राम मंदिर : चढ़ावा चोरी के 70 घटनाएं कैमरा में कैद, अप्रैल 27 से पहले भी गड़बड़ियां
ओपीएस के अनुपालन में कमजोरी
र म म द र – एसआईटी के अध्ययन के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधि डॉ. अनिल मिश्रा ने बैंक के साथ मिलकर दिशा-निर्देश तैयार किए थे। ओपीएस लागू होने के बाद उसके अनुपालन की निगरानी करना उनकी जिम्मेदारी रही। लेकिन सतत निगरानी और पर्यवेक्षण में कमजोरी दिखाई दी।
गणना कक्ष की नियुक्ति और सुरक्षा कमजोरी
अधिकारियों की ओर से गणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के अनुपालन में कमजोरी रही। रिपोर्ट में बताया गया है कि नियमित तलाशी के अभाव में कथित चोरी की घटनाएं रोकने में विफलता हुई। इसके अलावा, गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को मुख्य रूप से सुरक्षा के लिए जिम्मेदार माना गया है।
चोरी के सूत्र और अपराध के अवसर
रिपोर्ट में बताया गया है कि रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव के पास मंदिर परिसर की कई हुंडियों की चाबियां रहीं, जिसके लिए कोई औपचारिक या लिखित अनुमति नहीं मिली।
एसआईटी ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक माना है।
इसके अलावा, उन्होंने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव को गणना ड्यूटी में सिफारिश की, जिससे चोरी का अवसर बना।
सीसीटीवी फुटेज के अभाव और वेशभूषा की समस्या
एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि गणना के दौरान सीसीटीवी फुटेज की प्रभावी निगरानी करना जरूरी थी। लेकिन अधिकारियों के अनुसार केवल 45 दिन का बैकअप रखा जा रहा था, जबकि ऑडिट रिपोर्ट में 180 दिन के लिए सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी। बैंक के प्रतिनिधियों ने गणना कर्मियों को निर्धारित वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई।
जांच अभी जारी, अंतिम निष्कर्ष आने में विलंब
एसआईटी ने बताया कि यह एक प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है और अभी जांच जारी है। अंतिम रिपोर्ट में पर्यवेक्षणीय विफलताओं, प्रशासनिक जवाबदेही, संस्थागत खामियां और सुधारात्मक उपायों पर विस्तृत निष्कर्ष और सिफारिशें दिखाई गईं।
