राम मंदिर के चंदा चोर: संपत्ति में 50 से 100 गुना बढ़ोतरी एसआईटी जांच में खुलासा हुआ
र म म द र क च – राम मंदिर के चंदा चोर विवाद में अब अधिक खुलासा हो गया है। एसआईटी के जांच में पाया गया कि विभिन्न व्यक्तियों की संपत्ति में 50 से 100 गुना बढ़ोतरी हुई है। जांच में देखा गया कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की अचानक बढ़ी संपत्ति का संबंध चढ़ावा के मामले से है। इस आधार पर जांच के अगले चरण में आगे बढ़ाई गई है।
एसआईटी की रिपोर्ट में खुलासा सामने आया है
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों के बीच आपसी विवाद बढ़ते जा रहे हैं। जिन व्यक्तियों ने शिकायत की थी, उनके मामले अब खुले हुए हैं। बर्बाद की गई रकम के बंटवारे के बारे में निश्चित तौर पर जानकारी सामने आई है। राम मंदिर परिसर में करीब 800 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से 200 कर्मचारी ट्रस्ट के द्वारा ही नियुक्त किए गए हैं। इन लोगों के खिलाफ कोई जांच-पड़ताल नहीं की गई थी।
एक सिंधी संगठन ने चांदी की दो सौ ईंटें गायब हो गईं, जबकि विश्वकर्मा परिवार ने चरण पादुका व हार दान करने की बात कहते हुए बताया था कि उनको कोई रसीद नहीं दी गई। अहम अंदेशा जताया गया था कि इन चीजों का गबन किया गया है।
जांच में पाया गया है कि मंदिर प्रबंधन के द्वारा ट्रस्ट के पदाधिकारियों व उनके संबंधित व्यक्तियों के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती थी। इस तरह की व्यवस्था के फलस्वरूप आवेदन प्रक्रिया में कोई सावधानी नहीं बरती गई। करोड़ों रुपये के लाभ कई लोगों को मिले, जिसमें टिन्नू, अनुकल्प, लवकुश और सुभाष के अलावा अन्य व्यक्तियों की संपत्ति में भारी बढ़ोतरी देखी गई। राम मंदिर के चंदा चोर विवाद में विभिन्न अंगों की भागीदारी पाई गई है।
संपत्ति वृद्धि के पीछे कारण खोले गए
एसआईटी के जांच द्वारा राम मंदिर के चंदा चोर विवाद में लगातार संपत्ति वृद्धि के पीछे कारणों की खोज जारी है। जांच में देखा गया कि कई व्यक्तियों की बर्बाद की गई रकम के लाभ के बारे में बताया गया है। राम मंदिर के चंदा चोर के लिए सबूत एकत्र किए गए हैं, जो लाभ के अंतर के साथ निर्देशित हैं। इस जांच के अंतर्गत देखा गया कि ट्रस्ट के अधिकारियों व उनके संबंधित व्य
