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एक्सप्लेनर: महाराष्ट्र-दिल्ली में किसी भी एक दल को मिले वोट से भी ज्यादा एसआईआर में कटे, ड्राफ्ट में क्या खास?

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Foto : Elizabeth Smith - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. SIR ड्राफ्ट: दिल्ली-महाराष्ट्र में कटे नाम
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  3. Frequently Asked Questions

SIR ड्राफ्ट: दिल्ली-महाराष्ट्र में कटे नाम

Indianewslive247.com – एक सप ल नर – विधानसभा चुनावों में किसी एक पार्टी को मिले कुल वोटों से भी अधिक मतदाताओं के नाम दिल्ली और महाराष्ट्र की ड्राफ्ट वोटर सूची से बाहर किए गए हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के तहत घर-घर सत्यापन के बाद सामने आए आंकड़े सिर्फ़ एक आँकड़ा नहीं — यह देश के सबसे बड़े मतदाता आधारों में संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। भाजपा, जिन्होंने दोनों राज्यों में पिछले चुनाव जीते, उन्हें भी ड्राफ्ट से हटाए गए नामों के बराबर वोट नहीं मिले थे। महाराष्ट्र में भाजपा को उनसे करीब 30 लाख वोट कम मिले, दिल्ली में करीब चार लाख कम।

दिल्ली: हर तीसरे मतदाता का नाम बाहर

दिल्ली में SIR के तहत देश में सबसे बड़ी कटौती दर्ज हुई। 2025 की मूल सूची में कुल 1.56 करोड़ पात्र मतदाता थे, जिनमें से 47,56,722 (लगभग 47.5 लाख) नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए — कुल मतदाताओं का लगभग 33 प्रतिशत। देश के बाकी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस प्रक्रिया के दौरान इतनी बड़ी कटौती कहीं नहीं दर्ज हुई। नए ड्राफ्ट रोल में अब केवल 97,53,577 (लगभग 97.5 लाख) वोटर दर्ज हैं, जिनके फॉर्म घर-घर सत्यापन के दौरान मिले और डिजिटल रूप में दर्ज किए जा सके।

हटाने की प्रक्रिया ASDDO श्रेणियों के तहत हुई — अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), मृत (Dead), डुप्लिकेट (Duplicate) और अन्य (Others)। दिल्ली में घुमंतू आबादी की बड़ी संख्या के कारण अधिकांश नामों को “स्थायी रूप से स्थानांतरित” के तहत चिह्नित किया गया। शहर की प्रकृति यही है कि लाखों लोग हर कुछ महीनों में पता बदलते हैं, और सत्यापन के समय वे अपने पुराने पते पर उपलब्ध नहीं होते।

महाराष्ट्र: पाँच में से एक से ज़्यादा नाम बाहर

महाराष्ट्र की स्थिति संख्यात्मक रूप में और भी बड़ी है। मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के अनुसार, घर-घर पुनरीक्षण के दौरान कुल 2.07 करोड़ मतदाताओं के फॉर्म एकत्र नहीं किए जा सके। बीते विधानसभा चुनाव 2024 के समय राज्य में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 9,71,41,289 (9.71 करोड़) थी। 2.07 करोड़ नामों के हटने से कुल मतदाताओं में लगभग 21.31 प्रतिशत की कमी आई। इस कटौती के बाद राज्य की प्रारंभिक ड्राफ्ट सूची में मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 7.64 करोड़ रह गई है।

महाराष्ट्र में नाम हटने के विस्तृत कारण सीईओ द्वारा दिए गए विवरण के अनुसार ये हैं: 75.52 लाख मतदाताओं के फॉर्म इसलिए नहीं मिले क्योंकि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) कम से कम एक से तीन बार उनके पते पर गए, परंतु व्यक्ति वहाँ उपलब्ध नहीं मिला। 76.80 लाख मतदाता अपना पुराना पता छोड़कर कहीं और चले गए हैं। 34.81 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है — आधिकारिक मृत्यु प्रमाणपत्रों और परिजनों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर इनके नाम हटाए गए। 17.63 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनके नाम किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र की सूची में पहले से दर्ज हैं, इसलिए एक जगह से नाम हटने पर भी उनका मताधिकार सुरक्षित रहता है। इसके अलावा कुछ अन्य कारणों से 2.23 लाख मतदाताओं के फॉर्म या तो नहीं मिले या इन्हें सूची से हटाया गया।

क्या नाम स्थायी रूप से कट गए?

यह सबसे ज़रूरी सवाल है, और जवाब स्पष्ट है: नहीं। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और दिल्ली के चुनाव अधिकारियों ने दोनों ही राज्यों में यह बात साफ़ कह दी है कि ड्राफ्ट से नाम बाहर होने का अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति हमेशा के लिए मतदाता सूची से हटा दिया गया

Frequently Asked Questions

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