैंट में किर्बी प्लेस का नाम बदलकर केनुगुरुसे विहार और मॉल रोड का नाम अरुण खेतरपाल मार्ग रखा गया।

सेना की ओर से कहा गया है कि इन सभी कदमों का उद्देश्य भारतीय इतिहास और वीर सैनिकों की विरासत को संस्थागत पहचान के रूप में जोड़ना है। पहले से लागू किए गए बदलावों में फरवरी 2023 में बग्गियों, सेवानिवृत्ति समारोहों और डिनर कार्यक्रमों में पाइप बैंड जैसी औ

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