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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: मिश्रा-पांडेय ने पूछताछ में उगले कई राज, बताया हेराफेरी का तरीका; आज बड़ी बरामदगी संभव

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: आरोपियों ने पूछताछ में फर्जी रसीदों के बारे में खुलासा किया

र म म द र चढ व – राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में पुलिस रिमांड पर रखे गए तीन आरोपियों से जानकारी लेने के दौरान उनके बयान में रकम के छिपावे की विधि विस्तार से सामने आई। आरोपियों ने बताया कि चोरी के धन को अपने निकट वाले लोगों और संबंधियों के बीच रुपये के आवागमन के जरिए छिपाया जाता था ताकि धन के स्रोत के बारे में शक उत्पन्न न हो।

बैंक के विवरण से इस बात की पुष्टि भी हो चुकी है कि इस विधि के जरिए धन का आवागमन लंबे समय तक चलता रहा। अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय ने पूछताछ में कई राज बरामद किए। शुक्रवार को रकम और जेवर के बरामदगी की संभावना अब उपलब्ध हो सकती है।

कोर्ट की मंजूरी के बाद पुलिस बुधवार सुबह लगभग सात बजे जिला जेल से आरोपियों को कस्टडी में ले गई। आरोपियों ने स्वीकार किया कि टिन्नू व गणना इंचार्ज सुभाष श्रीवास्तव के साथ मिलीभगत होने से चोरी की रकम के पारितोष करने में कोई बाधा नहीं रहती थी।

तीनों आरोपियों ने बताया कि धन व जेवर को छिपाकर रखा जाता था। जेवर की बरामदगी के लिए पुलिस ने उसी बाग में आरोपियों को लेकर गई, जहां चोरी के संपत्ति का बंटवारा होता था। इस स्थान के बारे में पहले अविनाश शुक्ला ने खुलासा किया था।

फर्जी रसीदों की जांच चल रही है

आरोपियों ने एक दान राशि संबंधी पर्ची के साथ-साथ फर्जी रसीदों के बारे में बताया कि जब लोगों से चंदे के नाम पर धन लेकर पर्ची दी जाती थी, तो उन्होंने नकली रसीदें छपवाई थीं। इस तरह से धन के आवागमन की विधि सामने आई।

चोरी के मामले की जांच के दायरे में आरोपी अनुकल्प मिश्रा की कार के बारे में भी जानकारी मिली है। उसकी खरीद में इस्तेमाल हुए धन के स्रोत, भुगतान की विधि व बैंक खातों से हुए लेनदेन तथा स्वामित्व के बारे में दस्तावेजों की जांच चल रही है।

अब तक पता लगाया गया है कि कार की खरीद में चढ़ावा चोरी की रकम का इस्तेमाल तो नहीं हुआ। पुलिस आगे की जांच के लिए इस बारे में विस्तार से जानकारी जुटा रही है।

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