खड़े हनुमान जी: प्राचीन इंजीनियरिंग है या चमत्कार? विशेषज्ञ बोले- स्केनिंग रिपोर्ट बिना प्रतिमा को छूना खतरनाक
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खड़े हनुमान जी की प्रतिमा के विस्थापन से पहले होगी वैज्ञानिक जांच
Indianewslive247.com – खड हन म न ज – उज्जैन के श्री खड़े हनुमान जी मंदिर की प्रतिमा को विस्थापित करने का विषय चर्चा में है। मंदिर का बाहरी हिस्सा हटाया जा चुका है, लेकिन प्रतिमा को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है। श्रद्धालुओं और संत समाज के विरोध के बीच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा की स्थिति, आधार और संरचना की वैज्ञानिक जांच के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
प्रशासन के अनुसार, अभी तक प्रतिमा को हटाने या हिलाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। विशेषज्ञों की तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को सुरक्षित रूप से निकाला जा सकता है या नहीं।
विशेषज्ञों ने बताया क्यों जरूरी है स्कैनिंग रिपोर्ट
मंदसौर के सम्राट यशोधर्मन पुरातत्व संग्रहालय के संस्थापक कैलाशचंद्र पांडे का कहना है कि उन्होंने एक हजार से अधिक मूर्तियों का विस्थापन कराया है, लेकिन इस तरह का मामला उन्होंने पहले नहीं देखा। उनके मुताबिक प्राचीन काल में प्रतिमाओं को आधार सहित तैयार कर स्थापित किया जाता था, इसलिए किसी भी प्रतिमा को उसके मूल आधार के साथ ही निकालना सुरक्षित माना जाता है।
पांडे ने पशुपतिनाथ मंदिर के विकास कार्य का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां 12 फीट की सहस्त्रलिंग प्रतिमा को उसके तीन फीट गहरे आधार के साथ निकाला गया था। उनका कहना है कि यदि आधार में कोई कमजोरी या जटिल संरचना हो, तो बिना जांच के प्रतिमा हटाने पर नुकसान हो सकता है।
प्रतिमा के आसपास खुदाई कर उसके नीचे के हिस्से और आधार को समझना जरूरी है। इसके बाद लकड़ी का सहायक आधार बनाकर उसे धीरे-धीरे सरकाने जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है।
प्रतिमा निकालने में कैसी तकनीक अपनाई जा सकती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, मूर्ति को निकालने से पहले उसके चारों ओर सावधानी से खुदाई की जाती है। जब आधार और निचला हिस्सा स्पष्ट हो जाता है, तब लकड़ियों या अन्य सुरक्षित सहारे की मदद से प्रतिमा को धीरे-धीरे स्थानांतरित किया जाता है। इसी तरह की तकनीकों से विदेशों में बड़े भवनों और महलों तक को स्थानांतरित किए जाने के उदाहरण मिलते हैं।
पांडे का मानना है कि यदि पूरी वैज्ञानिक और तकनीकी प्रक्रिया अपनाने के बाद भी खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने में असाधारण कठिनाई आती है, तो उसे लोगों की आस्था से जुड़ा विषय भी माना जा सकता है।
धातु और स्थापना पद्धति की जांच भी अहम
आर्किटेक्ट अतुल सेठ के मुताबिक विकास कार्यों के दौरान प्रतिमाओं को दूसरी जगह स्थापित करना सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन हर मूर्ति की बनावट और स्थापना पद्धति अलग होती है। उज्जैन की प्रतिमा किस तकनीक से स्थापित की गई थी, यह जानना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सीधे मशीनों का उपयोग करने से प्रतिमा को क्षति पहुंचने का जोखिम रहता है। मिट्टी, आधार और प्रतिमा के नीचे की संरचना की स्कैनिंग होने के बाद ही विस्थापन की सही योजना बनाई जा सकती है। प्रतिमा किस धातु से बनी है, इसकी जांच भी आवश्यक है, क्योंकि इससे उसकी मजबूती और सुरक्षित परिवहन की प्रक्रिया तय करने में मदद मिलेगी।
खड़े हनुमान जी मंदिर: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रतिमा को अभी तक हटाया गया है क्या?
नहीं। प्रशासन के अनुसार, प्रतिमा को हटाने या हिलाने का कोई प्रयास अभी तक नहीं किया गया है।
स्कैनिंग रिपोर्ट क्यों जरूरी है?
स्कैनिंग से प्रतिमा के नीचे का आधार, मिट्टी की स्थिति और स्थापना की तकनीक का पता चलेगा। इससे नुकसान की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।
प्रतिमा का विस्थापन कब होगा?
विस्थापन का निर्णय वैज्ञानिक जांच और विशेषज्ञों की तकनीकी राय मिलने के बाद ही लिया जाएगा।
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