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वाराणसी: आश्रम में रह रहीं बड़े घरों की 125 महिलाएं, अपनों ने सड़क पर छोड़ा; फिंगरप्रिंट, आइरिस स्कैन से पहचान

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Foto : Charles Davis - indianewslive247.com
Table of Contents
  1. वाराणसी: 125 महिलाओं को परिवार ने छोड़ा, बायोमेट्रिक ने पहचाना
  2. Related Reading
  3. Frequently Asked Questions

वाराणसी: 125 महिलाओं को परिवार ने छोड़ा, बायोमेट्रिक ने पहचाना

Indianewslive247.com – व र णस – वाराणसी की सड़कों, रेलवे क्रॉसिंग और अस्पताल गेटों पर लावारिस हालत में मिलीं ऐसी महिलाएँ जिनके परिवारों में जमींदारी, सरकारी नौकरी और सम्पदा का इतिहास रहा है। आज ये 125 महिलाएँ शहर के एक आश्रम में खाना, आश्रय और चिकित्सा पाती हैं — परन्तु अपना घर, अपना नाम-पता, अपना परिवार सब कुछ बायोमेट्रिक स्कैन के बिना उनसे छीन लिया गया था। फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन तकनीक के जरिए इनमें से 130 महिलाओं के आधार कार्ड की पहचान संभव हुई, फिर परिजनों से संपर्क किया गया। जवाब आया: इनकार।

पहचान की प्रक्रिया और आश्रम की भूमिका

आश्रम ने इन महिलाओं के भोजन, निवास और चिकित्सा की व्यवस्था संभाली है। प्रत्येक सप्ताह एक दिन आधार कैंप का आयोजन होता है, जिसमें फिंगरप्रिंट व आइरिस स्कैन के माध्यम से पहचान की जाती है। नाम-पता मिलने के बाद परिवारों को सूचित किया गया, पर सहयोग का कोई जवाब नहीं मिला। इस प्रक्रिया के दौरान पाँच महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है। अधिकांश मामलों में अपनों ने इन्कार कर दिया है।

“मानसिक रूप से अस्वस्थ, बुजुर्ग महिलाओं को घर से बाहर करना गंभीर और अमानवीय है। महिला आयोग सख्त रुख अपनाएगा। जिला प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर ऐसे मामलों की जांच कराई जाएगी। कानूनी कार्रवाई भी होगी। महिलाओं के अधिकारों और भरण-पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। काउंसिलिंग कराई जाएगी।” — चारू चौधरी, उपाध्यक्ष, राज्य महिला आयोग

चार प्रतीकात्मक मामलों की कहानी

मामला एक: छह महीने पहले कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल में एक 45 वर्षीय महिला लावारिस हालत में मिली। चार महीने तक आश्रम में इलाज के बाद बायोमेट्रिक डेटा से उसका आधार कार्ड निकाला गया। पता चला कि महिला के पिता चंदौली में जमींदार थे। पति वाराणसी के अर्दली बाजार में रहता है और जल निगम में कर्मचारी है। पिता की मृत्यु के बाद पति से संबंध टूट गया और उसने तलाक दे दी। मानसिक स्थिति बिगड़ने के बाद चचेरा भाई ने जमीन हड़प ली। अब वह भाई महिला को अपने पास रखने को तैयार नहीं है।

मामला दो: चार महीने पहले रोहनिया क्षेत्र में एक 75 वर्षीय महिला नाले के किनारे सड़क पर बेहोश मिली। तबीयत खराब थी, पर परिवार ने इलाज नहीं कराया और उसे वहीं छोड़ दिया। आश्रम में दो महीने तक रखकर इलाज किया गया, परन्तु महिला की मृत्यु हो गई। परिवार शव लेने के लिए भी नहीं आया।

Frequently Asked Questions

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