उद्धव ठाकरे का एलान: बोले- महाराष्ट्र विधानसभा से लेकर लाल किले तक फहराएंगे भगवा झंडा, भाजपा पर साधा निशाना
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मुंबई की दशहरा रैली में उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर बोला हमला
Indianewslive247.com – उद धव ठ कर क एल न – मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित शिवसेना (यूबीटी) की दशहरा रैली में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भगवा ध्वज, हिंदुत्व, युवाओं के आंदोलन और सरकार बदलने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि भगवा उनकी पार्टी की पहचान का हिस्सा है और इसे कोई छीन नहीं सकता। ठाकरे ने महाराष्ट्र विधानसभा से आगे लाल किले तक भगवा फहराने की बात कहते हुए कार्यकर्ताओं को राजनीतिक संघर्ष के लिए तैयार रहने का संदेश दिया।
रैली में उनके भाषण का मुख्य निशाना भाजपा रही। ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति समाज को बांटने और हिंदुत्व की छवि को नुकसान पहुंचाने का काम कर रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य के साथ संगठित होकर काम करने की अपील भी की।
लाल किले तक भगवा पहुंचाने का संकल्प
उद्धव ठाकरे ने कहा कि भगवा केवल किसी एक इमारत या क्षेत्र तक सीमित रहने वाला प्रतीक नहीं है। उनके अनुसार, यह उनकी पहचान और विचार का ध्वज है। उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा के ऊपर भगवा होने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे लाल किले तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा जाना चाहिए।
“भगवा हमारी पहचान है, इसे हमसे कोई नहीं छीन सकता।”
उनकी इस टिप्पणी को रैली में मौजूद समर्थकों के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा गया। दशहरा रैली शिवसेना की राजनीतिक परंपरा में लंबे समय से महत्वपूर्ण मंच रही है, जहां पार्टी अपने संगठनात्मक रुख और आगे की दिशा को स्पष्ट करती रही है। इस बार ठाकरे ने उसी मंच से आगामी राजनीतिक मुकाबले के लिए समर्थकों को सक्रिय रहने को कहा।
युवाओं के विरोध को बताया अधिकारों की लड़ाई
ठाकरे ने भाषण के दौरान युवाओं द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना युवाओं का लोकतांत्रिक अधिकार है। विशेष रूप से नए मतदाताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया और कहा कि लोगों को अपने मताधिकार तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए।
उन्होंने विरोध करने वाले युवाओं को लेकर इस्तेमाल की जाने वाली कठोर राजनीतिक भाषा पर भी सवाल उठाया। ठाकरे का कहना था कि जो युवा अपने हक के लिए सड़कों पर उतरते हैं, उन्हें नक्सली कहकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे युवा बदलाव की इच्छा रखने वाले क्रांतिकारी हो सकते हैं।
“अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले युवा नक्सली नहीं, क्रांतिकारी हैं।”
इस संदेश के जरिए उन्होंने युवाओं को राजनीतिक भागीदारी के लिए प्रेरित करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता की भूमिका केवल मतदान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे अपने अधिकारों और सार्वजनिक मुद्दों पर भी सक्रिय रहना चाहिए।
तिरंगे के रंगों पर भाजपा को घेरा
उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रीय ध्वज के रंगों को लेकर भी भाजपा की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि तिरंगे के रंगों को अलग-अलग अर्थ देकर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है। ठाकरे ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज की ताकत उसकी एकता में है और उसके रंगों को समाज को बांटने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
तिरंगा भारत की राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है और उसके तीन रंगों तथा अशोक चक्र का अपना संवैधानिक और राष्ट्रीय महत्व है। ठाकरे ने इसी संदर्भ में कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों को राजनीतिक टकराव या सामाजिक दूरी बढ़ाने का माध्यम बनाने के बजाय एकजुटता की भावना से देखा जाना चाहिए।
हिंदुत्व की छवि को लेकर सवाल
रैली में ठाकरे ने हिंदुत्व के मुद्दे पर भी भाजपा को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि भगवा वस्त्र या गमछा पहनने भर से कोई व्यक्ति सच्चा हिंदुत्ववादी नहीं बन जाता। महिलाओं से छेड़छाड़ करने वालों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ऐसे व्यवहार को हिंदुत्व के नाम पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
“भगवा पहनकर महिलाओं से छेड़छाड़ करने वाला सच्चा हिंदुत्ववादी नहीं हो सकता।”
ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति हिंदुत्व की प्रतिष्ठा पर असर डाल रही है। उनका तर्क था कि हिंदुत्व को आचरण, जिम्मेदारी और सामाजिक सम्मान के आधार पर परखा जाना चाहिए, न कि केवल बाहरी प्रतीकों या राजनीतिक नारों से।
कार्यकर्ताओं को सरकार बदलने का संदेश
भाषण के अंतिम हिस्से में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं से सरकार में बदलाव के लक्ष्य के लिए पूरी क्षमता के साथ जुटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सत्ता परिवर्तन के लिए संघर्ष कर रही है और यह लड़ाई लगातार जारी रहेगी। ठाकरे ने बेहतर समय आने का भरोसा जताते हुए संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का संदेश दिया।
दशहरा रैली में दिए गए उनके बयान यह संकेत देते हैं कि शिवसेना (यूबीटी) आने वाले राजनीतिक संघर्ष में भाजपा को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति आगे बढ़ाना चाहती है। भगवा, हिंदुत्व, मतदाता अधिकार और युवाओं की भागीदारी जैसे मुद्दों के जरिए पार्टी ने अपने समर्थकों को व्यापक राजनीतिक अभियान के लिए तैयार रहने का आह्वान किया है।
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