हिमाचल-उत्तराखंड की चोटियों पर बर्फबारी: भूस्खलन से केदारनाथ यात्रा बाधित, 16 तक रुक-रुक कर बारिश होने के आसार
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पहाड़ों में बदला मौसम, यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए बढ़ी सतर्कता
Indianewslive247.com – ह म चल उत तर ख ड – हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे पर्वतीय इलाकों में बारिश तथा ताजा बर्फबारी के बाद ठंड ने जोर पकड़ लिया है। मौसम के इस बदलाव का असर तीर्थयात्रा, सीमावर्ती क्षेत्रों की आवाजाही और पर्वतीय मार्गों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर बादल, बर्फ और वर्षा ने दृश्यता व यात्रा की परिस्थितियों को प्रभावित किया है, जबकि अगले कुछ दिनों तक मौसम के पूरी तरह सामान्य होने के संकेत नहीं हैं।
हिमाचल प्रदेश में वर्षा और हिमपात के कारण तापमान में कमी दर्ज की गई है। जनजातीय क्षेत्र कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान 1.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। राज्य में 16 अक्तूबर तक मौसम के खराब बने रहने की संभावना है। ऊंचाई वाले हिस्सों में बर्फ गिर सकती है, वहीं मध्य पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में रुक-रुककर वर्षा होने के आसार हैं।
13 और 14 अक्तूबर के लिए कुछ इलाकों में अंधड़ को लेकर यलो अलर्ट जारी किया गया है। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वालों को मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना होगा। बारिश के दौरान ढलानों से पत्थर या मलबा खिसकने की आशंका बढ़ती है, इसलिए पैदल मार्गों और संवेदनशील सड़कों पर प्रशासनिक निर्देशों का पालन जरूरी है।
आदि कैलाश में फिर बर्फबारी, सुबह दर्शन में आई बाधा
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में लगभग 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश क्षेत्र में शनिवार को एक बार फिर हिमपात हुआ। सुबह के समय बर्फबारी और मौसम की स्थिति के कारण कैलाश पर्वत के दर्शन नहीं हो सके। दर्शन की उम्मीद लेकर पहुंचे कई यात्रियों को शुरुआत में निराशा का सामना करना पड़ा।
दोपहर बाद मौसम खुलने पर स्थिति बेहतर हुई और 100 से अधिक यात्रियों ने आदि कैलाश के दर्शन किए। क्षेत्र में पहले से तीन से चार फीट तक बर्फ जमी हुई है। लगातार बर्फबारी के असर से यहां तापमान माइनस दो से माइनस तीन डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे कड़ाके की ठंड महसूस की जा रही है।
ऐसे ऊंचाई वाले स्थानों पर मौसम कुछ ही समय में बदल सकता है। साफ आकाश के बाद अचानक बादल छा जाना, तेज हवा चलना या हिमपात शुरू होना सामान्य चुनौती बन सकता है। इसलिए यात्रियों के लिए गर्म कपड़े, आवश्यक दवाएं और मौसम के अनुरूप तैयारी विशेष महत्व रखती है। दर्शन अथवा यात्रा का समय मौसम खुलने पर निर्भर हो सकता है, इसलिए जल्दबाजी से बचना सुरक्षित विकल्प है।
चीरबासा में मलबे से केदारनाथ पैदल मार्ग तीन घंटे बंद
रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर चीरबासा के पास मलबा और पत्थर आने से शनिवार सुबह यात्रियों की आवाजाही रोकनी पड़ी। सुबह छह बजे से नौ बजे तक पैदल मार्ग पर आवागमन बंद रखा गया। सुरक्षा कारणों से गौरीकुंड और सोनप्रयाग में भी यात्रियों को आगे जाने से रोका गया।
सुबह नौ बजे मार्ग खुलने के बाद यात्रा को फिर से सुचारु किया गया। इससे पहले तेज बारिश के बाद रात में चीरबासा क्षेत्र में मलबा आने के कारण रास्ता बाधित हुआ था। पर्वतीय पैदल मार्गों पर बारिश के बाद ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर मार्ग की जांच और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना आवश्यक होता है।
केदारनाथ जाने वाले यात्रियों के लिए यह घटना मौसम आधारित यात्रा प्रबंधन की अहमियत को रेखांकित करती है। यात्रा के दौरान निर्धारित पड़ावों पर रुकने, अधिकारियों के निर्देश मिलने तक प्रतीक्षा करने और रास्ता साफ होने की सूचना के बाद ही आगे बढ़ने से जोखिम कम किया जा सकता है। खराब मौसम में कुछ घंटों की देरी असुविधाजनक जरूर हो सकती है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी कदम है।
16 अक्तूबर तक उत्तर भारत में बना रह सकता है असर
उत्तर भारत के पहाड़ी तथा मैदानी हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रहने का अनुमान है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 16 अक्तूबर तक अलग-अलग समय पर बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर भी जारी रह सकता है।
11 अक्तूबर तथा 14 से 15 अक्तूबर के बीच कुछ स्थानों पर वर्षा होने के संकेत हैं। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में भी 16 अक्तूबर तक छिटपुट बारिश हो सकती है। मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश से तापमान और दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है, जबकि पहाड़ों में यही वर्षा यात्रा और सड़क संपर्क के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण बन जाती है।
यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पर्वतीय क्षेत्रों की ओर जा रहे लोगों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही निकलना चाहिए। बर्फबारी या तेज वर्षा के दौरान ऊंचाई वाले मार्गों पर तापमान तेजी से गिर सकता है। गर्म कपड़े, पानी, आवश्यक भोजन और दवाओं के साथ यात्रा करना उपयोगी रहेगा। जिन यात्रियों को ठंड या ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
केदारनाथ पैदल मार्ग या आदि कैलाश जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम खुलने तक रुकना पड़ सकता है। ऐसे में यात्रा कार्यक्रम में अतिरिक्त समय रखना बेहतर है। स्थानीय स्तर पर जारी चेतावनियों, मार्ग बंद होने की सूचना और प्रशासन के सुरक्षा निर्देशों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
बारिश और हिमपात का यह दौर पर्वतीय इलाकों में सर्दी के बढ़ते असर का संकेत दे रहा है। जहां बर्फ की सफेद परतें यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं, वहीं यही परिस्थितियां दुर्गम मार्गों पर सतर्कता की मांग भी करती हैं। आने वाले दिनों में मौसम पर नजर रखते हुए सुरक्षित, धैर्यपूर्ण और तैयार यात्रा ही सबसे महत्वपूर्ण होगी।
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